संसद का मॉनसून सेशन जारी है. जब से सत्र की शुरुआत हुई है इसका हर दिन हंगामेदार रहा है. नीट पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे के कारण बहस और गतिरोध बढ़ता जा रहा है. इसी बीच गुरुवार को भी राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान काफी बहस हुई. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान के बाद राज्यसभा में शोरगुल होने लगा.
क्या बोले मल्लिकार्जुन खड़गे?
असल में मल्लिकार्जुन खड़गे ने सिलेबस बदलने और इसकी सामग्री पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा कि- बदले सिलेबस में ये भी आ रहा है कि 'शूद्र के वेद पाठ सुनने पर शीशे और जस्ते से उसके कान भर दिए जाए. वेद मंत्र का उच्चारण करने पर उसकी जीभ काट ली जाए. ये आरएसएस सिलेबस है. ऐसे विचारों की निंदा करता हूं. ऐसी सामग्री को सिलेबस से हटाया जाए.'
उनके ऐसे ही बयान के बाद जोरदार हंगामा शुरू हो गया. ट्रेजरी बेंच से सदस्यों ने माफी मांगने की मांग करते हुए गुंडागर्दी नहीं चलेगी के नारे लगाए. नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष के नेता ने जो कहा है, वह मेरी जानकारी में तथ्यों से परे है. उन्होंने कहा कि, मनु स्मृति का ओरिजिनल टेक्स्ट ऑथेंटिकेट करें. इस पर प्रकाश डालने के लिए सुधांशु त्रिवेदी एक मिनट बोलें. सुधांशु त्रिवेदी ने बोलना शुरू ही किया था कि सभापति ने उनको टोका.
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के एक पूर्व जज विलियम जोंस के साथ ही बाबासाहब डॉक्टर आंबेडकर की किताब को कोट किया और कई किताबों का संदर्भ दिया और कहा कि इसीलिए कह रहा हूं कि ये ऑथेंटिकेट करें. प्रमोद तिवारी ने एक किताब दिखाते हुए कहा कि यह किताब इनके कार्यकाल में छपी है, चल रही है, प्रतिबंधित नहीं है.
अगर ये कह रहे हैं, दिखा रहे हैं, तो गलती इनकी है. 12 साल से इनकी सरकार है. जेपी नड्डा ने कहा कि ब्रिटिश टाइम से पहले का ओरिजिनल टेक्स्ट लाइए. नड्डा ने कहा कि ऐसे बयानों से अशांति फैलती है. इस पर सभापति ने खड़गे की ओर से मनुस्मृति वाला बयान एक्सपंज करने का ऐलान कर दिया.
बीते कुछ वर्षों में 152 पेपर लीक- खड़गे
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं. लेकिन एक को भी सजा नहीं हुई. सरकार क्या कर रही थी. क्या एजेंसियां सो रही थीं. शिक्षा कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं है. शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है. बजट में छह फीसदी भागीदारी शिक्षा बजट की होनी चाहिए, लेकिन तीन फीसदी से भी कम है.
आपका कहना है कि विश्वविद्यालयों में अच्छे शिक्षक, अच्छे वीसी आएं. यूनिवर्सिटी में आरएसएस के लोग भरे जा रहे हैं. यूपीए सरकार ने सबको समान शिक्षा के लिए शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया, लेकिन आप सब बदल रहे हैं. इसके बाद राज्यसभा जोरदार हंगामा होने लगा.
क्या बोले सुधांशु त्रिवेदी?
सुधांशु त्रिवेदी ने अपने तथ्य में कहा कि 'खड़गे ने जो पक्ष रखा है, मैं उसको प्रमाणित करना चाहूंगा. जयराम रमेश बहुत विद्वान हैं. मैं उन्हें बताना चाहूंगा कि विलियम जोन्स कलकत्ता हाईकोर्ट के जज थे. उन्होंने 1790 मनु स्मृति का अनुवाद किया. 3 किताबों का अनुवाद किया गया. दोनों उपलब्ध हैं. सुधांशु ने आगे कहा- बाबा साहब की किताब 'हू वर शूद्र', में उन्होंने लिखा है, द अनटचेबल्स में उन्होंने लिखा है कि मनु के काल में कोई छुआछूत नहीं थी. इन्होंने बोला- विलियम से पहले की दर्जन किताबें मिलती हैं. जहांगीर नामा, तुजुक-ए-बाबरी है. किसी में इसका जिक्र नहीं हैं.