अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर सियासत तेज है. कांग्रेस ने इस मामले में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाते हुए तीन बड़ी मांगें रखी हैं. पार्टी का कहना है कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी जैसे गंभीर मामले में निष्पक्ष जांच तभी संभव है, जब इसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट करे.
अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि अभी तक यह भी साफ नहीं है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने वास्तव में इस्तीफा दिया है या नहीं. उन्होंने कहा कि अगर ट्रस्ट के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी तय नहीं होगी तो पूरी जांच पर सवाल उठेंगे.
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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए. पार्टी का कहना है कि जब देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला सामने आया है तो प्रधानमंत्री को इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अगर बीजेपी और आरएसएस वास्तव में भगवान राम के भक्त होते तो नैतिक आधार पर खुद सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करते.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस की तीन मांगें
कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि सबसे पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग किया जाए, क्योंकि देश का इस ट्रस्ट पर भरोसा खत्म हो चुका है. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और अब उसी ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं.
कांग्रेस की दूसरी मांग है कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए. पार्टी का कहना है कि अगर जांच सिर्फ राज्य सरकार या पुलिस के भरोसे रही तो सच सामने नहीं आएगा. इसलिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है.
तीसरी मांग करते हुए कांग्रेस ने कहा कि ट्रस्ट में अहम जिम्मेदारी निभाने वाले सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए. पार्टी का आरोप है कि अब तक सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, जबकि फैसले लेने वाले बड़े अधिकारियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया.
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अब पहले की तरह चढ़ावा नहीं चढ़ा रहे श्रद्धालु!
कांग्रेस पार्टी ने यह भी दावा किया कि चढ़ावा चोरी की खबरें सामने आने के बाद राम मंदिर में मिलने वाले दान में कमी आई है. कांग्रेस के मुताबिक, श्रद्धालुओं का भरोसा प्रभावित हुआ है और यही वजह है कि अब लोग पहले की तरह खुलकर दान नहीं दे रहे.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से गठित एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. उन पर चोरी, आपराधिक विश्वासघात, साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है. हालांकि कांग्रेस का आरोप है कि जांच अभी भी सिर्फ निचले स्तर तक सीमित है और असली जिम्मेदार लोगों तक नहीं पहुंची है.