मनुस्मृति (Manusmriti) प्राचीन भारत के प्रमुख धर्मशास्त्र ग्रंथों में से एक है. इसे मानव धर्मशास्त्र के नाम से भी जाना जाता है. यह संस्कृत भाषा में लिखा गया ग्रंथ है, जिसमें तत्कालीन समाज, धर्म, आचार-विचार, कर्तव्यों, सामाजिक व्यवस्था और कानून से जुड़े कई विषयों पर नियम और विचार दिए गए हैं.
मनुस्मृति को परंपरागत रूप से मनु से जोड़ा जाता है. हालांकि, इसके रचनाकाल और लेखन से जुड़ी विद्वानों की अलग-अलग राय है. सामान्य तौर पर इसका वर्तमान स्वरूप लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से दूसरी शताब्दी ईस्वी के बीच विकसित हुआ माना जाता है. यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि ग्रंथ का वर्तमान पाठ एक ही समय में लिखा गया ऐसा सरल निष्कर्ष नहीं माना जाता.
मनुस्मृति में कुल 12 अध्याय हैं. इसमें धर्म, संस्कार, शिक्षा, विवाह, परिवार, राजा और शासन, न्याय व्यवस्था, अपराध और दंड, कर्म तथा सामाजिक कर्तव्यों जैसे विषयों का उल्लेख मिलता है. ग्रंथ में जीवन के अलग-अलग चरणों और व्यक्ति के सामाजिक कर्तव्यों को लेकर भी नियम बताए गए हैं.
मनुस्मृति की चर्चा अक्सर वर्ण व्यवस्था और सामाजिक नियमों के संदर्भ में होती है. इसमें समाज के अलग-अलग वर्गों के लिए कर्तव्यों और आचरण से जुड़े प्रावधान मिलते हैं. महिलाओं, परिवार और विवाह से जुड़े नियम भी इसमें शामिल हैं. इन्हीं विषयों के कारण आधुनिक समय में मनुस्मृति पर सामाजिक और ऐतिहासिक दृष्टि से व्यापक बहस होती रही है.
इतिहास में मनुस्मृति का प्रभाव हर दौर और हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं रहा. अलग-अलग धर्मशास्त्रों और स्थानीय परंपराओं के साथ इसका संबंध रहा है. औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश विद्वानों और प्रशासकों ने भी इसे भारतीय सामाजिक और कानूनी परंपराओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण ग्रंथों में माना.
आज मनुस्मृति मुख्य रूप से इतिहास, धर्म, भारतीय दर्शन, समाज और प्राचीन कानून व्यवस्था के अध्ययन का विषय है. इसे समझने के लिए इसके ऐतिहासिक संदर्भ, मूल संस्कृत पाठ और अलग-अलग विद्वानों की व्याख्याओं को साथ में देखना जरूरी माना जाता है.
राहुल गांधी के मनुस्मृति वाले बयान पर निशिकांत दुबे ने पलटवार किया है. उन्होंने मनुस्मृति के दो श्लोक पोस्ट कर राहुल गांधी से उन्हें पढ़ने-समझने की सलाह दी.
पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता और समान पहचान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल मां, पत्नी या बेटी की भूमिका तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। मनुस्मृति का हवाला देते हुए उन्होंने महिलाओं की स्वतंत्रता पर जोर दिया और कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत महिलाओं के सपने, प्रतिभा और आत्मविश्वास हैं।
संसद का मॉनसून सत्र विवादों से भरा हुआ है, जहां नीट पेपर लीक और शैक्षणिक सिलेबस को लेकर तीखी बहस हो रही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरएसएस के सिलेबस पर सवाल उठाए और विवादित बयान दिए, जिससे राज्यसभा में हंगामा मच गया.
मनुस्मृति के एक विवादित श्लोक को लेकर संसद में बहस छिड़ गई है. आखिर एक प्राचीन ग्रंथ क्यों आधुनिक भारत में बार-बार विवाद में घिर जाता है?