भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई केंद्रीय टीम का ऐलान हो चुका है. इस नई कार्यकारिणी में 8 राष्ट्रीय महामंत्री, 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 16 राष्ट्रीय मंत्री (सचिव) बनाए गए हैं. 'टीम नवीन' में अनुभव, युवा ऊर्जा, जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों के साथ-साथ वैचारिक संतुलन साधने का प्रयास किया गया है.
बीजेपी की नई कार्यकारिणी में पार्टी ने दो मुस्लिम चेहरों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियां दी हैं. प्रोफेसर तारिक मंसूर को लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि कुंवर बासित अली को बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
कुंवर बासित अली और प्रोफेसर तारिक मंसूर दोनों ही उत्तर प्रदेश से आते हैं, लेकिन दोनों नेताओं की राजनीतिक यात्रा में बड़ा अंतर है. कुंवर बासित अली ने बीजेपी में जमीनी कार्यकर्ता से शीर्ष तक का सफर तय किया है, वहीं प्रोफेसर तारिक मंसूर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के कुलपति (वीसी) पद से सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीति में आए और सीधे बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में स्थान पाया.
कुंवर बासित अली: संगठन के उभरते मुस्लिम चेहरे
कुंवर बासित अली मूल रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से आते हैं. वे इससे पहले बीजेपी उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे थे,. अब उन्हें नितिन नवीन की टीम में अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. बासित अली मुस्लिम राजपूत समाज से आते हैं, लेकिन उन्होंने पसमांदा मुस्लिम समुदाय के बीच भी व्यापक काम किया है.
बासित अली को राजनीति विरासत में नहीं मिली, बल्कि उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर पहचान बनाई है. उनके पिता हाजी हामिद अली गांव के प्रधान रहे हैं. पढ़ाई के दौरान बासित अली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और उनकी राष्ट्रवादी सोच ने उन्हें बीजेपी के करीब लाया. शुरुआत में उन्होंने मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली.
इसके बाद वे मेरठ जिला मीडिया सह-प्रभारी बने और फिर उन्हें पार्टी ने जिला मीडिया प्रभारी नियुक्त किया. आगे चलकर वे मेरठ जिला अल्पसंख्यक मोर्चा के संयोजक बने और लगभग पांच वर्ष पूर्व उन्हें यूपी अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया.
उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष रहते हुए कुंवर बासित अली ने मुस्लिम बहुल इलाकों में संगठन को सक्रिय करने और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को पसमांदा समाज तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. अब उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने उनके संगठनात्मक कार्यों पर भरोसा जताया है और युवाओं को जोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.
प्रोफेसर तारिक मंसूर: दोबारा बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
बीजेपी की नई कार्यकारिणी में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के पूर्व कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर को पुनः राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) के सदस्य भी हैं. शीर्ष संगठनात्मक पद पर उन्हें बनाए रखकर बीजेपी ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है.
पेशे से वरिष्ठ सर्जन रहे प्रोफेसर मंसूर के पास शिक्षा, अनुसंधान और प्रशासन का चार दशकों से अधिक का अनुभव है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें वर्ष 2023 से 2026 तक के लिए पद्म पुरस्कार समिति का सदस्य भी मनोनीत किया था.
प्रोफेसर तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर बनाए रखकर बीजेपी ने प्रबुद्ध और पसमांदा मुस्लिम वर्ग के बीच अपनी पैठ मजबूत करने का स्पष्ट संकेत दिया है, शिक्षा और थिंक टैंक पृष्ठभूमि वाले नेता को केंद्रीय टीम में प्रमुख स्थान देना पार्टी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश से आने वाले प्रोफेसर मंसूर की यह नियुक्ति न केवल संगठन के लिए फायदेमंद साबित होगी, बल्कि आगामी चुनावों और सांगठनिक अभियानों में भी बीजेपी के सर्वसमावेशी एजेंडे को मजबूती देगी.
बीजेपी का सर्वसमावेशी राजनीतिक संदेश
नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम के जरिए बीजेपी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी अपने राष्ट्रवादी एजेंडे के साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदाय के बीच 'सबका साथ, सबका विकास' के मूलमंत्र के तहत संवाद और भागीदारी बढ़ाना चाहती है.
जहाँ प्रोफेसर तारिक मंसूर वैचारिक और बुद्धिजीवी वर्ग में प्रभाव रखते हैं, वहीं अल्पसंख्यक मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने 40 वर्षीय कुंवर बासित अली जमीनी स्तर पर युवाओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का जरिया बन सकते हैं. युवा अध्यक्ष नितिन नवीन की इस टीम में कुंवर बासित अली को जिम्मेदारी सौंपकर संगठन में युवा मुस्लिम नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर मुहर लगाई गई है.
दोनों ही नेता मूल रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने से जुड़े हैं. 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए, राज्य में अल्पसंख्यक समाज के बीच संगठन की पहुंच को और मजबूत करने का खाका तैयार किया गया है.
इसके जरिए बीजेपी ने यह दर्शाने का प्रयास किया है कि उसकी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में समाज के हर वर्ग (ओबीसी, दलित, आदिवासी, महिला और अल्पसंख्यक) को प्रतिनिधित्व मिला है, जो 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए एक सर्वसमावेशी राजनीति का संदेश देता है.