
तेलंगाना के चार लोग, जो आम नौकरी की तलाश में रूस गए थे, कथित तौर पर एक रूसी मिलिट्री कैंप में फंस गए हैं. उनके परिवारों का आरोप है कि उन्हें मिलिट्री से जुड़े कामों में लगा दिया गया है.
इन लोगों की पहचान पुराने निजामाबाद जिले के भुक्या रविंदर, भुक्या अशोक और मेगावत प्रकाश, और कामारेड्डी जिले के मोहम्मद अफजल खान के तौर पर हुई है. परिवारों के मुताबिक, वे कुछ महीने पहले रूस गए थे, क्योंकि उन्हें हेल्पर, क्लीनर, सिक्योरिटी गार्ड या सपोर्ट स्टाफ की नौकरी का वादा किया गया था.
परिवारों का आरोप है कि इन लोगों ने एजेंटों को लगभग 3-3 लाख रुपये दिए थे, क्योंकि उन्हें महीने में 2 लाख रुपये तक की सैलरी वाली नौकरी का ऑफ़र दिया गया था. इसके बाद उन्हें लगभग 12 घंटे या उससे ज़्यादा समय तक यात्रा कराई गई और कथित तौर पर एक मिलिट्री कैंप या जंगल वाले इलाके में ले जाया गया.

परिवारों के अनुसार, आम नौकरी के लिए रूस जाने के बावजूद, इन लोगों को हथियार दिए गए, मिलिट्री ट्रेनिंग दी गई और मिलिट्री की वर्दी पहनाई गई. इनमें से एक व्यक्ति ने कथित तौर पर एक वीडियो भेजा जिसमें दावा किया गया कि उन्हें जंगल में रखा जा रहा है और वहां से निकलने की कोशिशों को रोका जा रहा है.
परिवार के सदस्यों ने यह भी कहा कि कुछ लोगों को रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र के पास के इलाकों में भेज दिया गया है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. अपने रिश्तेदारों को भेजे गए मैसेज में, इन लोगों ने कथित तौर पर तोपखाने की गोलाबारी और बमबारी के बारे में बताया और आशंका जताई कि वे मारे जा सकते हैं.
परिवारों ने तुरंत दखल की मांग करते हुए तेलंगाना सरकार से संपर्क किया है. उनकी शिकायत कथित तौर पर जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के NRI सेल को भेज दी गई है. उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अपील की है कि वे कूटनीतिक स्तर पर दखल दें और इन लोगों की भारत सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करें.