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'MBBS, आयुष और नर्सिंग के लिए अलग-अलग हों इंट्रेंस एग्जाम...', संसदीय समिति ने दिया सुझाव

संसदीय समिति ने MBBS, आयुष और नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक ही परीक्षा के बजाय अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने की सिफारिश की है. समिति ने NEET परीक्षा को चरणबद्ध तरीके से आयोजित करने और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर भी जोर दिया.

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संसदीय समिति ने नीट परीक्षा अलग-अलग स्टेप में कराने की सिफारिश की है
संसदीय समिति ने नीट परीक्षा अलग-अलग स्टेप में कराने की सिफारिश की है

संसदीय समिति ने MBBS, आयुष और नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक ही परीक्षा के बजाय अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के प्रस्ताव पर विचार करने की सिफारिश की है. सूत्रों के अनुसार, समिति की बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया, जिसमें सदस्यों का कहना था कि अलग-अलग परीक्षाएं करने से एक ही परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या अधिक हो जाती है.

इस सुझाव पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अधिकारियों ने समिति को बताया कि मौजूदा सिस्टम के तहत अलग-अलग परीक्षाएं कराना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि MBBS, आयुष और नर्सिंग तीनों सिलेबस में प्रवेश NEET के अंकों के आधार पर होता है.

अलग-अलग चरणों में हो नीट परीक्षा
कमेटी ने NEET को देश के विभिन्न राज्यों में चरणबद्ध तरीके से आयोजित करने की संभावना पर भी विचार करने की सिफारिश की. सूत्रों के मुताबिक, सदस्यों का मानना था कि अलग-अलग चरणों में परीक्षा कराने से एक ही दिन देशभर में इतनी बड़ी परीक्षा आयोजित करने की चुनौतियों को कम किया जा सकेगा और मैनेजमेंट भी ठीक से हो पाएगा.

बैठक में कमेटी ने हाल ही में आयोजित री-नीट की सराहना भी की. इस दौरान NTA अधिकारियों ने परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता तय करने के लिए उठाए गए कई कदमों की जानकारी कमेटी को दी. सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने बताया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए Telegram तक पहुंच सीमित करने, WhatsApp चैनलों की निगरानी करने तथा पेपर के ड्राफ्ट में बदलाव जैसे कई सुरक्षा उपाय किए गए. 

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भविश्य में CBT सिस्टम से हो सकती है NEET परीक्षा

कमेटी के अध्यक्ष ने इन कदमों की सराहना करते हुए इन्हें एग्जाम प्रोसेस को अधिक सेफ बनाने की दिशा में जरूरी प्रयास बताया. बैठक में भविष्य में NEET को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के रूप में आयोजित करने की संभावना पर भी चर्चा हुई. 

हालांकि, कमेटी ने स्पष्ट किया कि ऐसा फैसला तभी लिया जाना चाहिए जब पूरे देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद हो और जरूरी टेक्निकल व प्रशासनिक तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं. कमेटी का कहना था कि किसी भी बदलाव से पहले यह तय किया जाना चाहिए कि देश के सभी क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले और डिजिटल सुविधाओं की कमी के कारण किसी के साथ असमानता न हो. सूत्रों के अनुसार, ये सिफारिशें राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के संचालन, सुरक्षा और प्रशासन की समीक्षा के दौरान की गई हैं. समिति का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, कुशल और निष्पक्ष बनाना है.

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