प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भारत के विकास का अहम आधार बताया. उन्होंने वैश्विक संकट के समय में कुछ देशों द्वारा ऊर्जा संसाधनों के शस्त्रीकरण करने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश में गैस, पेट्रोल और यूरिया जैसे जरूरी सामान की उपलब्धता बनी हुई है. भारत अपनी क्षमताओं के दम पर खड़ा है और आगे बढ़ रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'संकट के काल में कुछ लोगों ने संशाधनों को वेपनाइज करने का खेल खेला है. संशाधनों का वेपनाइजेशन किया जा रहा है. पेट्रोल, डीजल, दवाइयां और भूभाग को भी वेपनाइज किया जा रहा है. ऐसे समय अगर हम आत्मनिर्भरता के मंत्र को लेकर ना चले होते तो ऐसी चुनौतियों का सामना कैसे कर पाते. ट्रेड एग्रीमेंट बहुत बड़ा अवसर है. एमएसएमई को कहना चाहूंगा कि इस मौके को छोड़ना नहीं है. हमें दुनिया में जो मिलता है उससे अच्छा और सस्ता देना होगा.'
डर का माहौल बना गया, फेक न्यूज फैला गया
पीएम मोदी ने कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए कहा कि संकट के समय कुछ लोगों ने देश में डर और चिंता का माहौल बनाने की कोशिश की. उन्होंने बिना नाम लिए विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग भय फैलाने और फेक न्यूज के जरिए लोगों को डराने में आनंद लेते थे. उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान पूरी दुनिया चिंता में थी और सभी व्यवस्थाएं प्रभावित हुई थीं. इसके बाद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध और संघर्ष शुरू हुए, चाहे वह यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया. ऐसे माहौल में भी कुछ लोगों ने तरह-तरह की भविष्यवाणियां कर लोगों को डराने की कोशिश की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना के दौरान कहा गया कि वैक्सीन नहीं मिलेगी और लोग नहीं बचेंगे. इसी तरह पश्चिम एशिया संकट के दौरान यह आशंका जताई गई कि पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल नहीं मिलेगा, गैस और डीजल की कमी हो जाएगी और किसानों को खाद नहीं मिलेगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि इन आशंकाओं के बावजूद भारत ने अपनी तैयारियों और क्षमताओं के दम पर जरूरी आपूर्ति को बनाए रखा. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां एक बार फिर दिखाती हैं कि भारत के लिए आत्मनिर्भरता कितनी जरूरी है. ऊर्जा, खाद, कृषि और अन्य आवश्यक वस्तुओं के मामले में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना ही भविष्य के संकटों से निपटने का आधार बनेगा.
हमारी तैयारियों ने संकट में देश को संभाले रखा
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने इस तरह के संकट की कल्पना नहीं की थी, लेकिन जब हालात सामने आए तो पहले से की गई तैयारियों ने देश को संभालने में मदद की. उन्होंने कहा कि दुनिया भर के कई देश वैश्विक संकटों से प्रभावित हुए हैं और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा. इसके बावजूद सरकार ने किसानों पर महंगी खाद का पूरा बोझ नहीं पड़ने दिया. प्रधानमंत्री ने यूरिया की कीमत का उदाहरण देते हुए कहा कि वैश्विक बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत करीब 3,000 रुपये तक पहुंच गई है. इसके बावजूद भारतीय किसानों को यह सिर्फ 300 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है.
उन्होंने कहा कि सरकार खुद इस कीमत के अंतर का बोझ उठा रही है, ताकि किसानों को महंगाई का सामना न करना पड़े. मोदी ने डीएपी खाद का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमत करीब 5,000 रुपये तक पहुंच गई है, लेकिन किसानों की सुविधा को देखते हुए भारत में इसे 1,350 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट के दौर में किसानों को राहत देना सरकार की प्राथमिकता है.
PM ने आत्मनिर्भरता की जरूरत पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भरता की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पहली बार आत्मनिर्भर भारत की बात की थी, तब कुछ लोग सवाल उठाते थे कि इससे वैश्वीकरण को नुकसान होगा. मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में वैश्विक परिस्थितियां काफी बदल गई हैं और अब दुनिया में वैश्वीकरण को लेकर पहले जैसी चर्चा सुनाई नहीं देती. उन्होंने कहा कि भारत के लिए आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया से कट जाना नहीं, बल्कि अपनी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता मजबूत करना है. वैश्विक संकटों के बीच देश की अपनी उत्पादन क्षमता और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होना बेहद जरूरी है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि कच्चे तेल के लिए भारत की दूसरे देशों पर निर्भरता सिर्फ संसाधनों की कमी का नतीजा नहीं, बल्कि वर्षों तक चली सोच की सीमाओं का भी परिणाम रही है. उन्होंने कहा कि अब सरकार इस सोच को बदल रही है और देश के भीतर मौजूद संभावनाओं का पूरा इस्तेमाल किया जा रहा है. मोदी ने कहा कि पहले देश के करीब 99 फीसदी ऑफशोर क्षेत्रों को 'नो-गो एरिया' मान लिया गया था. यानी समुद्र के भीतर मौजूद तेल और गैस के संभावित भंडार की खोजने के लिए इन क्षेत्रों को लगभग बंद रखा गया था. उन्होंने कहा कि अब इन क्षेत्रों को 'गो-अहेड एरिया' में बदला गया है और समुद्र के भीतर नए भंडार की तलाश के लिए सक्रिय रूप से खोज अभियान चलाए जा रहे हैं. प्रधानमंत्री ने इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए समय की जरूरत बताया.
उन्होंने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए भारत एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहा है. सरकार ने 200 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है और पांच नए परमाणु रिएक्टर लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा पाइप्ड गैस नेटवर्क के विस्तार का भी जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2014 से पहले करीब 70 शहरों में ही पाइप्ड गैस वितरण की सुविधा थी, जो अब बढ़कर करीब 700 शहरों तक पहुंच गई है. पहले करीब 20-22 लाख घरों तक पाइप्ड गैस पहुंची थी, जबकि अब करीब 1.75 करोड़ घरों तक इसे पहुंचाने पर काम हो रहा है. प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हुई प्रगति को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि करीब 12 साल पहले भारत की सोलर ऊर्जा क्षमता महज 2 गीगावॉट थी, जो अब बढ़कर 160 गीगावॉट हो चुकी है. उन्होंने बताया कि 50 लाख से अधिक घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं.
'वोकल फॉर लोकल' को अपनाने की अपील
मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अब क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर भी तेजी से काम हो रहा है. उनके मुताबिक कई देश अब क्रिटिकल मिनरल्स के लिए भारत पर निर्भर हो रहे हैं. सेमीकंडक्टर सेक्टर में तीन बड़े प्लांट काम शुरू कर चुके हैं और यहां तैयार होने वाले चिप्स का निर्यात भी किया जाएगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले 7-8 वर्षों में 5 से 8 और सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो सकते हैं. प्रधानमंत्री ने देशवासियों से 'वोकल फॉर लोकल' को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि भारत लंबे समय तक दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकता. उन्होंने कहा कि देश में स्वदेशी उत्पादों को लेकर लोगों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है और आत्मनिर्भरता की यह भावना भारत को मजबूत बनाएगी.
लाल किले पर तिरंगा फहराने के बाद अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि आजादी के बाद भारत ने विकास की रफ्तार पकड़ने में समय लिया, लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश ने नई गति हासिल की है. उन्होंने कहा कि 2014 तक दुनिया भारत को 'फ्रैजाइल फाइव' देशों में गिनती थी, लेकिन अब भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि आजादी की 100वीं वर्षगांठ तक 140 करोड़ देशवासियों के प्रयास, सामर्थ्य और संकल्प से देश विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करेगा. उन्होंने देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ से हुई तबाही पर भी दुख जताया और कहा कि संकट की इस घड़ी में पूरा देश प्रभावित लोगों के साथ खड़ा है.