उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल बुधवार को मां नंदा-सुनंदा के जयकारों से गूंज उठी. हल्की बारिश के बीच 124वें श्री नंदा देवी महोत्सव के नगर भ्रमण में हजारों श्रद्धालु डोले के साथ चलते नजर आए. हाथों में पूजा की थाली, जुबां पर जयकारे और आंखों में आस्था लिए भक्तों ने मां नंदा-सुनंदा को विदाई दी. बारिश भी श्रद्धालुओं के उत्साह को नहीं रोक सकी.
नयना देवी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा-सुनंदा का डोला नगर भ्रमण के लिए निकला. मंदिर के मुख्य द्वार पर डोले पर पुष्पवर्षा की गई. इसके बाद श्रद्धालुओं का हुजूम मां के दर्शन और आशीर्वाद के लिए उमड़ पड़ा. डोला डीएसए मैदान, मस्जिद और शारदा संघ होते हुए माल रोड से तल्लीताल की ओर बढ़ा.
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यात्रा के मार्ग पर दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग हाथ जोड़कर मां के दर्शन का इंतजार करते दिखाई दिए. डोला आगे बढ़ता गया तो श्रद्धालुओं का उत्साह भी बढ़ता गया. महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और युवाओं ने इसमें भाग लिया. जगह-जगह आरती उतारी गई और पुष्पवर्षा हुई. ढोल-दमाऊं, बैंड-बाजे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया.
बारिश के बीच आस्था का सैलाब
नगर भ्रमण के दौरान पारंपरिक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कुमाऊं की लोक संस्कृति की झलक भी दिखाई. हल्की बारिश लगातार होती रही, लेकिन श्रद्धालुओं के कदम नहीं रुके. नैनीताल की सड़कों से लेकर पहाड़ियों तक मां नंदा और मां सुनंदा के जयकारे सुनाई देते रहे. पूरा शहर धार्मिक आस्था और लोक परंपरा के रंग में रंगा नजर आया.
मां के डोले के साथ चल रहे श्रद्धालुओं के लिए शहर में जगह-जगह सेवा के इंतजाम किए गए. अलग-अलग स्थानों पर भंडारे लगाए गए. लोगों को हलवा-पूरी, पानी, फ्रूटी और प्रसाद वितरित किया गया. बारिश के बावजूद स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों का सेवा भाव कायम रहा. कोई प्रसाद बांटता नजर आया तो कोई श्रद्धालुओं को पानी पिलाता दिखा.
बुधवार को नैनीताल की सड़कों पर सिर्फ मां नंदा-सुनंदा का डोला ही नहीं था, बल्कि आस्था, परंपरा और सेवा की पूरी संस्कृति दिखाई दी. माल रोड से तल्लीताल तक श्रद्धालुओं का सैलाब नजर आया. हर तरफ एक ही स्वर सुनाई दिया- जय मां नंदा, जय मां सुनंदा.
कैलाश के लिए विदा होंगी मां नंदा-सुनंदा
यह नगर भ्रमण केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कुमाऊं की सदियों पुरानी आस्था, लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत रूप भी नजर आया. श्रद्धालुओं के चेहरों पर मां के दर्शन की खुशी थी और आंखों में विदाई की नमी. हर कदम डोले के साथ मां के प्रति श्रद्धा और विश्वास से भरा हुआ था.
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तल्लीताल पहुंचने के बाद मां नंदा-सुनंदा के डोले को फिर मल्लीताल की ओर लाया जाएगा. इसके बाद देर शाम ठंडी सड़क स्थित गोलू देवता मंदिर के समीप से डोले का नैनी झील में विसर्जन किया जाएगा. इसी के साथ मां नंदा-सुनंदा अपने मायके नैनीताल से कैलाश के लिए विदा होंगी.
मां की विदाई के इस भावुक पल में हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम होंगी. नैनीताल की फिजाओं में एक बार फिर मां के जयकारे गूंजेंगे और श्रद्धालु भावुक होकर मां नंदा-सुनंदा को कैलाश के लिए विदा करेंगे.