जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को फटकार लगाई है. अदालत ने सेकेंड ईयर के एक छात्र को नोटिस जारी किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है.
अदालत में सुनवाई के दौरान एक वकील ने कोर्ट के सामने ये मुद्दा उठाया. वकील ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के छात्रों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाए जाने के बावजूद मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मजिस्ट्रेट के इस एक्शन को अदालत की अवमानना करार दिया है.
'नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे हुई'
CJI ने सख्त लहजे में कहा, 'हमें इस बात पर बेहद हैरानी है कि हमारे ये साफ आदेश दिए जाने के बाद भी कि किसी छात्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, एक मजिस्ट्रेट की नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे हुई?'
वकील ने अदालत को बताया कि ये देश के छात्रों पर एक तरह का एक्सपेरिमेंट किया जा रहा है. ये सीधे तौर पर अदालत की अवमानना है. प्रशासन इस तरह की कार्रवाई करके छात्रों के बीच डर का माहौल पैदा नहीं कर सकता.
अखबारी रिपोर्टों पर भरोसा नहीं, रिकॉर्ड पर लाएं तथ्य
सुनवाई के दौरान जब सीजेआई ने पूछा कि क्या नोटिस वापस लिए जाने की कोई आधिकारिक सूचना मिली है, तो वकील ने बताया कि मीडिया रिपोर्टों से ही पता चला है कि खबर आने के बाद नोटिस वापस ले लिया गया है.
इस पर CJI ने कहा, 'हमारे आदेश में बिना किसी संशय के छात्रों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी. अगर प्रशासन ने कोई कार्रवाई की है, तो हम उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर सकते हैं.'
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बेंच में शामिल जस्टिस बागची ने वकील को निर्देश दिया कि अगर नोटिस जारी किया गया है, तो वो इससे जुड़े सभी तथ्यात्मक दस्तावेज और सबूत आधिकारिक रिकॉर्ड पर लाएं. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस मामले में नोएडा के जिलाधिकारी से जवाब मांगेंगे और उनसे स्पष्टीकरण लिया जाएगा.