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आशीष मिश्रा केस में सुस्त पड़ी गवाही, SC ने मांगी लखीमपुर हिंसा पर स्टेटस रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर-खीरी हिंसा मामले में निचली अदालत की धीमी सुनवाई पर गहरी चिंता जताई है. इस मामले के मुख्य आरोपी अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा हैं. कोर्ट ने गवाहों की गैर-हाजिरी और धमकी देने के आरोपों को गंभीरता से लिया है और जांच अधिकारी से ताजा रिपोर्ट मांगी है.

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सुप्रीम कोर्ट ने सवाल(Photo- ITGD)
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल(Photo- ITGD)

साल 2021 के चर्चित लखीमपुर-खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट ने निचली अदालत में चल रही सुनवाई (ट्रायल) की धीमी रफ्तार पर गहरी चिंता और निराशा जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि निचली अदालत में चल रही सुनवाई को तय समय पर पूरा किया जाना चाहिए.

बता दें कि इस मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा हैं, जो पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे हैं. अदालत ने इस मामले के जांच अधिकारी से ताजा स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. 

आरोपी आशीष मिश्रा के वकील सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को बताया कि पिछले दो महीनों से किसी भी गवाह से पूछताछ नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि कई गवाहों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद कोई पेश नहीं हो रहा है.

सरकारी गवाहों की गैर-हाजिरी पर सवाल

वकील ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल गवाहों में से सिर्फ 44 से ही पूछताछ हो पाई है. इस पर CJI ने सख्त रुख अपनाते हुए सवाल किया कि 'सरकारी गवाह कैसे गैर-हाजिर हो सकते हैं?' सीजेआई ने सुझाव दिया कि अगर अदालत तीन गवाहों को बुलाती है, तो उसकी जगह 7 से 8 गवाहों को बुलाना चाहिए. इससे अगर कोई एक गवाह नहीं आता, तो दूसरे गवाह से पूछताछ कर समय बचाया जा सके.

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गवाहों को धमकी देने का आरोप

सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि गवाही से पहले पुलिस गवाहों को डरा रही है और धमकी दे रही है, जिस वजह से वे कोर्ट आने से कतरा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने लेटेस्ट रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि पहले ट्रायल में कुल 238 गवाह हैं. इनमें से अभी 124 गवाहों की पूछताछ बाकी है, जबकि अब तक सिर्फ 44 गवाहों के ही बयान दर्ज हुए हैं.

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कोर्ट ने कहा, लेटेस्ट रिपोर्ट से पता चलता है कि पहले ट्रायल में 238 गवाह हैं, जिनमें से 124 से पूछताछ होनी बाकी है. अब तक सिर्फ 44 से पूछताछ हुई है. हमें ये देखकर निराशा हुई कि स्टेटस रिपोर्ट में गवाह के पेश न होने की कोई वजह नहीं बताई गई है. हम जज को गवाहों की मौजूदगी पक्का करने के लिए कानूनी कदम उठाने का निर्देश देते हैं.

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