2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल (SAD) और बीजेपी के बीच फिर से गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं. SAD जहां गठबंधन के संकेत दे रहा है, वहीं बीजेपी ने साफ किया है कि अगर दोनों दलों के बीच गठबंधन होता है तो उसमें बीजेपी की भूमिका बड़े भाई की होनी चाहिए.
पूर्व केंद्रीय मंत्री और SAD सांसद हरसिमरत बादल ने गुरुवार को संगरूर में एक रैली के दौरान गठबंधन के मजबूत संकेत दिए थे. इसके अगले दिन शुक्रवार को उनके भाई और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया ने कहा कि पंजाब के लिए SAD-बीजेपी गठबंधन समय की जरूरत है.
इंडिया टुडे से बातचीत में शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम मजीठिया ने कहा कि पंजाब के लिए गठबंधन की जरूरत है और पंजाब के लोग भी चाहते हैं कि यह गठबंधन हो. लोगों ने पंजाब में SAD-बीजेपी का गठबंधन देखा है और आज कानून-व्यवस्था, सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह बहुत जरूरी है.
बड़े भाई की भूमिका
मजीठिया ने कहा कि दोनों पार्टियों के बीच अलगाव कृषि कानूनों के मुद्दे पर हुआ था. उन्होंने कहा कि अब हालात बदल चुके हैं और अब रुख भी बदलना चाहिए. वहीं, बीजेपी ने गठबंधन की संभावना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर गठबंधन होता है तो बीजेपी की भूमिका ‘बड़े भाई’ की होनी चाहिए. बीजेपी ने यह भी कहा कि पार्टी अब वैसी नहीं है जैसी पांच साल पहले थी.
पार्टी पहले जैसी नहीं रही
इंडिया टुडे से बातचीत में पंजाब बीजेपी के उपाध्यक्ष फतेह जंग बाजवा ने कहा कि बीजेपी अब पांच साल पहले वाली पार्टी नहीं रही है और वह पंजाब की सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा कि अगर शिरोमणि अकाली दल बीजेपी को ‘बड़े भाई’ की भूमिका देने पर विचार करता है, तभी पार्टी हाईकमान इस पर विचार कर सकता है.
उन्होंने कहा कि बीजेपी जिस तरह बूथ और जमीनी स्तर पर काम कर रही है, उसे किसी की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर गठबंधन होता है तो SAD को यह साफ करना होगा कि बीजेपी ‘बड़ा भाई’ होगी. पंजाब बीजेपी उपाध्यक्ष ने कहा कि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान को लेना है, लेकिन बीजेपी के ‘बड़े भाई’ होने का मतलब ज्यादा सीटें और मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी बीजेपी का होना है.
क्यों हुई अटकलें तेज
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और SAD के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की हालिया बैठक के बाद 2027 के चुनाव से पहले SAD-बीजेपी गठबंधन की अटकलें तेज हैं. दोनों पार्टियां लंबे समय तक गठबंधन में रही थीं, लेकिन कृषि कानूनों को लेकर मतभेद के बाद दोनों अलग हो गईं. हरसिमरत बादल NDA सरकार में केंद्रीय मंत्री थीं और उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद साल 2020 में गठबंधन टूट गया था.
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गठबंधन टूटने का असर 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों पर पड़ा था. शिरोमणि अकाली दल को तीन सीटें मिली थीं, जबकि बीजेपी ने दो सीटें जीती थीं. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में वोट शेयर के मामले में बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहा. बीजेपी कोई सीट नहीं जीत सकी, लेकिन उसे 18.56 प्रतिशत वोट मिले, जबकि शिरोमणि अकाली दल को 13.42 प्रतिशत वोट मिले थे. हालांकि, SAD ने बठिंडा सीट जीती थी.
इस बात पर करेगा निर्भर
राजनीतिक एक्सपर्ट और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से रिटायर्ड प्रोफेसर कुलदीप सिंह ने SAD-बीजेपी गठबंधन की अटकलों पर कहा कि गठबंधन होगा या नहीं, यह दोनों पार्टियों पर निर्भर है, लेकिन इससे दोनों को फायदा होगा क्योंकि दोनों ने पहले भी सफल गठबंधन चलाया है. उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां एक-दूसरे के बिना कमजोर हैं और पिछले चुनावी नतीजे इसके संकेत हैं. उनके मुताबिक, गठबंधन होने पर बीजेपी को और मजबूती मिलेगी, जबकि शिरोमणि अकाली दल अलग-अलग अकाली गुटों के बीच एक प्रमुख ताकत के रूप में उभर सकता है.