आजकल घर बनाने से पहले लोग बिल्डिंग मटेरियल्स पर काफी रिसर्च करते हैं. क्योंकि, घर कोई एक- दो दिन की जरूरत नहीं होती है. इसमें पीढ़ियां गुजर जाती हैं. ऐसे में लोग घर को मजबूत और टिकाऊ बनाना चाहते हैं. इसके लिए बिल्डिंग मटेरियल्स खासकर सीमेंट के इस्तेमाल को लेकर सोच- समझकर फैसला लेते हैं.
इन दिनों एक खास तरह के सीमेंट का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है. इस सीमेंट को कंपोजिट सीमेंट कहते हैं. यह OPC और PPC से भी दोगुना मजबूत होता है. चलिए जानते हैं कि कंपोजिट सीमेंट क्या होता है? इसके फायदे क्या हैं और क्यों मकान बनाने में इसका इस्तेमाल किया जाता है?
कंपोजिट सीमेंट एक आधुनिक और उन्नत किस्म का मिश्रित सीमेंट है. इसे पोर्टलैंड क्लिंकर, जिप्सम, फ्लाई ऐश और स्लैग को मिलाकर तैयार किया जाता है. यानी कंपोजिट सीमेंट एक ऐसा मिश्रित सीमेंट है जिसे पोर्टलैंड सीमेंट क्लिंकर, जिप्सम, फ्लाई ऐश, जो PPC में इस्तेमाल होती है और ब्लास्ट फर्नेस स्लैग, जो PSC में इस्तेमाल होती है. दोनों को एक साथ मिलाकर बनाया जाता है.
आसान शब्दों में समझें तो यह कंपोजिट सीमेंट वास्तव में PPC (पोर्टलैंड पॉज़ोलाना सीमेंट) और PSC (पोर्टलैंड स्लैग सीमेंट) को मिलकर बनता है. चूंकि इसमें PPC और PSC दोनों की क्वालिटी होती है. इसलिए यह सीमेंट PPC की तरह बेहतर फिनिश देता है. इससे दरारें भी कम आती हैं. वहीं PSC की तरह अतिरिक्त मजबूती और टिकाऊपन आता है.
कहां होता है इसका इस्तेमाल
इस सीमेंट को एक ऑल-राउंडर सीमेंट माना जाता है. इसका इस्तेमाल घर और बड़े निर्माण कार्यों, दोनों में किया जाता है. घर बनाने में इसका इस्तेमाल नींव भरने और मजबूत बेस तैयार करने में किया जाता है. आरसीसी जैसे स्ट्रक्चर को बनाने में और छत की ढलाई में भी कंपोजिट सीमेंट काम में आता है.इससे अलावा टाइल्स लगाने, प्रीकास्ट आइटम्स और पानी की टंकियों या नमी वाले स्थानों पर भी यह इस्तेमाल होता है.
कंपोजिट सीमेंट के फायदे
कंपोजिट सीमेंट का कंस्ट्रक्शन वर्क में इस्तेमल के कई सारे फायदे हैं. इसमें से गर्मी कम निकलती है. इस वजह से यह घर को ठंडा रखता है. इससे कंक्रीट में सिकुड़न और सतह पर दरारें आने के चांस बहुत कम हो जाते हैं. यह पानी, सल्फेट और क्लोराइड से बचाता है. यही वजह है कि इस सीमेंट से कॉलम या पिलर बनाने पर सरिए में जंग लगने से रोकता है.
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कंपोजिट सीमेंट की ताकत समय के साथ यानी 90 दिनों और उसके बाद भी लगातार बढ़ती रहती है. इसमें पारंपरिक पीपीसी की तुलना में बेहतर कॉम्प्रेसिव स्ट्रेंथ यानी दबाव सहन करने की क्षमता होती है. यही वजह है कि यह स्ट्रक्चर को टिकाऊ बनाए रखता है.