कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने अरबपति जॉर्ज सोरोस के 10 अरब डॉलर के निवेश को लेकर एक बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर सोरोस यह पैसा कुछ अच्छा करने के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो इस पर विचार किया जा सकता है. उन्होंने कहा, "अगर जॉर्ज सोरोस कुछ अच्छा करने के लिए 10 अरब डॉलर का निवेश लाने वाले हैं, तो शायद इस पर विचार किया जा सकता है. यह संभव है."
जॉर्ज सोरोस के संगठन ओपन सोसाइटी फाउंडेशन और दुनियाभर में उसके निवेश को लेकर पहले भी राजनीतिक बहस होती रही है. ऐसे में पित्रोदा के इस बयान पर भी चर्चा हो रही है. सैम पित्रोदा ने यह बात मीडिया से बातचीत के दौरान कही.
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छात्रों के गुस्से और विरोध पर क्या बोले?
कांग्रेस के ओवरसीज अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने छात्रों के विरोध की वजह बताते हुए कहा कि कई मुद्दों ने युवाओं को एक साथ आने के लिए प्रेरित किया. इनमें परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक, खराब बुनियादी सुविधाएं, शिक्षा की गुणवत्ता, बढ़ती फीस और कोचिंग का दबाव शामिल हैं.
कांग्रेस नेता ने कहा, "छात्रों का एक छोटा समूह किसी के उन्हें 'कॉकरोच' कहने से आहत था. वे सही समय पर एक साथ आए. परीक्षा, पेपर लीक, खराब बुनियादी सुविधाओं, खराब शिक्षा, बढ़ती फीस और कोचिंग क्लास जैसी समस्याएं भी थीं. इन सभी मुद्दों का असर अगली पीढ़ी पर पड़ता है. इनसे युवा एकजुट हुए."
छात्रों के गुस्से और उनके बोलने के तरीके पर पित्रोदा ने कहा, "इसका नतीजा यह हुआ कि वे निडर हो गए. उनमें हिम्मत आई और वे खुलकर अपनी बात रखने लगे. कुछ लोगों ने ऊंची आवाज में बात की, तो कुछ ने खराब भाषा का इस्तेमाल किया. मेरे हिसाब से इससे उनका गुस्सा दिखाई देता है. ऐसा नहीं है कि मैं खराब भाषा का समर्थन करता हूं."
'सरकार के खिलाफ बोलने का भी अधिकार'
सैम पित्रोदा ने कहा कि छात्रों को अपनी बात रखने और सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा, "अगर वे किसी मुद्दे पर बात करना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करने की आजादी है. अगर वे सरकार के खिलाफ बोलना चाहते हैं, तो वे किसी के भी खिलाफ बोल सकते हैं, यहां तक कि मेरे खिलाफ भी. फिर समस्या क्या है? यह बिल्कुल स्वीकार्य है."
सैम पित्रोदा ने यह भी कहा कि असहमति होने पर बातचीत का रास्ता बंद नहीं करना चाहिए. पित्रोदा के मुताबिक, अलग-अलग विचार होना सामान्य है, लेकिन लोगों को आमने-सामने बैठकर अपनी बात रखने और मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने कहा, "आपके लिए मुझसे सहमत होना जरूरी नहीं है. आपका मुकाबला व्यक्तिगत रूप से मुझसे नहीं, बल्कि मेरे विचार से है."
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'आज मेरा विचार गलत, कल सही हो सकता है'
सैम पित्रोदा ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति और उसके विचार में फर्क करना जरूरी है. उन्होंने कहा, "हमें यह साफ समझना चाहिए कि हम किसी व्यक्ति पर हमला नहीं कर रहे हैं, बल्कि किसी खास समय पर उसके किसी खास विचार को चुनौती दे रहे हैं."
कांग्रेस ने कहा कि समय के साथ लोगों के विचार बदल सकते हैं और ऐसा होना स्वाभाविक है. पित्रोदा ने कहा, "मैं खुद बदला हूं. मैंने सीखा है, अपने विचार बदले हैं और अपने जीवन में विरोधाभासों का सामना किया है. यह बिल्कुल ठीक है. जब आप मेरे विचार की आलोचना करते हैं, तो मैं समझता हूं कि आप व्यक्तिगत रूप से मेरी आलोचना नहीं कर रहे हैं. आज मेरा विचार गलत हो सकता है और कल सही. इसलिए विचारों की आलोचना करना जायज है."