scorecardresearch
 
Advertisement
साइंस न्यूज़

ग्लेशियर को लगी गर्मी! स्विट्जरलैंड में वैज्ञानिकों ने बर्फ को ओढ़ाया कंबल

Swiss Glacier Sheep Wool
  • 1/10

स्विट्जरलैंड में तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों को बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका आजमाया है. उन्होंने पश्चिमी स्विट्जरलैंड के त्सानफ्लूरॉन ग्लेशियर पर भेड़ की ऊन से बनी दो चादरें बिछाई हैं. वैज्ञानिक देखना चाहते हैं कि क्या ऊन की ये चादरें गर्मियों में बर्फ को पिघलने से रोक सकती हैं. Photo: Reuters

Swiss Glacier Sheep Wool
  • 2/10

ग्लेशियर की बर्फ को तेज धूप और गर्मी से बचाने के लिए पहले से ही खास सिंथेटिक चादरों का इस्तेमाल किया जाता है. ये चादरें सूरज की रोशनी को वापस भेजती हैं, जिससे बर्फ तक कम गर्मी पहुंचती है. लेकिन ये चादरें प्लास्टिक से बनी होती हैं और इनसे छोटे प्लास्टिक के रेशे यानी माइक्रोफाइबर निकल सकते हैं. इसलिए वैज्ञानिक अब ऊन जैसे प्राकृतिक विकल्प को आजमा रहे हैं. Photo: Reuters

Swiss Glacier Sheep Wool
  • 3/10

यह प्रयोग 'कीप इट वूल' प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है. इसे समिट फाउंडेशन और यूनिवर्सिटी ऑफ लौसाने मिलकर कर रहे हैं. इस प्रयोग का एक और मकसद स्विट्जरलैंड में बेकार जा रही भेड़ की ऊन का इस्तेमाल करना भी है. Photo: Reuters

Advertisement
Swiss Glacier Sheep Wool
  • 4/10

जून में वैज्ञानिकों ने त्सानफ्लूरॉन ग्लेशियर के करीब 200 वर्ग मीटर हिस्से पर ऊन से बनी दो चादरें बिछाईं. इन्हें स्विट्जरलैंड की कंपनी फिसोलेन ने बनाया है. पूरी गर्मियों में वैज्ञानिक इन चादरों की तुलना सिंथेटिक चादरों से कर रहे हैं. टीम हर दो हफ्ते में यह देख रही है कि दोनों चादरों के नीचे बर्फ कितनी पिघली. Photo: Reuters

Swiss Glacier Sheep Wool
  • 5/10

शुरुआती नतीजे काफी अच्छे आए हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक ऊन की चादरों ने बर्फ को पिघलने से रोकने में सिंथेटिक चादरों जैसा ही काम किया. यानी ऊन ने उनकी उम्मीद से बेहतर काम किया है.इस प्रयोग की एक खास वजह स्विट्जरलैंड में ऊन का बेकार जाना भी है. Photo: Reuters

Swiss Glacier Sheep Wool
  • 6/10

रिपोर्ट के मुताबिक वहां हर साल भेड़ों से मिलने वाली करीब 40 से 70 फीसदी ऊन इस्तेमाल नहीं होती और फेंक दी जाती है. अगर इस ऊन का इस्तेमाल ग्लेशियरों को बचाने में किया जा सके तो बेकार जा रही चीज का दोबारा इस्तेमाल हो सकता है. ऊन प्राकृतिक चीज है और समय के साथ खुद खत्म हो सकती है. वहीं सिंथेटिक चादरें प्लास्टिक से बनी होती हैं. Photo: Reuters

Swiss Glacier Sheep Wool
  • 7/10

प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिक यह भी देख रहे थे कि ऊन की चादरें ग्लेशियर के ठंडे और गीले माहौल में कितनी टिकती हैं. शुरुआत में उन्हें डर था कि ऊन ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगी. लेकिन टेस्ट के दौरान ऊन की चादरें उम्मीद से ज्यादा मजबूत निकलीं. Photo: Reuters

Swiss Glacier Sheep Wool
  • 8/10

टीम को इनके काम करने का तरीका भी अच्छा लगा. हालांकि अभी यह शुरुआती नतीजे हैं और आगे भी इस प्रयोग की जांच की जाएगी. वैज्ञानिकों का कहना है कि ऊन की चादरें ग्लेशियरों के पिघलने की समस्या का पूरा हल नहीं हैं. Photo: Reuters

Swiss Glacier Sheep Wool
  • 9/10

इनका इस्तेमाल सिर्फ ग्लेशियर के कुछ हिस्सों को कुछ समय के लिए बचाने में किया जा सकता है. स्विट्जरलैंड में ग्लेशियरों के कुल क्षेत्रफल के सिर्फ करीब 0.02 फीसदी हिस्से पर ऐसी चादरें बिछाई जाती हैं. इसलिए पूरे ग्लेशियर पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ सकता. Photo: Reuters

Advertisement
Swiss Glacier Sheep Wool
  • 10/10

ग्लेशियरों को लंबे समय तक बचाने के लिए दुनिया को ग्रीनहाउस गैसों का इमिशन कम करना होगा. कोयला, तेल और गैस जैसे ईंधनों का इस्तेमाल कम करना भी जरूरी है. ऊन की चादरें बर्फ को कुछ हद तक बचा सकती हैं, लेकिन बढ़ते तापमान को रोकना ही ग्लेशियरों को बचाने का असली तरीका है. Photo: Reuters

Advertisement
Advertisement