देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे के दौरे पर हैं. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से SCO की 25वीं शासनाध्यक्ष परिषद बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. बैठक में व्यापार, अर्थव्यवस्था, निवेश, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग पर भी चर्चा हो रही है.
दौरे के दौरान राजनाथ सिंह ने ताजिकिस्तान के रक्षा मंत्री इमोमाली सोबिरजोदा से मुलाकात की. दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग, प्रशिक्षण और क्षमता बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा की. उन्होंने ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रसूलजोदा से भी मुलाकात की और दोनों देशों के पुराने सभ्यतागत संबंधों तथा लोगों के बीच संपर्क को रेखांकित किया.
बैठक के दौरान आतंकवाद को शांति और विकास के लिए गंभीर खतरा बताया गया. संदेश में कहा गया कि आतंकवाद के कारण निर्दोष लोगों की जान जाती है, निवेश और व्यापार प्रभावित होते हैं और समाज में कट्टरता बढ़ती है. इसका असर युवाओं के अवसरों पर भी पड़ता है.
आतंकवाद को किसी भी आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता. आतंकियों को पैसा देने, उनका समर्थन करने या उन्हें सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने वालों के लिए भी कोई जगह नहीं होनी चाहिए. आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को मिलकर खत्म करने पर जोर दिया गया.

यह भी पढ़ें: SCO बैठक में शामिल होने ताजिकिस्तान जाएंगे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
‘सप्लाई चेन टूट रही, ऊर्जा-खाद्य सुरक्षा चिंता’
राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया इस समय अनिश्चित आर्थिक माहौल से गुजर रही है. संघर्षों और भू-राजनीतिक तनाव के चलते सप्लाई चेन प्रभावित हो रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नई तकनीक अर्थव्यवस्थाओं को बदल रही है, लेकिन इससे नई दिक्कतें भी पैदा हो रही हैं. ताजिरक्षा मंत्री के मुताबिक, SCO की सफलता इस बात से आंकी जाएगी कि सदस्य देश साझा मुद्दों पर कितनी सहमति बना पाते हैं और मिलकर काम कर पाते हैं.
अब साझा चुनौतियों पर सहमति की परीक्षा
SCO में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान और मध्य एशिया के देश शामिल हैं. यह मंच सुरक्षा के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने का भी अवसर देता है. आतंकवाद से मुकाबले और वैश्विक सप्लाई चेन की चुनौतियों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं होगा, लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह अहम है.
दुशांबे की बैठक में संदेश यही रहा कि शांति, सुरक्षा और विकास एक-दूसरे से जुड़े हैं. आतंकवाद के नेटवर्क पर कार्रवाई हो या कारोबार और ऊर्जा की चुनौतियों का समाधान, सदस्य देशों के सहयोग से ही इन मुद्दों पर आगे बढ़ने का रास्ता निकल सकता है.