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सड़कें धंसी, लोहे का पुल बहा... असम और अरुणाचल में बाढ़-बारिश से हाहाकार, देखें डरावना मंजर

Flood and Landslide: अरुणाचल प्रदेश और असम में भारी बारिश से बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है. असम में 100 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आने से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं. केमी नदी पर 300 मीटर लंबा लोहे का पुल बह गया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित है.

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Flood and Landslide in assam & Arunachal Pradesh
Flood and Landslide in assam & Arunachal Pradesh

पूर्वोत्तर भारत में मॉनसून सीजन में भारी बारिश ने तबाही मचाई है. अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ ने कई जिलों को प्रभावित किया है, जबकि असम में भी बाढ़ से स्थिति बिगड़ गई है. सड़कें धंस गई हैं. लोहे का 300 मीटर लंबा पुल बाढ़ में बह गया है. दोनों ही राज्यों के कई इलाकों में घर-मकान, सड़कें और खेतों में किसानों की फसलें तबाह हो गई हैं, जिससे लोगों की जिंदगी अस्त-व्यस्त है.

अरुणाचल में भारी तबाही
अरुणाचल प्रदेश में इन दिनों कुदरत का कहर बरपा है. लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बाद राज्य के कई हिस्सों में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है.आपदा के चलते राज्य में अब तक तीन मौतों की पुष्टि हुई है जबकि कई अन्य लापता हैं. IAF और SDRF की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं.

स्थानीय लोगों ने बताया कि तेज बहाव वाले पानी ने सबकुछ अपने साथ बहा लिया है. सड़कें, पुल बुरी तरह प्रभावित हैं. पूर्वी कामेंग और पक्के केसांग जिलों को जोड़ने वाला पुल टूट गया है. अरुणाचल प्रदेश के छह जिलों में यातायात पूरी तरह कट गया है. 

वहीं, अरुणाचल से आई बाढ़ की लहर ने असम में भी हाहाकार मचाया है. धेमाजी, लखीमपुर, बिशनाथ, सोनितपुर और अन्य जिलों में बाढ़ की स्थिति है. धेमाजी में सिमेन नदी पर रेलवे ब्रिज आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है. वहीं, केमी नदी पर 300 मीटर लंबा लोहे का पुल बह गया है, जिससे केमी-पूराना जेलोम क्षेत्र और जोनाई सदर के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है. 

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लगातार भारी बारिश और अरुणाचल प्रदेश से आने वाले पानी की वजह से असम के धेमाजी जिले में भयंकर बाढ़ के हालात है. बीते दिन यानी  28 जून को केमी नदी पर बना 300 मीटर लंबा लोहे का पुल तेज बाढ़ के पानी में बह गया है. इस पुल के टूटने से केमी-पुराना जेलोम इलाके का जोनाई सदर से सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया है. इलाके के हजारों लोग अब आवागमन की दिक्कतों से जूझ रहे हैं. नदी पर यह पुल कनेक्टिविटी का बहुत अहम रास्ता था. पुल बहने से लोगों को जरूरी सामान, दवाइयां और अस्पताल पहुंचने में बड़ी मुश्किल हो रही है. इस बीच प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं.

सौ से ज्यादा गांव डूबे, हजारों लोग प्रभावित
बाढ़ के कारण कई सड़कें धंस गई हैं और पानी सड़कों पर बह रहा है. निचले इलाकों में घरों में पानी घुस गया है. धेमाजी जिले में 20,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. असम सरकार ने कई जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है. अरुणाचल प्रदेश में हुई तेज बारिश के कारण असम-अरुणाचल बॉर्डर के जोनाई इलाके में नदियां उफान पर हैं. बहिर चिले और बहिर जोनाई ग्राम पंचायत सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं. बहिर चिले में करीब 40 गांव और बहिर जोनाई में 60 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, धेमाजी के चार राजस्व सर्किलों में 69 गांवों के करीब 16,000 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. खेत, घर, सड़कें सब पानी में डूब गए हैं. कई पशु भी पानी में बह गए हैं.

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केंद्र और राज्य सरकार एक्टिव
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बात की. उन्होंने बाढ़ की स्थिति, नुकसान और राहत कार्यों की जानकारी ली तथा केंद्र की. साथ ही हर संभव मदद का आश्वासन दिया. वहीं,मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने X (ट्विटर) पर लिखा, धेमाजी में बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी संसाधनों का इस्तेमाल करके प्रभावित परिवारों की सुरक्षा पर काम कर रही है.

अरुणाचल में भूस्खलन में बह गया बाइकर 
अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले के सिजी इलाके में भारी बारिश से हुए भूस्खलन का वीडियो सामने आया है. जिसमें देखा जा सकता है कि पहाड़ी का एक हिस्सा ढह गया और एक बाइकर को मलबे के साथ नीचे बहा ले गया. लोग चिंतित हैं कि अगर मलबा टूटा तो नदी में अचानक बाढ़ आ सकती है. जानकारी के अनुसार, बाइकर बच गया है, लेकिन चोटों की पुष्टि नहीं हुई है. प्रशासन ने नदी किनारे और भूस्खलन वाले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी है.

मौसम विभाग की चेतावनी
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले कुछ दिनों में पूर्वोत्तर में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है. ऐसे में निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे न जाने की सलाह दी गई है. यह बाढ़ पूर्वोत्तर के लिए मॉनसून की पहली बड़ी चुनौती साबित हुई है.

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