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आस्था के साथ व्यवस्था भी ज़रूरी: कैंची धाम में श्रद्धालुओं की परीक्षा कब तक? कैंची धाम में ट्रैफिक प्रबंधन पूरी तरह बेनकाब

उत्तराखंड का कैंची धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है, लेकिन बढ़ती भीड़ के साथ ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन की समस्याएं भी गंभीर होती जा रही हैं. वीकेंड और विशेष अवसरों पर लंबा जाम श्रद्धालुओं की यात्रा को कठिन बना देता है. हर बार ट्रैफिक प्लान बनने के बावजूद हालात नहीं बदलते.

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कैंची धाम में हर हफ्ते लग रहा है जाम. (photo: Lila Singh Bisht/ITG)
कैंची धाम में हर हफ्ते लग रहा है जाम. (photo: Lila Singh Bisht/ITG)

उत्तराखंड का विश्वविख्यात कैंची धाम आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है. बाबा नीम करौली महाराज के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. लेकिन जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन की खामियां भी उजागर होती जा रही हैं.

दर्शन से पहले जाम की परीक्षा -
वीकेंड, छुट्टियों और विशेष अवसरों पर कैंची धाम की ओर जाने वाले मार्ग कई-कई किलोमीटर लंबे जाम में तब्दील हो जाते हैं. श्रद्धालु घंटों वाहनों में फंसे रहते हैं. छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक परेशान होती हैं. कई श्रद्धालु दर्शन करने से पहले ही थक जाते हैं और वापस लौटते समय व्यवस्थाओं को कोसते हुए अपने राज्यों तक यह संदेश लेकर जाते हैं कि आस्था तो अपार है, लेकिन व्यवस्था बेहद कमजोर.

कैंची धाम में हर दिन बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं श्रद्धालु. (Photo: Lila Singh Bisht/ITG)

हर बार ट्रैफिक प्लान, लेकिन नतीजा वही -
हर वीकेंड और भीड़भाड़ वाले दिनों से पहले पुलिस ट्रैफिक प्लान तैयार करती है. रूट डायवर्जन जारी होते हैं, पार्किंग की घोषणाएं होती हैं और बेहतर व्यवस्था के दावे किए जाते हैं. लेकिन सवाल यह है कि यदि योजनाएं प्रभावी हैं, तो हर बार वही जाम और वही अव्यवस्था क्यों दिखाई देती है? हकीकत यह है कि बंद कमरों में तैयार किए गए ट्रैफिक प्लान आज तक ज़मीन पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं. जब तक इन योजनाओं को मौके पर खड़े होकर लागू नहीं किया जाएगा, तब तक उनका उद्देश्य अधूरा ही रहेगा.

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वरिष्ठ अधिकारियों को संभालनी होगी कमान -
ट्रैफिक प्रबंधन केवल कागज़ों और बैठकों से नहीं चलता. आवश्यकता इस बात की है कि पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं फील्ड में उतरें, संवेदनशील स्थानों पर मौजूद रहें, हालात के अनुसार तत्काल निर्णय लें और पूरे ट्रैफिक सिस्टम की निगरानी करें. ज़मीनी नेतृत्व के बिना कोई भी ट्रैफिक प्लान सफल नहीं हो सकता.

जाम के चलते रेंगते वाहन. (photo: Lila Singh Bisht/ITG)

पहाड़ों की अपनी सीमाएं, इसलिए चाहिए स्थायी समाधान
कैंची धाम तक पहुंचने वाले पहाड़ी मार्गों की अपनी भौगोलिक सीमाएं हैं. ऐसे में हर सप्ताह अस्थायी इंतजाम करने के बजाय दीर्घकालिक समाधान पर काम करने की जरूरत है. स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट और आधुनिक भीड़ नियंत्रण व्यवस्था अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुके हैं.

आस्था के सम्मान का सवाल -
कैंची धाम आने वाला हर श्रद्धालु अपने साथ बाबा के प्रति अटूट विश्वास लेकर आता है. उसकी यात्रा श्रद्धा, शांति और सकारात्मक अनुभव से भरपूर होनी चाहिए, न कि घंटों के जाम और अव्यवस्था से. आस्था के नाम पर अव्यवस्था किसी भी श्रद्धालु की परीक्षा नहीं बननी चाहिए.
कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय है, लेकिन इस गौरव को सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं से ही बनाए रखा जा सकता है. अब समय आ गया है कि कागज़ी ट्रैफिक प्लान से आगे बढ़कर स्थायी समाधान लागू किए जाएं और वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मैदान में उतरकर उनकी प्रभावी मॉनिटरिंग करें. 
 

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