घर में सीढ़ियां केवल एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक पहुंचने का साधन नहीं हैं, बल्कि वास्तु की दृष्टि से भी उनका विशेष महत्व है. सीढ़ियों की संख्या, उनका स्थान दिशा और बनाने का तरीका घर की ऊर्जा को प्रभावित करता है. यही कारण है कि मकान बनवाते समय सीढ़ियों के निर्माण को लेकर लोगों के मन में अक्सर असमंजस रहता है. कुछ बातों का ध्यान रखकर सीढ़ियों की स्थिति को अधिक अनुकूल बनाया जा सकता है.
किस दिशा में बनाएं सीढ़ियां?
सीढ़ियों की संख्या ऑड यानी विषम संख्या में रखना बेहतर माना जाता है. सीढ़ियां बनाते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि उनका निर्माण भवन के किस हिस्से में किया जा रहा है. उत्तर से लेकर पूर्व दिशा तक का स्थान वास्तु में हल्का और खुला रखने की सलाह दी जाती है. इसलिए इस क्षेत्र में सीढ़ियों का निर्माण करने से बचना चाहिए. उत्तर और पूर्व दिशा को खुला रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए अनुकूल वातावरण बनता है.
सीढ़ियों के लिए पूर्व से दक्षिण होते हुए पश्चिम दिशा तक का क्षेत्र अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है. विशेष रूप से यदि संभव हो तो पश्चिम से प्रारंभ होकर दक्षिण-पश्चिम की ओर जाने वाली अथवा पूर्व से प्रारंभ होकर दक्षिण दिशा की ओर बनने वाली सीढ़ियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
क्लॉक वाइज या एंटी क्लॉक वाइज सीढ़ियां क्या हैं?
सीढ़ियों से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण विषय उनका क्लॉक वाइज या एंटी क्लॉक वाइज होना है. वास्तु में सीढ़ियों के घूमने की दिशा को भी ऊर्जा के साथ जोड़कर देखा जाता है. क्लॉक वाइज सीढ़ियां जल तत्व और एंटी क्लॉक वाइज सीढ़ियां अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं. जिस दिशा में क्लॉक वाइज सीढ़ियां बनाई जाती हैं, वहां की ऊर्जा को कम करने वाला प्रभाव माना जाता है. जबकि एंटी क्लॉक वाइज सीढ़ियां संबंधित दिशा की ऊर्जा को बढ़ाने वाली मानी जाती हैं. इसलिए सीढ़ियों की दिशा का चयन केवल सुविधा के आधार पर नहीं, बल्कि भवन के ऊर्जा क्षेत्रों को ध्यान में रखकर करना चाहिए. घर की सीढ़ी पर कुछ कदम चलने के बाद जब व्यक्ति दाईं तरफ मुड़ता है तो वो क्लॉक वाइज सीढ़ियां होती हैं. जबकि बाईं ओर जाने वाली सीढ़ी एंटी क्लॉक वाइज सीढ़ी कहलाती है.
नकारात्मक जोन माने जाने वाले (ईस्ट-साउथ-ईस्ट, साउथ-साउथ-वेस्ट और वेस्ट-नॉर्थ-वेस्ट) क्षेत्रों में क्लॉक वाइज सीढ़िय सकारात्मक प्रभाव देती है. वहीं सकारात्मक जोन वाली दिशाओं में एंटी क्लॉक वाइज सीढ़ियों का निर्माण बेहतर है. इसका उद्देश्य भवन के विभिन्न ऊर्जा क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखना है.
सीढ़ियों के निर्माण में केवल दिशा ही नहीं, बल्कि उनकी चौड़ाई, ऊंचाई, मोड़, शुरुआत और समाप्ति का स्थान भी महत्वपूर्ण होता है. सीढ़ियों के नीचे अनावश्यक कबाड़ या ऐसी वस्तुएं रखने से बचना चाहिए, जिनका नियमित उपयोग नहीं होता. सीढ़ियों का स्थान साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखने से घर का वातावरण बेहतर बना रहता है.
सही स्थान पर बनाई गई सीढ़ियां घर की ऊर्जा व्यवस्था को संतुलित करने में सहायक होती हैं. वहीं गलत दिशा या गलत तरीके से बनाई गई सीढ़ियां वास्तु दोष का कारण बन सकती हैं. इसलिए नए घर का नक्शा तैयार करते समय सीढ़ियों की स्थिति को शुरुआत से ही तय करना अधिक उचित रहता है. पुराने मकान में यदि सीढ़ियों की दिशा बदलना संभव न हो तो उपलब्ध संरचना के अनुसार वास्तु संबंधी अन्य उपायों पर विचार किया जा सकता है.