केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 72 घंटे के अल्टीमेटम ने सरकार को यह फैसला लेने पर मजबूर किया? पिछले दो दिनों में हुए घटनाक्रमों को देखें तो आंदोलन और सरकार के बीच बातचीत के दौरान प्रधान का इस्तीफा सबसे अहम मुद्दा बना रहा. सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ हुई बातचीत में सीजेपी नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास ने साफ शब्दों में कहा था कि उनकी सबसे बड़ी और पहली मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है.
सीजेपी ने सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि यदि तय समय के भीतर प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो प्रदर्शनकारी एक बार फिर संसद की ओर मार्च करेंगे और इसकी सार्वजनिक घोषणा भी कर देंगे. बताया जा रहा है कि सीजेपी नेताओं की इस चेतावनी के जवाब में जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा था कि वे इस मुद्दे पर चर्चा कर उन्हें जवाब देंगे. इसके बाद दोनों नेताओं ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दी.
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इसी दौरान सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए 47 अधिकारियों को हटाने का फैसला किया. साथ ही एजेंसी के पुनर्गठन के लिए नई भर्तियों की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई. हालांकि, इन कदमों के बावजूद सीजेपी अपने रुख पर कायम रही और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पीछे नहीं हटी. जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक बार फिर शनिवार को अमित शाह से मुलाकात की. सूत्रों के अनुसार, इसी बैठक के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में तीसरे दौर की बातचीत की. बैठक में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच प्रमुख मांगों पर सहमति बनी. इसके बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी ने अपना आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया और जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से अपने-अपने घर लौटने की अपील की. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर की वापसी सीजेपी की प्रमुख मांगें थीं.