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मोदी सरकार का मिशन-360, टेंशन 6 को लेकर, बुला ली सभी दलों की बैठक

मोदी सरकार एक बार फिर से महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को पास कराने के लिए नंबर गेम जुटाने में जुट गई है. मॉनसून सत्र से पहले बीजेपी मिशन-360 के आंकड़े को जुटाने में लगी हुई है, लेकिन अभी भी 6 कदम दूर है. ऐसे में सरकार ने 19 जुलाई को सभी दलों की बैठक बुला ली है.

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मॉनसून सत्र से पहले दो-तिहाई के जुगाड़ में मोदी सरकार (Photo-ITG)
मॉनसून सत्र से पहले दो-तिहाई के जुगाड़ में मोदी सरकार (Photo-ITG)

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. माना जा रहा है कि मोदी सरकार एक बार फिर से महिला आरक्षण और लोकसभा की सीटों को बढ़ाने वाले परिसीमन बिल को पेश कर सकती है, जिसे पास कराने के लिए दो-तिहाई का बहुमत चाहिए. अप्रैल में संसद के विशेष संत्र के दौरान नंबर गेम न होने के चलते सरकार बिल पास नहीं करा सकी थी, लेकिन तीन महीने बाद फिर से सरकार पास कराने का तानाबाना बुन रही है. 

मोदी सरकार मिशन-360 के आंकड़े को यानि संसद में दो-तिहाई बहुमत का नंबर जुटाने की एक्सरसाइज शुरू कर दी है. बीजेपी ने दो-तिहाई नंबर का समर्थन हासिल करने की कवायद में जुट गई है तो कांग्रेस तमाम विपक्षी दलों के साथ सरकार को मात देने के लिए सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है. 

ममता बनर्जी की टीएमसी, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में हुई बगावत और शरद पवार के बदले हुए राजनीतिक स्टैंड के बाद भी बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए की टेंशन खत्म नहीं हुई. दो-तिहाई बहुमत से एनडीए अभी भी 6 कदम दूर है यानि उसे 6 लोकसभा सांसदों के समर्थन जुटाना होगा. ऐसे में मोदी सरकार ने सभी दलों की 19 जुलाई को बैठक बुलाई है ताकि परिसीमन बिल पर समर्थन जुटाया जा सके? 

बीजेपी में सियासी मंथन में जुटी
मॉनसून सत्र के सियासी आहट के साथ बीजेपी में बैठक का दौर शुरू हो चुका है. पिछले एक सप्ताह में बीजेपी नेतृत्व ने कई अहम बैठकें की हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर हुई, जिसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष मौजूद रहे.

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सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य मानसून सत्र की रणनीति तैयार करना है. हालांकि, प्रधानमंत्री आवास पर हुई बैठक में बी.एल. संतोष की मौजूदगी इस बात का भी संकेत मानी जा रही है कि जल्द ही बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का ऐलान हो सकता है. सूत्रों के अनुसार, नई राष्ट्रीय टीम को लेकर पिछले कुछ दिनों से संगठन के भीतर व्यापक स्तर पर चर्चा चल रही है.विभिन्न राज्यों से संभावित पदाधिकारियों के नाम मांगे गए हैं और इन्हीं नामों में से नई टीम का गठन किए जाने की संभावना है.

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास पर हुई बैठक में केवल संगठनात्मक बदलावों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि मानसून सत्र के दौरान सरकार की रणनीति, विपक्ष के संभावित रुख और संसद में पेश किए जाने वाले विधेयकों पर भी विस्तार से मंथन हुआ. इन्हीं चर्चाओं के बीच सबसे अधिक चर्चा परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संभावित विधेयक को लेकर है.

सरकार मजबूत तो विपक्ष कमजोर
सूत्रों का दावा है कि मोदी सरकार इन मुद्दों पर आगे बढ़ सकती है.  सरकार का तर्क है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में सरकार पहले की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है, जबकि विपक्ष अपेक्षाकृत कमजोर नजर आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक, कुछ क्षेत्रीय दलों का रुख भी सरकार के लिए अहम साबित हो सकता है. चर्चा है कि 22 सांसदों वाली डीएमके जैसे दल कुछ मुद्दों पर सरकार का समर्थन कर सकते हैं.

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बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि डीएमके का राजनीतिक रुख कांग्रेस से अलग हो सकता है और कई मुद्दों पर वह कांग्रेस के विपरीत निर्णय ले सकती है.  अप्रैल में आए परिसीमन बिल का डीएमके ने पुरजोर तरीके से विरोध किया था, लेकिन तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद स्थिति बदली है.  कांग्रेस के साथ डीएमके की दोस्ती टूट गई है. डीएमके ने सदन में कांग्रेस से अलग बैठने तक का फैसला कर लिया है, जिसके चलते ही डीएमके से सरकार की उम्मीदें बढ़ गई हैं. 

बीजेपी के मिशन-360 का टारगेट
लोकसभा में कुल 543 सीटें है, जिसमें से फिलहाल 3 सीटें खाली है. इस लिहाज से संविधान संसोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानि 360 सदस्यों के जरूरत होती है. अप्रैल में एनडीए को 298 सांसदों का समर्थन मिला था. बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन है. तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए एनसीपीआई के 20 सांसदों के साथ-साथ डीएमके के 22 सांसदों का भी समर्थन सरकार को मिलता है, तो संसद में सरकार की स्थिति और मजबूत हो सकती है. 

मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए के पास फिलहाल लगभग 293 सांसद हैं.  इसमें एनसीपीआई के 20 और डीएमके के 22 सांसद जुड़ते हैं, तो यह संख्या करीब 335 तक पहुंच जाएगी. इसके अलावा सरकार को समय-समय पर वाईएसआरसीपी के 4 सांसदों और एक निर्दलीय सांसद का भी समर्थन मिलता रहा है. ऐसे में यह संख्या लगभग 340 तक पहुंच सकती है. हाल ही में महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. 

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उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के साथ आने के बाद यदि इन्हें भी एनडीए के समर्थन में जोड़ा जाए तो गठबंधन की ताकत करीब 346 सांसदों तक पहुंच सकती है.  शरद पवार की पार्टी के 8 सांसद भी सरकार का समर्थन करते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा बढ़कर 354 सांसदों तक पहुंच सकता है. ऐसे में उसे दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए केवल छह और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. 

सरकार कैसे जुटाएगी 6 सांसद
मोदी सरकार अपने मिशन-360 से अभी भी 6 कदम दूर है यानि दो-तिहाई बहुमत के लिए 6 अतरिक्त सांसदों के समर्थन जुटाना होगा. इस राजनीतिक गणित के बीच पिछले कुछ दिनों में बीजेपी नेतृत्व की गतिविधियां तेज रही हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों से भी अलग-अलग बैठकें की हैं. 

अमित शाह के मुलाकात के पीछे कहीं न कहीं दो-तिहाई के नंबर को जुटाने का है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी पिछले दिनों शर्तों के साथ महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को समर्थन करने की बात कही थी, लेकिन उनकी शर्तों को मानना सरकार के लिए काफी मुश्किल है. अब उद्धव ठाकरे की पार्टी के सांसद संजय राउत ने भी कुछ संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि हमारी मांगों को सरकार मानती है तो हम समर्थन देने के लिए विचार करेंगे. 

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उद्धव की पार्टी के पास 3 लोकसभा सांसद है, जिनका समर्थन हासिल कर लेती है तो दो-तिहाई से सिर्फ 3 सांसद ही कम पड़ेंगे. ऐसे में ममता बनर्जी के साथ खड़े 8 सांसदों से कुछ का समर्थन बीजेपी हासिल कर लेती है तो दो-तिहाई आंकड़ा आसानी से पा लेगी. 

सरकार ने बुलाई सभी दलों की बैठक
केंद्र सरकार ने मॉनसून सत्र में विपक्ष का समर्थन हासिल करने के लिए 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इस बैठक में सरकार विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों को मानसून सत्र के एजेंडे से अवगत कराएगी और बताएगी कि इस बार संसद में कौन-कौन से विधेयक पेश किए जाएंगे. इसके बाद 20 जुलाई से मानसून सत्र की शुरुआत होगी, जबकि 21 जुलाई को एनडीए संसदीय दल की बैठक बुलाई गई है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे. 

मानसून सत्र से पहले दिल्ली में राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ रही है, लगातार हो रही बैठकों और बदलते राजनीतिक समीकरणों ने इस बार के संसद सत्र को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार संसद में कौन से बड़े विधेयक लाती है और उन्हें पारित कराने के लिए किस तरह की राजनीतिक रणनीति अपनाती है. 
 

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