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अनंत सिंह Vs नीरज कुमार: MLC चुनाव से पहले JDU में मतभेद नीतीश के दरबार तक पहुंचे

पटना MLC चुनाव को लेकर JDU के दो बड़े नेता अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पुरानी राजनीतिक दुश्मनी ने नया रूप ले लिया है. अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार का समर्थन किया है, जिससे विवाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया है.

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नीरज कुमार और अनंत सिंह की सालों पुरानी दुश्मनी (Photo: ITG)
नीरज कुमार और अनंत सिंह की सालों पुरानी दुश्मनी (Photo: ITG)

पटना MLC चुनाव को लेकर सियासत तेज है. JDU नेताओं अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच की राजनीतिक दुश्मनी अब पार्टी के शीर्ष तक पहुंच गई है और मामला JDU के राष्ट्रीय नीतीश कुमार के कार्यालय तक पहुंच गया है. ताजा विवाद पटना ग्रेजुएट की MLC सीट को लेकर है.

मौजूदा JDU MLC नीरज कुमार इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. लेकिन मामला तब गरमाया जब मोकामा विधायक और बाहुबली अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज कुमार सिंह का समर्थन किया. अब यह मामला नीतीश कुमार के दरबार तक पहुंच गया है. उम्मीद की जा रही है कि वहीं से इस मामले में अंतिम निर्णय होगा.  

नीरज कुमार और अनंत सिंह की यह दुश्मनी कोई नई बात नहीं है. दोनों नेता कई सालों से सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे का विरोध करते आए हैं.

सालों से चला आ रहा विवाद

खास बात तो ये हैं कि दोनों ही पटना ग्रामीण के मोकामा इलाके से आते हैं. 2019 में लदमा स्थित अनंत सिंह के पैतृक आवास से AK-47 राइफल और हैंड ग्रेनेड बरामद के बाद यह विवाद और ज्यादा गहरा गया. दरअसल, उस दौरान बाहूबली अनंत सिंह ने आरोप लगाया था कि उन्हें एक राजनीतिक साजिश के तहत निशाना बनाया गया है. उन्होंने नीरज कुमार को इसमें शामिल होने का आरोप लगाया था. हालांकि, नीरज कुमार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया लेकिन तब से ही दोनों की यह रंजिश और गहरा गई. 

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यह भी पढ़ें: बिहार MLC चुनाव: अनंत सिंह के विरोध के बावजूद नीरज कुमार को मिला टिकट, JDU ने किया उम्मीदवारों का ऐलान

हाल ही में अनंत सिंह ने अपने इन आरोपों को दोहराया है और नीरज कुमार का नार्को-एनालिसिस टेस्ट कराने की मांग की है. नीरज कुमार ने इन दावों को सख्ती से खारिज करते हुए अनंत सिंह की आलोचना की. अब 2019 के मामले की बात करें तो इस मामले का कानूनी इतिहास भी बहुत जरूरी है. पटना हाई कोर्ट ने अगस्त 2024 में अनंत सिंह की दोषसिद्धि को रद्द करते हुए उन्हें AK-47 मामले में बरी कर दिया था.

अब दोनों नेताओं के बीच ताज़ा विवाद पटना ग्रेजुएट MLC चुनाव में देखने को मिल रहा है. चुनाव आयोग ने बिहार विधान परिषद के ग्रेजुएट और टीचर निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना की तारीख तय की है.

JDU ने पटना ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र से नीरज कुमार को मैदान में उतारा है, जबकि प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' ने डॉ. अनुज कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है. अनंत सिंह ने अनुज कुमार सिंह के लिए प्रचार करने और उनका समर्थन करने का फ़ैसला किया है, क्योंकि ग्रेजुएट और टीचर निर्वाचन क्षेत्रों में MLC चुनाव पार्टी के आधार पर नहीं लड़े जाते हैं.

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MLC और विधानसभा चुनाव में क्या फर्क है

अनंत सिंह ने अपनी बात रखते हुए ग्रेजुएट और टीचर निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में वोटिंग सिस्टम का भी ज़िक्र किया. ये चुनाव 'प्रेफरेंशियल वोटिंग' (वरीयता-आधारित मतदान) के ज़रिए होते हैं, जिसमें वोटर उम्मीदवारों के लिए अपनी पसंद या वरीयता बताते हैं.

विधानसभा और लोकसभा चुनावों के विपरीत, ये पारंपरिक EVM चुनाव नहीं होते जो पार्टी के चुनाव-चिह्नों पर लड़े जाते हैं. इस चुनाव में वोटिंग सिस्टम और पार्टी अनुशासन का मुद्दा अलग बातें हैं. पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने पर JDU नेता के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने का फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में है. 

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यह विवाद अब इन दो नेताओं से आगे बढ़ चुका है. बिहार के मंत्री और नीतीश के करीबी सहयोगी श्रवण कुमार ने पुष्टि की है कि यह मामला नीतीश कुमार तक पहुंच गया है. श्रवण कुमार ने बताया कि इस मामले में JDU नेतृत्व ही तय करेगा कि अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए या नहीं.  वहीं, नीरज कुमार की बात करें तो उनके लिए यह चुनाव जन सुराज के खिलाफ मुकाबले से कहीं ज्यादा है. 

वे एक दबंग नेता और अपनी ही पार्टी के विधायक से खुली राजनीतिक चुनौती का सामना कर रहे हैं. वहीं, अनंत सिंह के लिए यह चुनाव नीरज कुमार के साथ उनकी लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का एक और अखाड़ा बन गया है. 

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जन सुराज की बात करें तो जन सुराज के लिए, इस मुकाबले ने पटना ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र में उनके उम्मीदवार की ओर अतिरिक्त ध्यान आकर्षित किया है. इसलिए, अनंत सिंह बनाम नीरज कुमार का विवाद पटना ग्रेजुएट MLC चुनाव प्रचार का एक अहम हिस्सा बन गया है.

23 अक्टूबर का चुनाव ही इस चुनावी मुकाबले का नतीजा तय करेगा. लेकिन उससे पहले, सबकी नज़रें नीतीश कुमार और JDU नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं.

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