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PoK में बवाल, कश्मीर में बढ़े आतंकी हमले... क्या ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है पाकिस्तान?

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों ने छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी. दोनों केल्लम इलाके में ईंट-भट्ठे पर काम करते थे. घटना ऐसे समय हुई जब PoK में सरकार विरोधी प्रदर्शन जोरों पर हैं. एजेंसियों ने दोनों घटनाओं में सीधा संबंध अभी नहीं माना है, लेकिन जानकार इसे व्यापक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं.

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2 मजदूरों की हत्या के बाद PoK हालात से जुड़े सवाल तेज हो गए हैं (Photo: PTI)
2 मजदूरों की हत्या के बाद PoK हालात से जुड़े सवाल तेज हो गए हैं (Photo: PTI)

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों ने शुक्रवार शाम दो प्रवासी मजदूरों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया. दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और दक्षिण कश्मीर के केल्लम इलाके में एक ईंट-भट्ठे पर मेहनत मजदूरी करके अपना जीवन चला रहे थे. आतंकियों ने अचानक उन पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें एक मजदूर की मौके पर ही जान चली गई जबकि दूसरे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. 

वारदात के फौरन बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेरकर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और वहां सरकार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं.

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या कुलगाम हमले और PoK के हालात के बीच कोई सीधा नाता है. भारतीय एजेंसियों ने अभी तक आधिकारिक रूप से ऐसा कोई संबंध नहीं बताया है. लेकिन सुरक्षा से जुड़े जानकार लंबे समय से यह कहते आए हैं कि जब भी पाकिस्तान अंदरूनी संकट में फंसता है, तो सीमा पार से आतंकवाद के जरिए कश्मीर में तनाव बढ़ाने की कोशिशें तेज हो जाती हैं. इसी वजह से कुलगाम की इस घटना को भी उसी बड़े नजरिए से देखा जा रहा है.

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अब सवाल यह भी है कि आतंकियों ने फिर से प्रवासी मजदूरों को ही निशाना क्यों बनाया. दरअसल कश्मीर में आतंकी संगठन ऐसे आसान लक्ष्य चुनते रहे हैं जिनसे ज्यादा से ज्यादा दहशत फैले. प्रवासी मजदूर घाटी की स्थानीय अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा होते हैं, इसलिए उन पर हमला करके आतंकी माहौल में डर पैदा करना चाहते हैं. 

प्रवासी मजदूर को जब अस्पताल इलाज करवाने के लिए ले जाया गया था (Photo: PTI)


विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे हमलों के पीछे कई मकसद हो सकते हैं. पहला, घाटी में हालात सामान्य होने की छवि को नुकसान पहुंचाना. दूसरा, बाहरी राज्यों से आए लोगों में डर बैठाना. तीसरा, सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान बांटना. और चौथा, कश्मीर मुद्दे को फिर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में लाना.

अब बात करते हैं PoK में चल रहे हालात की. पिछले कई दिनों से वहां लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार उनकी आर्थिक तकलीफों को अनदेखा कर रही है. कई जगहों पर यह प्रदर्शन हिंसक भी हो गए और सुरक्षाबलों के साथ झड़पें हुईं. 

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्रवाई में कई लोगों की जान गई है, जिससे वहां राजनीतिक संकट और गहरा गया है. विश्लेषकों का मानना है कि PoK में बढ़ती नाराजगी ने पाकिस्तान सरकार और सेना दोनों पर दबाव बढ़ा दिया है. ऐसे हालात में भारत के खिलाफ तनाव बढ़ाना पाकिस्तान की पुरानी रणनीति का हिस्सा रहा है. हालांकि कुलगाम हमले का PoK से सीधा संबंध अभी तक साबित नहीं हुआ है.

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गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में गैर-स्थानीय मजदूरों को पहले भी निशाना बनाया जा चुका है. साल 2019, 2021 और 2022 में भी प्रवासी मजदूरों पर बड़े हमले हो चुके हैं. उस समय भी इन हमलों का मकसद घाटी में डर फैलाना और आम जनजीवन को प्रभावित करना बताया गया था. ताजा कुलगाम हमला करीब 21 महीने बाद प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाकर किया गया सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है. फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले की जांच में जुटी हैं.

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