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Exclusive: 'सुरक्षाबलों पर सवाल उठा रही कांग्रेस, राहुल गांधी संजीदा नहीं', स्मृति ईरानी का निशाना

राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने में धरने पर बैठने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने तीखा हमला बोला. उन्होंने इसे वंदे मातरम् के अपमान से ध्यान भटकाने का स्वांग करार दिया. स्मृति ईरानी ने कहा कि जब मामले की निष्पक्ष जांच जारी है, तब राहुल गांधी सेना और पुलिस बल को लांछित कर केवल राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं.

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स्मृति ईरानी ने कहा कि वंदे मातरम् के मुद्दे पर कांग्रेस चक्रव्यूह में फंस चुकी है (Photo- PTI)
स्मृति ईरानी ने कहा कि वंदे मातरम् के मुद्दे पर कांग्रेस चक्रव्यूह में फंस चुकी है (Photo- PTI)

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दिल्ली में डीसीपी कार्यालय पर धरने को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी ने तीखा हमला बोला है. आजतक से खास बातचीत में स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी इस पूरे मामले का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं.

दरअसल, राहुल गांधी शुक्रवार दोपहर पैलेट गन फायरिंग में घायल हुए साहिल और उनकी मां के साथ डीसीपी कार्यालय पहुंचे थे, जहां उनकी पुलिस अधिकारियों से एफआईआर दर्ज करने और जांचकर्ता का नाम बताए जाने की मांग की. इसके बाद पुलिस ने कांग्रेस सांसद की तीखी बहस हो गई. इसके बाद राहुल गांधी संसद मार्ग थाने में धरने पर बैठ गए. राहुल का कहना था कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे.

इसी मुद्दे पर बातचीत करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि वंदे मातरम् के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी एक चक्रव्यूह में फंस चुकी है और अब वह अपने नेता को पुलिस थाने भेजकर नया स्वांग रच रही है, ताकि देश का ध्यान वंदे मातरम् विवाद से हटाया जा सके. उन्होंने कहा कि जब पुलिस की ओर से बताया गया है कि मामले की जांच चल रही है और सुप्रीम कोर्ट भी इस विषय पर अपना मत रख चुका है, तो राहुल गांधी राजनीतिक फायदे के लिए देश की मिलिट्री और पैरामिलिट्री फोर्स पर सवाल क्यों उठा रहे हैं.

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स्मृति ईरानी ने कहा कि राजनीतिक दलों को राजनीतिक फायदा उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन सवाल यह है कि राजनीतिक फायदे के लिए वे किस पर हमला कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पुलिस की वर्दी पहनने वाले महिला और पुरुष अधिकारियों और पैरामिलिट्री सर्विस पर सवाल उठा रही है. उन्होंने कहा कि देश की पैरामिलिट्री सर्विस अपनी वर्दी इसलिए नहीं पहनती कि वह देश के नागरिकों के साथ अन्याय करे. देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ.

‘जांच चल रही है तो राहुल गांधी को जरूरत क्या?’

स्मृति ईरानी ने कहा कि जब जांच चल रही है तो राहुल गांधी के वहां बैठने की जरूरत क्या है. उन्होंने राहुल गांधी की गंभीरता पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर ऐसे वीडियो दिख रहे हैं, जिनमें राहुल गांधी संबंधित व्यक्ति के साथ बैठे हुए हैं, हंस रहे हैं, मुस्कुरा रहे हैं और लोटपोट हो रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि क्या आपको ये एक संजीदा राजनीतिक दल के संजीदा नेता का स्वरूप लगता है?

जब उनसे पूछा गया कि राहुल गांधी के धरने पर बैठने से सरकार मुश्किल में तो नहीं आ गई है, तो स्मृति ईरानी ने कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर नहीं, बल्कि बीजेपी की कार्यकर्ता के तौर पर बात कर रही हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी का अधिकृत बयान भी सामने आ चुका है और सरकार को कुछ छिपाने की जरूरत नहीं है.

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स्मृति ईरानी के मुताबिक, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा है और जांच के लिए जांच एजेंसियों को जितना सहयोग चाहिए, उसकी व्यवस्था भी की गई है.

‘दिल्ली पुलिस और RAF पर हमले के खिलाफ राहुल क्यों नहीं बोले?’

स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी दिल्ली पुलिस पर हुए हमले के खिलाफ इंसाफ की मांग को लेकर धरना दिया है? क्या उन्होंने RAF के जवानों पर हुए हमले के लिए इंसाफ की मांग की? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम में कभी एक वाक्य भी नहीं कहा कि दिल्ली पुलिस के जवानों पर हमला नहीं होना चाहिए था या उनका सिर नहीं फोड़ा जाना चाहिए था.

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर राहुल गांधी वास्तव में इंसाफ के पक्ष में हैं तो उनकी मांग यह भी होनी चाहिए कि पुलिस वालों को किसने मारा, इसकी जांच हो. उनके मुताबिक, इंसाफ को अलग-अलग हिस्सों में नहीं देखा जा सकता.

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को यह भी बताना चाहिए कि पुलिस और पैरामिलिट्री के उन जवानों के लिए उन्होंने आवाज क्यों नहीं उठाई, जो खुद नौजवान हैं और जिनके माता-पिता पुलिस बल में सेवा दे रहे हैं.

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‘बिना शिकायत दर्ज हुए जांच कैसे चल सकती है?’

एफआईआर को लेकर स्मृति ईरानी ने कहा कि किसी भी जांच की एक प्रक्रिया होती है. पहले शिकायत दर्ज होती है, फिर उसमें जांच अधिकारी लगाया जाता है और उसके बाद जांच आगे बढ़ती है. उन्होंने सवाल किया कि जब मामला पुलिस के संज्ञान में है और जांच चल रही है तो राहुल गांधी क्या राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह खुद जांच नहीं कर रही हैं और न ही एंकर जांच कर रही हैं. जांच के बाद ही तथ्य और सबूत सामने आएंगे.

स्मृति ईरानी ने बातचीत के दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस पर वंदे मातरम् को लेकर भी हमला बोला. उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् पूरा नहीं गाया गया और सोनिया गांधी ने इसे रोका, तब राहुल गांधी चुप क्यों रहे? उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् में भारत माता को दुर्गा और लक्ष्मी के रूप में देखने और उन्हें विद्या का स्रोत मानने की भावना है. उनके मुताबिक, अगर राहुल गांधी इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं तो उन्हें कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के पूरे गायन के लिए भी आवाज उठानी चाहिए थी.

उन्होंने कहा कि संसद ने वंदे मातरम् का सम्मान किया है तो कांग्रेस उसका पूरा सम्मान क्यों नहीं कर सकती. अगर कांग्रेस पार्टी का आधिकारिक रुख यह है कि नेहरू जी के कहने के मुताबिक वंदे मातरम् के सिर्फ दो छंद गाए जाएं, तो पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए.

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उन्होंने 1950 में संविधान सभा में राजेंद्र प्रसाद के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् को जन गण मन के बराबर सम्मान दिए जाने की बात कही थी. स्मृति ईरानी ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस अब राजेंद्र प्रसाद के खिलाफ भी बोलेगी.

‘वंदे मातरम् के लिए राहुल धरने पर क्यों नहीं बैठे?’

स्मृति ईरानी ने कहा कि जब वंदे मातरम् को लेकर सवाल उठ रहे थे, तब राहुल गांधी ने लोगों का ध्यान दूसरे मुद्दे की तरफ खींचने के लिए पैलेट गन मामले को उठाया. उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी इंसाफ की तलाश में निकले हैं तो वंदे मातरम् के लिए इंसाफ की तलाश क्यों नहीं की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुख्यालय में जब पूरा वंदे मातरम् नहीं गाया गया, तब राहुल गांधी वहां धरने पर क्यों नहीं बैठे.

स्मृति ईरानी ने कहा कि वंदे मातरम् किसी की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की एक महत्वपूर्ण निशानी और देशवासियों की विरासत है.

उन्होंने 1923 के काकीनाडा कांग्रेस अधिवेशन का भी जिक्र किया. स्मृति ईरानी के मुताबिक, उस समय मोहम्मद अली जौहर कांग्रेस के अध्यक्ष थे और वहां वंदे मातरम् का विरोध हुआ था. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के एक गायक ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि यह किसी धर्म विशेष का मंच नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मंच है और उन्होंने पूरा वंदे मातरम् गाया था.

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‘पैलेट गन का सच जांच के बाद सामने आएगा’

बातचीत के दौरान जब स्मृति ईरानी से सीधे पूछा गया कि पैलेट गन का सच क्या है और जांच की कोई समयसीमा है या नहीं, तो उन्होंने कहा कि वह जांच नहीं कर रही हैं. उनके मुताबिक, सच तभी सामने आएगा जब सभी तथ्य और सबूत जांच के बाद सामने होंगे.

उन्होंने सवाल किया कि क्या जांच पूरी होने से पहले देश की पैरामिलिट्री सर्विस को दोषी करार दिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि उन्हें खुद नहीं पता कि जांच में क्या तथ्य सामने आएंगे, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकतीं.

स्मृति ईरानी ने शिक्षा के मुद्दे पर भी राहुल गांधी पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि वह 2014-15 में शिक्षा मंत्री थीं और उस समय नई शिक्षा नीति तैयार की जा रही थी. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सभी सांसदों को पत्र लिखे थे और कपिल सिब्बल तथा पल्लम राजू जैसे पूर्व शिक्षा मंत्रियों से भी बात की थी, लेकिन राहुल गांधी की ओर से कोई रचनात्मक सुझाव नहीं आया.

उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात हो रही है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिशा में प्रयास किए हैं. उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री ने टास्क फोर्स बनाए और छात्रों के साथ सीधे संवाद किया.

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स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गांधी ने सांसद और नागरिक के तौर पर शिक्षा के क्षेत्र में कोई रचनात्मक योगदान दिया है या नहीं, इस पर भी सवाल होना चाहिए.

अमेठी का उदाहरण देकर किया दावा

स्मृति ईरानी ने अमेठी का उदाहरण देते हुए कहा कि वह वहां सांसद के तौर पर काम कर चुकी हैं. उनके मुताबिक, उनके कार्यकाल से पहले राहुल गांधी वहां सांसद थे. उन्होंने दावा किया कि अमेठी के 500 से ज्यादा स्कूलों में उनकी सरकार ने पहली बार टेबल-कुर्सियां उपलब्ध कराईं, क्योंकि बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ते थे.

उन्होंने कहा कि अमेठी में पहला सैनिक स्कूल और केंद्रीय विद्यालय भी नरेंद्र मोदी सरकार ने बनाया. उन्होंने अमेठी में मेडिकल कॉलेज का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि जिस सरकारी जमीन पर मेडिकल कॉलेज बनाने की बात कही गई थी, वहां गांधी परिवार का गेस्ट हाउस बना हुआ था और अब उसी जमीन पर नरेंद्र मोदी सरकार मेडिकल कॉलेज बना रही है.

‘राहुल गांधी की राजनीति हेडलाइन चेजिंग’

राहुल गांधी की मौजूदा राजनीति पर सवाल पूछे जाने पर स्मृति ईरानी ने इसे ‘मौका परस्त राजनीति’, ‘पॉलिटिक्स ऑफ कन्वीनियंस’ और ‘हेडलाइन चेजिंग की पॉलिटिक्स’ बताया. उन्होंने सवाल किया कि राहुल गांधी इन मुद्दों पर कभी कोई प्राइवेट मेंबर बिल क्यों नहीं लाए. क्या उन्होंने किसी मंत्री के साथ बैठकर इन मुद्दों पर विस्तार से काम किया है?

स्मृति ईरानी ने अपने विपक्ष में रहने का उदाहरण देते हुए कहा कि 2013 में जब कामकाजी महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़े कानून पर चर्चा हुई थी, तब उन्होंने विपक्ष में रहते हुए उसमें रचनात्मक योगदान दिया था. उन्होंने कहा कि धरना देना अपनी जगह है, लेकिन मुद्दों पर योगदान देना भी जरूरी है.

उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वह अपने संसदीय रिकॉर्ड में ऐसा कोई उदाहरण दे सकते हैं.

‘मोदी से बैर है तो वंदे मातरम् का अपमान मत करो’

स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ राजनीति करती रही है. उन्होंने गुजरात में रहते हुए नरेंद्र मोदी और अमित शाह से जुड़े पुराने राजनीतिक विवादों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, 'मोदी से बैर है तो अपमान वंदे मातरम् का मत करो. मोदी से बैर है तो पैरामिलिट्री सर्विस का अपमान मत करो. मोदी से बैर है तो दिल्ली पुलिस पर आक्रमण का समर्थन मत करो.'

उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजनीतिक विरोध है तो देश के खिलाफ नारे लगाने वालों का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए.

'मोदी-शाह के साथ गांधी परिवार की राजनीतिक लड़ाई नई नहीं'

स्मृति ईरानी ने जंतर-मंतर के आंदोलन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों का आंदोलन हुआ था और देश के कई लोगों की भावनाएं उससे जुड़ी थीं. उन्होंने माना कि आंदोलन में कुछ उपद्रवी भी घुस गए थे. उस आंदोलन के दौरान राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और कहा कि जब तक इस्तीफा नहीं होगा, तब तक चर्चा नहीं होगी. बाद में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ.

स्मृति ईरानी के मुताबिक, राहुल गांधी को लगता है कि सरकार को झुकाने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो उसे झुका सके. इसी क्रम में अब वह सीधे गृह मंत्री पर हमला कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ गांधी परिवार की राजनीतिक लड़ाई नई नहीं है. उनके मुताबिक, जब कांग्रेस के पास सत्ता थी, तब भी नरेंद्र मोदी और अमित शाह उन्हें पसंद नहीं थे.

‘दिमागी नक्सल’ बयान पर चिदंबरम पर निशाना

बातचीत के आखिर में स्मृति ईरानी से उनके द्वारा लिखी किताब ‘लाल सलाम’ और नक्सलवाद से जुड़े मुद्दों पर सवाल किया गया. इस दौरान जब पी. चिदंबरम और अरविंद केजरीवाल की उस टिप्पणी का जिक्र हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार विरोध करने वालों को ‘दिमागी नक्सल’ कहती है, तो स्मृति ईरानी ने इसका जवाब दिया.

उन्होंने कहा कि चिदंबरम उस समय सरकार का हिस्सा थे जब छत्तीसगढ़ में पैरामिलिट्री जवान मारे गए थे और उसी समय दिल्ली की एक यूनिवर्सिटी में इस घटना को लेकर जश्न मनाया गया था. उन्होंने कहा कि अगर चिदंबरम खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं तो वह उन्हें रोक नहीं सकतीं.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया था, बल्कि उन ताकतों की बात की थी जो देश के खिलाफ हैं, देश की प्रगति रोकना चाहती हैं, संविधान का उल्लंघन करती हैं या देश की सेना का अपमान करती हैं. स्मृति ईरानी ने सवाल किया कि अगर चिदंबरम और अरविंद केजरीवाल इस परिभाषा में खुद को शामिल करना चाहते हैं और खुद को देश विरोधी ताकत मानते हैं, तो वह उन्हें ऐसा कहने से कैसे रोक सकती हैं.

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