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युवाओं का पलायन, निवेश की कमी, राजीव चंद्रशेखर ने गिनाईं केरल की चुनौतियां

राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि राज्य की सरकार को ऐसी अर्थव्यवस्था तैयार करनी होगी जिसमें युवाओं को अपने राज्य में ही पढ़ाई और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें. उनके मुताबिक केरल के लिए मानव संसाधन सबसे बड़ा आर्थिक संसाधन है और इसे राज्य में बनाए रखना जरूरी है.

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इंडिया टुडे राउंड टेबल केरलम में राजीव चंद्रशेखर (Photo-ITG)
इंडिया टुडे राउंड टेबल केरलम में राजीव चंद्रशेखर (Photo-ITG)

केरल की राजनीति, राज्य की आर्थिक स्थिति और भारतीय जनता पार्टी के सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर BJP के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इंडिया टुडे राउंडटेबल केरलम में खुलकर बात की. उन्होंने नई सरकार की प्राथमिकताओं से लेकर पिछली पिनराई विजयन सरकार, कांग्रेस और CPI(M) के रिश्तों, BJP की राज्य में स्थिति और केंद्र-राज्य संबंधों तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी.

राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि केरल के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी वित्तीय स्थिति, निवेश की कमी और युवाओं का राज्य से बाहर जाना है. उन्होंने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की सरकार की विकास योजनाओं का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार की मंशा अच्छी हो सकती है, लेकिन केवल घोषणाओं से आर्थिक स्थिति नहीं बदलेगी.

केरल की आर्थिक स्थिति पर उठाए सवाल

राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि केरल की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है और राज्य के पास निवेश और विकास के लिए बहुत ज्यादा वित्तीय गुंजाइश नहीं बची है. उन्होंने राज्य में बुनियादी ढांचे की कमी, निवेश और रोजगार के अवसरों की कमी तथा युवाओं के दूसरे राज्यों और देशों में जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि केरल की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्रतिभा है, लेकिन अगर राज्य के युवा शिक्षा और रोजगार के लिए लगातार बाहर जाते रहेंगे तो इसका असर राज्य की अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकी पर भी पड़ेगा.

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राजीव चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की सरकार की कुछ पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि केरल विकास करे और राज्य के युवाओं को रोजगार मिले. उन्होंने कहा कि अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाती है, कॉलेजों को बेहतर करती है, किसानों को व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाती है और निवेश आकर्षित करती है तो BJP उसका समर्थन करेगी.

हालांकि उन्होंने सरकार की योजनाओं को लेकर सवाल भी उठाए. उनका कहना था कि किसी भी सरकार को बड़े वादे करने से पहले यह देखना चाहिए कि उन्हें पूरा करने के लिए उसके पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन और प्रशासनिक क्षमता है या नहीं. उन्होंने बिजली कटौती का भी जिक्र किया और कहा कि अगर सरकार हर समस्या के लिए बारिश को जिम्मेदार ठहराएगी तो इससे राज्य की व्यवस्था पर सवाल उठेंगे.

'पिनराई विजयन के 10 साल के कार्यकाल से तुलना नहीं हो सकती'

पिछली LDF सरकार पर हमला बोलते हुए राजीव चंद्रशेखर ने पिनराई विजयन के 10 साल के कार्यकाल को 'lost decade' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान केरल में बेरोजगारी, निवेश की कमी और कर्ज जैसी समस्याएं बढ़ीं.
उन्होंने कहा कि जब वह केरल की राजनीति में नहीं थे, तब केरल मॉडल की चर्चा सुनकर उन्हें भी लगता था कि राज्य ने विकास का एक खास मॉडल तैयार किया है. लेकिन उनके मुताबिक राज्य की राजनीति को करीब से देखने पर उन्हें लगा कि ये सही नहीं हैं.

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'BJP को हिंदू और सांप्रदायिक पार्टी की छवि से बाहर निकलना होगा'

केरल में BJP को अपेक्षित चुनावी सफलता क्यों नहीं मिल रही, इस सवाल पर राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि पार्टी को लेकर राज्य में दशकों से एक राजनीतिक धारणा बनाई गई है. उन्होंने कहा कि BJP को 'हिंदू पार्टी' और 'सांप्रदायिक पार्टी' के तौर पर पेश किया जाता रहा है और यह धारणा लोगों के बीच बनी हुई है. उनके मुताबिक BJP पहले इस नैरेटिव का पर्याप्त तरीके से मुकाबला नहीं कर पाई. उन्होंने कहा कि अब राज्य की राजनीति में विकास, रोजगार, शिक्षा और आर्थिक अवसर जैसे मुद्दों पर ज्यादा चर्चा होनी चाहिए.

युवाओं के पलायन को बताया बड़ी चुनौती

राजीव चंद्रशेखर ने केरल के युवाओं के राज्य से बाहर जाने को भी बड़ा मुद्दा बताया. उन्होंने कहा कि राज्य के पास उच्च शिक्षा प्राप्त और कुशल युवाओं की बड़ी संख्या है, लेकिन रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में युवा दूसरे राज्यों और विदेशों का रुख कर रहे हैं. 

वंदे मातरम विवाद पर क्या बोले चंद्रशेखर

वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद पर राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि कानून का पालन सभी को करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर संसद कोई कानून पारित करती है तो किसी राजनीतिक दल या राज्य को अपनी सुविधा के अनुसार यह तय नहीं करना चाहिए कि कानून का कौन सा हिस्सा माना जाएगा. चंद्रशेखर ने कहा कि संविधान सर्वोच्च है और मुख्यमंत्री समेत सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को संविधान और कानून का पालन करने की शपथ लेनी होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि कानून की अपनी सुविधा के अनुसार व्याख्या करना संवैधानिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है.

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यह भी पढ़ें: केरल की अर्थव्यवस्था को क्यों चाहिए मनमोहन सिंह जैसे सुधार? सीएम सतीशन ने बताया

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