26 दिन के आमरण अनशन और अस्पताल में इलाज के बाद सोनम वांगचुक सोमवार को सबसे पहले राजघाट पहुंचे. महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने बड़ा संदेश दिया. वांगचुक ने कहा कि आज भी बापू का अहिंसा का रास्ता सबसे प्रासंगिक है. लोकतंत्र तभी मजबूत होता है, जब सरकारें जनता की आवाज सुनें और हर मुश्किल का हल बातचीत से निकालें.
मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोनम वांगचुक सीधे राजघाट पहुंचे. यहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की. अस्पताल से निकलने से पहले सोशल मीडिया पर भी उन्होंने इसकी जानकारी दी थी. अपने संदेश में डॉक्टरों और अस्पताल के पूरे स्टाफ का आभार जताया. साथ ही कहा कि राजघाट पर बापू को नमन करने के बाद वह लद्दाख लौटेंगे.
'लाठियों से नहीं, जनता की आवाज से बदलाव आता है'
राजघाट पर बातचीत के दौरान वांगचुक ने कहा कि महात्मा गांधी ने दुनिया को दिखाया था कि बिना हिंसा के भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं. उनका मानना है कि लाठियों और पत्थरों से ज्यादा ताकत जनता की आवाज में होती है. इसलिए शासकों को लोगों की बात सुननी चाहिए. उनके मुताबिक, शांति और संवाद का रास्ता आज भी उतना ही असरदार है, जितना गांधी के समय था.
बता दें कि सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे. अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. बाद में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर 21 जुलाई 2026 को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर सोमवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
वांगचुक ने अपने पोस्ट में लोगों का उनका साथ देने के लिए शुक्रिया अदा भी किया है. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में देश भर से कई लोग आए और सबने मिलकर एक आवाज उठाई, और उम्मीद करते हैं कि आगे भी लोग इसी तरह जुड़ी रहेंगे.