
मॉनसून सत्र से पहले बड़ा देश की राजनीति में पावर गेम खेला जा रहा है. शरद पवार की पार्टी ने लोकसभा में परिसीमन बिल का समर्थन करने के संकेत दिए हैं. अगर ऐसा हुआ तो फिर शरद पवार के 8 सांसदों से मोदी सरकार के लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के मिशन को मजबूती मिलेगी.
इंडिया गठबंधन की जिस एकता के दम पर राहुल गांधी ने अप्रैल में मोदी सरकार को संसद में हराने का दावा किया था क्या वो एकता मॉनसून सत्र शुरु होने से पहले तार-तार होने लगी है.
TMC में टूट के बाद सबसे बड़ा सवाल ये था कि क्या शरद पवार और एमके स्टालिन की पार्टी का स्टैंड बदलेगा? 20 जुलाई को शुरू हो रहे मॉनसून सत्र से पहले शरद पवार को लेकर पहली बार पुख्ता संकेत मिला है कि शरद पवार की बेटी और पार्टी सांसद सुप्रिया सुले इशारा करती दिखीं कि परिसीमन बिल को NCP शरद गुट समर्थन कर सकता है.
अप्रैल में ये बिल संसद में गिर गया था क्योंकि मोदी सरकार दो तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई थी. लेकिन इस बिल पर शरद पवार की NCP सुर बदलती है तो सरकार के 2 तिहाई बहुमत के मिशन को नई ताकत मिल जाएगी.
सुप्रिया सुले ने कहा कि NCP SP परिसीमन पर नया बिल के पेश होने के बाद उस पर फैसला करेगी, अगर सभी राज्यों में 50% सीटें बढ़ाई जातीं तो परिसीमन बिल पर सभी पार्टियों की सहमति बन सकती थी.
सुप्रिया सुले के सपोर्ट से NDA का कॉन्फिडेंस हाई
सुप्रिया सुले की ये शर्त पहले से सरकार मानने को तैयार है. आपको याद होगा कि विपक्ष का समर्थन जुटाने के लिए अप्रैल महीने में अमित शाह ने सदन के अंदर विपक्ष की इस चिंता को घंटेभर में दूर करने का ऑफर दिया था.
अमित शाह ने पिछली बार की चर्चा के दौरान कहा था कि अगर 50 फीसदी सीटें बढ़ाने की बात है तो सदन को एक घंटे के लिए स्थगित करें इसे अभी कर दिया जाएगा.
अप्रैल में मात खाने के बाद सरकार की तरफ से लगातार इस बिल को पास करवाने के लिए बहुमत जुटाया जा रहा है. इसीलिए परिसीमन जैसे अहम मुद्दे पर अगर INDIA गठबंधन में शामिल NCP का सत्र से पहले सरकार को समर्थन मिलता है तो ये काफी अहम बात होगी. क्योंकि शरद पवार को लेकर चर्चा यहां तक चल रही है कि वे NDA में शामिल हो सकते हैं. इसकी एक बड़ी वजह एनसीपी शरद गुट के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल का पहले शरद पवार और फिर देंवेंद्र फडणवीस से मिलना है.
जयंत पाटिल देंवेंद्र फडणवीस से मिलते हैं तो दिल्ली में अमित शाह और एकनाथ शिंदे की मुलाकात होती है. इस दौरान शिवसेना UBT छोड़कर आए सभी 6 सांसद भी मौजूद रहे. और अगली सुबह शरद पवार की पार्टी परिसीमन बिल पर सरकार के करीब आती दिखी.

अब सवाल DMK को लेकर है जिसे साधने के लिए सरकार 50 फीसदी सीटें बढ़ाने को पहले से तैयार है. DMK के पास 22 सांसद हैं. जिसे मनाने की कोशिश सरकार की तरफ से अप्रैल के बाद से तेज कर दी गई.
शरद पवार को साधने की BJP लगातार कोशिश कर रही है. लेकिन ये सब कांग्रेस को रास नहीं आ रहा और पी चिदंबरम जैसे नेता ऐसा होने पर विश्वासघात की बात कर रहे हैं सवाल ये है कि क्या इसके पीछे पवार के NDA में जाने का डर है.
जानकारों को लगता है कि शरद पवार ने बिना इंडिया गंठबंधन छोड़े और NDA में शामिल हुए बड़ा दांव खेला है. इसकी सबसे बड़ी वजह शिवसेना UBT की तरह अपनी पार्टी को टूटने से बचाना है.
उद्धव ठाकरे के सांसद टूटने के बाद NDA का आंकड़ा लोकसभा में 360 के लक्ष्य के पहले से नजदीक पहुंच गया है. इस बार अगर पवार के बाद DMK भी सरकार को समर्थन देने का संकेत देती दिखी तो सरकार का मिशन इम्पॉसिबल बड़े आराम से पूरा हो सकता है.
मोदी सरकार को 62 सांसदों का करना है जुगाड़
17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान में 131वां संशोधन बिल वोटिंग के बाद जब गिरा तब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि वे इस बिल को पास कराने के लिए पूरी कोशिश करेंगे.
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 लोकसभा में 16 अप्रैल 2026 को पेश किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन कर लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करना और नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को 33% आरक्षण शीघ्र लागू करना था.

इस बिल के पक्ष में 298 वोट मिले जबकि इसके विरोध में 230 वोट मिले. तब मोदी सरकार को उपस्थित 528 सांसदों में से 352 सांसदों का समर्थन चाहिए था जो विपक्षी एकता के चलते नहीं मिल पाया था. लेकिन तब 298 सांसदों का साथ लोकसभा में NDA को मिला था. अब मौजूदा सियासी माहौल में इसी नंबर को आधार बनाकर चलें तो 540 सांसदों की लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों के बहुमत की जरूरत होगी.
अब नए राजनीतिक हालात में मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले ही मोदी सरकार अपने मिशन के बेहद करीब पहुंच गई है जिसमें तृणमूल कांग्रेस के बागियों का बड़ा रोल है.
दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा कैसे हासिल करेगी सरकार, ऐसे समझिए
तृणमूल कांग्रेस की बगावत से पहले ये बड़ा सवाल था कि लोकसभा के भीतर मोदी सरकार 298 सांसदों के समर्थन में 62 सांसदों का अतिरिक्त योग कैसे जोड़ेगी. लेकिन अब इस सवाल से पर्दा उठता दिख रहा है. क्योंकि अगर पिछली बार की तरह NDA 298 सांसदों का समर्थन दोबारा जुटा लेती है तो आगे की राह उसके लिए ज्यादा मुश्किल नहीं होगी.
यहां समझें. अब NDA के पास तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद, उद्धव गुट से शिवसेना में गए 6 सांसद और NCP पवार गुट के 8 सांसदों का सपोर्ट होता है. इसका योग 332 होता है. इसमें अगर 22 सांसद DMK के भी जुड़ जाते हैं तो ये आंकड़ा 332+22= 354 हो जाता है. अब NDA को मात्र 6 और सांसदों की जरूरत पड़ेगी.
ऐसी स्थिति में अगर कुछ छोटे दल गैरहाजिर भी हो जाएं तो फिर बहुमत का आंकड़ा कम हो जाएगा और सरकार अपने मकसद में कामयाब हो जाएगी .
विपक्ष में जिस तरह से टूट हो रही है. दशकों की करीबी को विधायक और सांसद मिनटों में छोड़ रहे हैं, उससे विपक्ष को झटके पर झटके लग रहे हैं. विपक्ष की ये टूट मोदी सरकार को मजबूत कर रही है. दो-तिहाई बहुमत मिलने पर सरकार बिना किसी अड़ंगे के अपने ऐजेंडे को पूरा कर सकती है.