केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 1991 के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के आर्थिक सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य को पारंपरिक तौर-तरीकों से आगे बढ़कर सुधारों का नया दौर शुरू करने की जरूरत है. इसमें निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी भी शामिल है.
इंडिया टुडे राउंडटेबल 'केरलम' में बोलते हुए सतीशन से पूछा गया कि क्या वह खुद को 1991 के आर्थिक सुधारों के दौर के मनमोहन सिंह के समकक्ष मानते हैं और क्या उनकी सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के जरिए राज्य के विकास मॉडल में बुनियादी बदलाव की तैयारी कर रही है.
इस पर सतीशन ने कहा, हमारे प्लानिंग बोर्ड के उपाध्यक्ष, जो पूर्व कैबिनेट सचिव हैं, उन्होंने प्लानिंग बोर्ड की पहली बैठक में मुझसे कहा था कि आपकी स्थिति 1991 में डॉ. मनमोहन सिंह की स्थिति जैसी है. उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा राज्य के विकास और निवेश के तरीके में बदलाव लाने का है.
सतीशन ने कहा, "आपको इन सभी चीजों को बदलना होगा. आपको पारंपरिक तौर-तरीकों से हटना होगा और केरल में नए सुधार और कई अन्य बदलाव करने होंगे. " सुधारों को जिम्मेदारी बताते हुए सतीशन ने कहा कि राज्य इस दिशा में कदम उठाने में देर कर चुका है, लेकिन अभी बहुत देर नहीं हुई है और मौजूदा समय कार्रवाई के लिए सही है.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि इसमें देर हुई है, लेकिन अभी बहुत देर नहीं हुई है. यह सही समय है. अब हम सोच रहे हैं कि अगर हम असफल होते हैं तो भविष्य में केरल मुश्किल में पड़ जाएगा." सतीशन ने यह बात केरल के विकास को लेकर अपनी व्यापक योजना के संदर्भ में कही. उनकी सरकार सार्वजनिक खर्च, बुनियादी ढांचे के विकास, निजी निवेश और प्रशासनिक सुधारों को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है.
उन्होंने कहा कि सरकार का नजरिया केरल की सीमाओं और आर्थिक संभावनाओं के आकलन पर आधारित है. सतीशन ने कहा, "हमने केरल के नुकसान और फायदे का विश्लेषण किया है." उन्होंने पश्चिमी घाट, वन कानूनों, धान की जमीन से जुड़े नियमों और तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) के नियमों के कारण जमीन के इस्तेमाल पर लगी पाबंदियों का जिक्र किया.
उन्होंने कहा, "हमारी ज्यादातर जमीन नियमन के दायरे में है और आबादी का घनत्व बहुत अधिक है. ऐसे में उद्योग शुरू करना बहुत मुश्किल है."हालांकि, सतीशन ने कहा कि केरल के पास भौगोलिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई फायदे भी हैं, जिनका इस्तेमाल निवेश आकर्षित करने के लिए किया जा सकता है.
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उन्होंने कहा, "हमारे पास 600 किलोमीटर लंबी तटरेखा है, हमारे पास दो अंतरराष्ट्रीय समुद्री बंदरगाह, एक कंटेनर टर्मिनल और 18 छोटे बंदरगाह हैं." उन्होंने बताया कि सरकार की योजना इन सभी संसाधनों को एकीकृत करने और केरल को एक बड़े बंदरगाह आधारित आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की है. सतीशन ने कहा, "हमने घोषणा की है कि हम इन सभी बंदरगाहों को एकीकृत करेंगे और पूरे केरल को एक पोर्ट सिटी बनाएंगे. यह हमारी महत्वाकांक्षी परियोजना है."
बंदरगाहों के अलावा सतीशन विमानन क्षेत्र को भी आर्थिक विकास का प्रमुख माध्यम बनाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि केरल में चार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं और सरकार को निवेश में रुचि दिखाने वाले प्रस्ताव मिल रहे हैं. राज्य के विमानन बुनियादी ढांचे से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया जा रहा है. सतीशन ने कहा कि सरकार सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और डेटा सेंटर जैसे नए तकनीकी क्षेत्रों में भी निवेश आकर्षित करना चाहती है.
उन्होंने तिरुवनंतपुरम के टेक्नोपार्क, कोच्चि के इन्फोपार्क और कोझिकोड के साइबरपार्क का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार इन सुविधाओं का विस्तार करना चाहती है.