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'या तो मैं CM बनूंगा...', AIADMK के बागी का दावा- पलानीस्वामी ने खारिज किया दलित CM का प्रस्ताव

AIADMK के बागी सी वी शनमुगम ने दावा किया कि DMK ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर थिरुमावलवन का नाम सुझाया था. उन्होंने कहा कि इस कदम से राज्य का पहला दलित मुख्यमंत्री बन सकता था, लेकिन EPS ने इससे मना कर दिया.

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TVK को सपोर्ट के मुद्दे पर AIADMK दो फाड़ हो गई है.  (Photo: ITG)
TVK को सपोर्ट के मुद्दे पर AIADMK दो फाड़ हो गई है. (Photo: ITG)

तमिलनाडु को इतिहास में पहली बार दलित सीएम मिलने वाला था. इसके लिए राज्य के सियासी इतिहास में एक ऐसे गठबंधन की स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी जो अभूतपूर्व थी. राज्य में पहली बार दलित सीएम बनाने के लिए AIADMK के एक धड़े ने अपने धुर राजनीतिक विरोधी DMK को समर्थन देने का फैसला कर लिया था. 

ये खुलासा AIADMK के एक बागी विधायक ने आजतक के साथ बातचीत में किया है. 

AIADMK के एक बागी नेता ने बुधवार को दावा किया कि DMK ने VCK चीफ थिरुमावलवन को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिससे वह राज्य के पहले दलित CM बन जाते, लेकिन इस विधायक ने आरोप लगाया कि AIADMK के जनरल सेक्रेटरी के पलानीस्वामी ने इस प्रस्ताव को मना कर दिया. 

तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के बाद बोलते हुए AIADMK के बागी नेता और गुट के हेड सी वी शनमुगम ने कहा कि तमिलनाडु को "अनुसूचित जाति समुदाय से किसी के मुख्यमंत्री बनने का एक बहुत ही दुर्लभ मौका" और "अकल्पनीय, असंभव मौका" मिला है. 

शनमुगम ने दावा किया कि DMK और लेफ्ट पार्टियों ने थिरुमावलवन को मुख्यमंत्री के तौर पर समर्थन देने का प्रस्ताव दिया था, जिसमें सरकार में DMK और AIADMK दोनों के मंत्री होने थे. 

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या तो मैं CM बनूंगा या...

शनमुगम ने आरोप लगाया, "हमने कहा कि हम DMK के साथ नहीं जा सकते, लेकिन थिरुमा के साथ जा सकते हैं. लेकिन EPS ने कहा कि इसे मंज़ूर नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे VCK सरकार बन जाएगी. या तो मैं CM बनूंगा या विपक्ष के तौर पर काम करूंगाय यही शब्द उन्होंने इस्तेमाल किए."

बागी नेता ने फ्लोर टेस्ट के दौरान एक्टर से नेता बने सी जोसेफ विजय की TVK सरकार को सपोर्ट करने के अपने गुट के फैसले का भी बचाव किया.

बुधवार को शनमुगम और सीनियर नेता एसपी वेलुमणि का सपोर्ट करने वाले 25 AIADMK MLA ने सरकार के पक्ष में वोट किया, जिससे TVK सरकार को 234 सदस्यों वाली असेंबली में अपने 144 विधायकों की संख्या बढ़ाने में मदद मिली. DMK ने सदन से वॉकआउट किया, PMK ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया और अकेला BJP विधायक तटस्थ रहा. पलानीस्वामी के वफ़ादार 21 AIADMK विधायकों ने खुद AIADMK चीफ के साथ, सरकार के खिलाफ वोट किया. 

शनमुगम ने पलानीस्वामी के इस आरोप को खारिज कर दिया कि बागी MLA ने मंत्री पद के बदले TVK सरकार का समर्थन किया था.

उन्होंने कहा, "उनका दावा पूरी तरह से झूठा है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है. हमने सरकार का समर्थन किया क्योंकि AIADMK और TVK दोनों की विचारधारा एक जैसी है; वो विचारधारा है DMK का विरोध."

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उन्होंने आगे कहा कि AIADMK की स्थापना दिवंगत मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन ने DMK को उखाड़ फेंकने के लिए की थी.

पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए शनमुगम ने कहा कि AIADMK को अपना नेता, उप नेता और व्हिप चुनने से पहले विधायक दल की बैठक बुलानी चाहिए थी.

उन्होंने पूछा, "क्या वह बैठक के प्रस्ताव की एक कॉपी दिखा सकते हैं? क्या वह इस बारे में जानकारी दे सकते हैं कि विधायक दल की बैठक कब और किस समय हुई थी?"
 

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