कांग्रेस ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 'वोट चोरी' को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन पर दिए बयान का जवाब दिया. कांग्रेस ने सवाल किया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद कितने 'घुसपैठियों' का पता लगाया गया, कितने लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए और कितनों को देश से बाहर भेजा गया.
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने SIR के पीछे मौजूद लोगों पर आरोप लगाया कि वे घुसपैठियों के मुद्दे को उठाकर असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि करीब 14 करोड़ भारतीयों के वोट देने के संवैधानिक अधिकार को हटा दिया गया है.
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, 'सच्चाई यह है कि शाह द्वारा प्रेरित SIR प्रक्रिया के आर्किटेक्ट बार-बार घुसपैठिए के तर्क को सामने लाकर असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. जबकि सच्चाई यह है कि पीएम-एचएम की हताश जोड़ी ने करीब 14 करोड़ भारतीयों को उनके संवैधानिक वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया है.'
जयराम रमेश ने पूछा सवाल
जयराम रमेश ने गृह मंत्री अमित शाह से तीन सवाल पूछे. उन्होंने कहा, 'गृह मंत्री से तीन बहुत सरल और सीधे सवाल हैं, जो SIR का बचाव कर रहे हैं: 1. कितने घुसपैठियों का पता लगाया गया? 2. कितने घुसपैठियों के नाम हटाए गए? 3. कितने घुसपैठियों को देश से बाहर भेजा गया?'
कांग्रेस नेता ने कहा कि 100 करोड़ भारतीयों को SIR प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है और वे इसके नतीजे जानने के हकदार हैं. उन्होंने सवाल किया, 'क्या वह कह रहे हैं कि ये 14 करोड़ भारतीय घुसपैठिए हैं? क्या गृह मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में देश में घुसपैठियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है?'
गृहमंत्री ने दी थी प्रतिक्रिया
अमित शाह ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ जारी प्रदर्शन पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने राहुल गांधी और विपक्ष से 2029 में एक और 'करारी हार' के लिए तैयार रहने को कहा था. उन्होंने कहा था कि लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन किया है और दावा किया था कि देश विपक्ष के नेता की उस 'योजना' को समझ सकता है, जिसके तहत घुसपैठियों को मतदाता के तौर पर पंजीकृत कराने की कोशिश की जा रही है. शाह ने यह भी कहा था कि SIR की शुरुआत 2024 में हुई थी, जबकि गांधी के पार्टी नेतृत्व संभालने के बाद से कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है.