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गैर-राजनीतिक मंच से सियासी हमलों तक... इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ पर सबकी नजर

राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ पहल अब ‘गैर-राजनीतिक’ मंच से आगे बढ़कर ज्यादा राजनीतिक तेवर में नजर आ रही है. इंदौर में होने वाले कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस छात्रों के साथ OBC, दलित और आदिवासी समुदायों तक पहुंच बनाने पर जोर देने जा रही है.

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कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, इंदौर कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. (File Photo: PTI)
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, इंदौर कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. (File Photo: PTI)

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्रों से संवाद करेंगे. यह इस अभियान का पांचवां कार्यक्रम है. इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में ऐसे कार्यक्रम हो चुके हैं. कांग्रेस इसे छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संवाद का मंच बता रही है, लेकिन पिछले कार्यक्रमों में राहुल गांधी के राजनीतिक बयानों और बीजेपी-आरएसएस पर हमलों के बाद इंदौर कार्यक्रम को लेकर भी राजनीतिक संदेश पर नजर है.

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, इंदौर कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. दावा है कि अब तक लगभग 1.20 लाख छात्रों ने इसके लिए पंजीकरण कराया है. राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर प्रदेश भर के कॉलेजों का दौरा कर रहे हैं. पार्टी को उम्मीद है कि यदि पंजीकृत छात्रों में से 25% भी पहुंचते हैं, तो संख्या काफी बड़ी होगी. इसके अलावा, इंदौर और आसपास के कोचिंग सेंटरों से लगभग 25,000 छात्रों को लाने की योजना है.

कार्यक्रम के लिए पहले जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम का इस्तेमाल किया जाना था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद इसे टालकर 19 सितंबर की तारीख तय की गई. बाद में इंदौर विकास प्राधिकरण के रीजनल पार्क के पास की जमीन अस्थायी पट्टे पर लेकर कार्यक्रम का नया स्थल तय किया गया. कांग्रेस ने इस जगह को 'भारत जोड़ो मैदान' नाम दिया है.

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आदिवासी छात्रों की भागीदारी पर भी जोर

इंदौर कार्यक्रम में आदिवासी छात्रों की भागीदारी पर भी कांग्रेस का जोर है. पार्टी सूत्रों का दावा है कि झाबुआ क्षेत्र समेत आदिवासी बहुल इलाकों से बड़ी संख्या में छात्र कार्यक्रम में पहुंच सकते हैं. करीब 24 हजार आदिवासी छात्रों के शामिल होने का दावा भी किया गया है.

पुणे के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने एक आदिवासी छात्रावास में कथित भेदभाव का मुद्दा उठाया था. इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भी लिखा था. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि पार्टी छात्रों के जरिए आदिवासी युवाओं से भी संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रही है.

'गैर-राजनीतिक' कार्यक्रम से राजनीतिक मुद्दों तक

बता दें कि 'छात्रों की गूंज' की शुरुआत राहुल गांधी ने छात्रों के साथ संवाद के मंच के तौर पर की थी और शुरुआती कार्यक्रमों में इसे गैर-राजनीतिक बताया गया था. हालांकि, बाद के कार्यक्रमों में उनके भाषणों में राजनीतिक मुद्दे अधिक प्रमुख होते गए.

पुणे में राहुल गांधी ने बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा पर निशाना साधा था. उन्होंने मनुस्मृति, पितृसत्ता और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी बात की थी. इससे पहले अलग-अलग कार्यक्रमों में उन्होंने पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत, सरकारी भर्तियों में कथित अनियमितताओं और रोजगार जैसे मुद्दे उठाए हैं.

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इंदौर कार्यक्रम में भी शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहने की संभावना है. कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, छात्रों से संवाद के जरिए उनकी समस्याएं और सुझाव सामने लाने पर जोर रहेगा. राहुल गांधी ने भी छात्रों से अपने सामने आने वाली समस्याओं और सपनों की राह में मौजूद रुकावटों को साझा करने की अपील की है.

बीजेपी-आरएसएस के मजबूत आधार वाले इंदौर में कार्यक्रम

इंदौर में इस कार्यक्रम का होना इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि शहर और मध्य प्रदेश में बीजेपी का मजबूत संगठनात्मक आधार है. राहुल गांधी पहले भी मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव पर सवाल उठाते रहे हैं. कार्यक्रम से पहले बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी भी सामने आई है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 'छात्रों की गूंज' को लेकर 'झूठ की गूंज' जैसी टिप्पणी की, जिस पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया. इससे कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है.

दिल्ली विश्वविद्यालय चुनाव के नतीजों पर भी नजर

इंदौर कार्यक्रम का समय भी राजनीतिक तौर पर चर्चा में है. इसी दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के नतीजे आने की संभावना है. ऐसे में कार्यक्रम में राहुल गांधी की छात्र राजनीति और युवाओं से संवाद को लेकर कांग्रेस के दावों पर भी चर्चा हो सकती है.

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हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि 'छात्रों की गूंज' का मुख्य उद्देश्य छात्रों की समस्याओं को सामने लाना है. वहीं, कार्यक्रम के पिछले संस्करणों में उठाए गए राजनीतिक मुद्दों को देखते हुए इंदौर में राहुल गांधी के भाषण पर राजनीतिक नजर भी रहेगी.

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