दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और सुशासन के संकल्प की नीति के तहत दिल्ली सरकार के व्यापार और कर विभाग ने टैक्स चोरी और तंबाकू उत्पादों के अवैध कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. विभाग की एंटी-इवेजन शाखा-II ने देर रात नियमित प्रवर्तन जांच के दौरान एक गाड़ी को रोककर उसमें ले जाई जा रही करीब 4.20 लाख आयातित ऐसेलाइट सिगरेट की खेप को जब्त किया है. जब्त सिगरेट की अनुमानित कीमत लगभग 65 लाख रुपये हैं.
अधिकारियों के मुताबिक, एंटी-इवेजन टीम नियमित रूप से गाड़ियों और माल की आवाजाही की जांच कर रही थी. रात में भी टीम की जांच जारी थी. इस दौरान एक संदिग्ध वाहन को रोका गया. जब गाड़ी की तलाशी ली गई तो उसमें से बड़ी मात्रा में आयातित सिगरेट बरामद हुई.
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गाड़ी में ‘ESSE Light’ ब्रांड की लगभग 4.20 लाख सिगरेट ले जाई जा रही थीं. इसकी बाजारू कीमत लगभग 65 लाख रुपये है. विभाग ने फौरन सिगरेट की पूरी खेप को कब्जे में लिया और आगे की कार्रवाई शुरू की.
सिगरेट जब्ती के बाद जब जांच की गई तो पाया गया कि सिगरेट की पैकेट के सामने वाले हिस्से पर कोई चेतावनी नहीं थी. दरअसल, भारत में तंबाकू उत्पादों के लिए स्वास्थ्य चेतावनी लिखना अनिवार्य होता है. लेकिन इन पैकेट्स पर कोई चेतावनी नहीं थी. यह सिगरेट और तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 की धारा 7 के प्रावधानों का उल्लंघन है. कानून की मानें तो बिना चेतावनी वाले सिगरेट पैकेट की बिक्री, आपूर्ति या वितरण की अनुमति नहीं है.
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मामले में विभाग ने साफ किया है कि स्वास्थ्य चेतावनी से जुड़े ये प्रावधान सिर्फ भारत में बनी सिगरेट पर ही लागू नहीं होते बल्कि भारत में बिक्री या वितरण के लिए आयात की गई सिगरेटों पर भी लागू होते हैं. यानी किसी विदेशी ब्रांड की सिगरेट को भारत में बेचने या वितरित करने से पहले उसे भारत की पैकेजिंग और स्वास्थ्य चेतावनी संबंधी नियमों का पालन करना जरूरी है.
बता दें, ये कार्रवाई GST अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के तहत की गई है. फिलहाल विभाग ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में सिगरेट की खेप कहां से लाई जा रही थी. और इसके संबंध में कर एवं अन्य वैधानिक औपचारिकताओं का पालन किया गया था या नहीं. दिल्ली सरकार ने साफ किया है कि टैक्स चोरी, बिना वैधानिक दस्तावेजों के माल की आवाजाही और अवैध तंबाकू उत्पादों के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.