तमिलनाडु की विजय सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें राज्य में गायों और बछड़ों को काटने पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है.
राज्य सरकार का कहना है कि हाई कोर्ट का आदेश तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट, 1958 के खिलाफ है. यह एक्ट अधिकारी द्वारा जारी सर्टिफिकेट के आधार पर 10 साल से ज्यादा उम्र की उन गायों को काटने की इजाजत देता है जो ब्रीडिंग के लिए फिट नहीं हैं.
राज्य सरकार के मुताबिक इस कानून के अलावा, दूसरे लागू कानून जैसे कि प्रिवेंशन ऑफ़ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट, 1960, प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (स्लॉटर हाउस) रूल्स, 2001, तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज एक्ट, 1998 और तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज रूल्स, 2023 उन शर्तों को रेगुलेट करते हैं जिनमें जानवरों को काटा जा सकता है, लेकिन पूरी तरह से रोक नहीं लगाते हैं.
राज्य के अनुसार, पूरी तरह से रोक लगाने का हाईकोर्ट का निर्देश सही नहीं हैं. याचिका में कहा गया है कि 27 मई को बकरीद से एक दिन पहले हिंदू मक्कल काची के जनरल सेक्रेटरी के.सूर्य प्रशांत की तरफ से दाखिल एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने आदेश पारित किया था.
याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि स्लॉटर सिर्फ तय जगहों पर ही हो, लेकिन हाई कोर्ट ने मांग से आगे बढकर कहीं भी गायों और बछड़ों के स्लॉटर पर बैन लगाने का बड़ा ऑर्डर पास कर दिया.