विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एशिया सोसाइटी की बातचीत में चेतावनी दी कि आने वाले महीनों में दुनिया में बड़ा खाद्य संकट खड़ा हो सकता है. उन्होंने कहा कि यूक्रेन और ईरान खाड़ी संघर्ष की वजह से दुनिया पहले ही खाद की भारी कमी झेल रही है.
उनके मुताबिक इन दो युद्धों का ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर गहरा और तनाव भरा असर पड़ा है. उन्होंने तेल आपूर्ति की सुरक्षा और उस पर हो रही राजनीति को भी बड़ी चिंता बताया.
जयशंकर ने कहा कि सबसे ज्यादा चिंता ऊर्जा को लेकर है, क्योंकि तेल का बाजार पहले से बहुत तंग है. ऐसे में तेल पर राजनीति होने से कीमतें बढ़ती हैं, जबकि इस समय कीमतें स्थिर करने की जरूरत है. जयशंकर के मुताबिक एक तरफ तेल आपूर्ति की सुरक्षा का सवाल है और दूसरी तरफ तेल की राजनीति है. दोनों एक दूसरे को बढ़ावा दे रहे हैं और इससे दोहरा या और गंभीर संकट बन रहा है.
खाने के संकट पर उन्होंने कहा कि कुछ बड़े अनाज निर्यातक देश अपनी खेप बाहर नहीं भेज पाएंगे, खासकर काला सागर से. दुनिया में खाद की भारी कमी भी है, क्योंकि इसके बड़े उत्पादक पश्चिम एशिया और रूस में हैं और वहां उत्पादन प्रभावित हुआ है.
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जयशंकर ने कहा कि सुपर अल नीनो जैसे मौसम के असर के साथ आने वाले महीनों में बड़ा खाद्य संकट आ सकता है. उनके अनुसार एक तरफ ऊर्जा की भारी तंगी है, उसके ऊपर खाना और खाद का संकट है, और तीसरी मार पैसों की है. हर संघर्ष में पैसा सुरक्षित ठिकानों की तरफ चला जाता है और ग्लोबल साउथ से दूर हो जाता है.
जयशंकर ने कहा कि नीति बनाने वाले यह नहीं कह सकते कि ऐसे हालात उनकी मंशा नहीं थे. देशों को इतना स्वार्थी नहीं होना चाहिए कि अपनी दुनिया में रहकर फैसले लें और कहें कि परेशान करना इरादा नहीं था. उन्होंने कहा कि सामान्य समझदारी से यह तय होना चाहिए कि बहुत सारे देशों की बुनियादी जरूरतें इतनी अनदेखी न हों कि वे मुसीबत में पड़ जाएं. भारत को इसी बात की चिंता है.
कांग्रेस ने जयशंकर के बयान पर दी प्रतिक्रिया
कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने हैंडल पर जयशंकर के बयान पर प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस ने लिखा, 'नरेंद्र मोदी के मंत्री ने बता दिया कि आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों का संकट आने वाला है. देश पहले ही ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. खाद्य की भयंकर कमी है. अब खाने-पीने की चीजों पर भी संकट मंडरा रहा है. अगर नरेंद्र मोदी ने वक्त रहते काम किया होता तो आज देश के सामने ये संकट ना होता, लेकिन उन्हें झाल बजाने से फुर्सत मिले, तब तो देश का सोचें.'