scorecardresearch
 

'भ्रामक और छलपूर्ण है चुनाव आयोग का जवाब', SC में दायर EC के हलफनामे पर बोले जयराम रमेश

जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के मंगलवार को दाखिल हलफनामे को भ्रामक और छलपूर्ण बताया. उन्होंने फॉर्म 6, ईसीआईनेट, आयुक्तों की आपत्तियों और मतदाता सूची पुनरीक्षण पर आरोप लगाते हुए आयोग की प्रक्रिया और फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए.

Advertisement
X
कांग्रेस नेता जयराम रमेश. (File Photo: PTI)
कांग्रेस नेता जयराम रमेश. (File Photo: PTI)

कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए उसके हलफनामे को भ्रामक, छलपूर्ण और डबल स्टैंडर्ड बताया है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दाखिल किया है, वह खुद आयोग के लिए भी बेहद नुकसानदेह है. उन्होंने अपने बयान में फॉर्म 6 में कथित गैरकानूनी संशोधन, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के फैसलों, ECINet के इस्तेमाल और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए.

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 के साथ जोड़े गए नए डिक्लेरेशन को लेकर विरोधाभासी दावे किए हैं. उनके मुताबिक, पहले आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस डिक्लेरेशन को सही ठहराया था, लेकिन बाद में कोर्ट ने इस दावे का खंडन किया. रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग अब कह रहा है कि नया डिक्लेरेशन अलग फॉर्म है और फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ. जबकि उनके मुताबिक, इस डिक्लेरेशन के बिना ऑनलाइन फॉर्म 6 जमा नहीं किया जा सकता था.

यह भी पढ़ें: चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, कहा- SIR पर ज्ञानेश कुमार ने सर्वसम्मति से लिए फैसले

कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि 26 सितंबर को आयोग ने कहा था कि डिक्लेरेशन को फॉर्म 6 के साथ जोड़ा गया है, जबकि अब वह इसे फॉर्म 6 का हिस्सा मानने से इनकार कर रहा है. रमेश ने इसे रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1960 का उल्लंघन बताया.

Advertisement

चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज करने का आरोप

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि SIR से जुड़े फैसलों पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया. उन्होंने दावा किया कि दोनों आयुक्तों को कुछ फैसलों की जानकारी भी नहीं दी गई. उन्हें इनके बारे में मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला. रमेश ने इसे सर्वसम्मति से फैसले लेने के बजाय एकतरफा निर्णय लेने का मामला बताया.

ECINet और IT डिवीजन पर भी उठाए सवाल

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि ECINet के जरिए मतदाता सूचियों पर नियंत्रण केंद्रीकृत किया गया और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) के अधिकारों को दरकिनार किया गया. उन्होंने गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का जिक्र करते हुए कहा कि कई राज्यों में EROs के फैसले पलटे जाने के मामले सामने आए हैं.

यह भी पढ़ें: 'पार्टी कार्यकर्ताओं को खुद करनी पड़ रही है मॉनिटरिंग', अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यशैली पर दागे तीखे सवाल

उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के IT डिवीजन के कामकाज में पारदर्शिता की कमी और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसले लेने पर चिंता जताई थी. रमेश के मुताबिक, इस संबंध में कैबिनेट सचिव को पत्र भी लिखा गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

Advertisement

SIR प्रक्रिया और फॉर्म 7 पर आरोप

कांग्रेस प्रवक्ता ने SIR प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग हर राज्य में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 का दुरुपयोग किया गया है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के हलफनामे में मीडिया में सामने आए खुलासों की सच्चाई से इनकार नहीं किया गया है. जयराम रमेश ने अपने बयान के आखिर में कहा कि लंबे समय तक झूठ बोलने से व्यक्ति अपने ही बुने जाल में उलझ जाता है और आखिरकार उसका झूठ सामने आने लगता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement