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'असंवैधानिक है वन नेशन, वन इलेक्शन बिल', JPC के सामने चिदंबरम का तीखा विरोध

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने संसद की संयुक्त समिति के सामने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के प्रस्ताव का विरोध किया है. उन्होंने इसे असंवैधानिक और लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया, चिदंबरम ने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की कोशिश संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन है और सरकार के पास इसे पारित कराने के लिए बहुमत नहीं है.

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चिदंबरम ने 'वन नेशन वन इलेक्शन' का विरोध किया. (Photo- ITG)
चिदंबरम ने 'वन नेशन वन इलेक्शन' का विरोध किया. (Photo- ITG)

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने संसद की संयुक्त समिति के सामने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के प्रस्ताव का विरोध जताया है. उन्होंने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की इस पहल को 'Monstrous' और 'असंवैधानिक' करार दिया.

चिदंबरम ने कहा कि देश भर में एक साथ चुनाव कराने का प्रस्ताव एक 'बेदिमाग' वाली एक्सरसाइज है. सूत्रों के मुताबिक, चिदंबरम ने ये राय 'संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024' और 'केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024' का रिव्यू कर रही संसद की संयुक्त समिति के सामने पेश होकर दी.

इन विधेयकों का मकसद लोकसभा और राज्यों की विधानसभा चुनावों को एक साथ जोड़ना है. चिदंबरम ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से जुड़े ये विधेयक पूरी तरह से असंवैधानिक हैं.

चिदंबरम ने तर्क दिया कि क्योंकि कोई भी विधायिका 5 साल के कार्यकाल के लिए चुनी जाती है, ऐसे में उसके कार्यकाल को बीच में छोटा करना सीधे तौर पर संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन है.

'अंतरात्मा इजाजत नहीं देती, सरकार के पास बहुमत भी नहीं'

कांग्रेस नेता ने समिति से कहा कि उनकी अंतरात्मा इन विधेयकों का समर्थन करने की इजाजत नहीं देती. इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार के पास संसद में इस कानून को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत नहीं है.

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समिति की सदस्य और तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने भी इस विधेयक का विरोध कियाच उन्होंने कहा कि ये कानून चुनाव आयोग को 'बेकाबू' अधिकार दे देगा.

बिल पर सबकी अलग-अलग राय

बीजेपी सांसद पी.पी. चौधरी की अध्यक्षता वाली इस समिति के सामने तरलोचन सिंह, नवीन खन्ना, मीनाक्षी जैन और नीरू कुमार समेत लगभग 10 पद्म पुरस्कार विजेताओं का एक समूह भी अलग से पेश हुआ. सुनवाई के दौरान जहां कुछ पद्म पुरस्कार विजेताओं ने एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन किया, वहीं कुछ ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इससे देश में अव्यवस्था और अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है.

पहले भी एक साथ होते थे चुनाव

बता दें कि 1951 से 1967 तक भारत में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही आयोजित होते थे. हालांकि, 1968 और 1969 में कुछ राज्य विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण ये व्यवस्था बदल गई. इसके बाद से देश में अलग-अलग समय पर चुनाव कराने की व्यवस्था चल रही है.

यह भी पढ़ें: 6 महीने के नोटिस पर 'वन नेशन वन इलेक्शन' को तैयार चुनाव आयोग- JPC चेयरमैन

दिसंबर 2024 में इन विधेयकों को लोकसभा में पेश किया गया था, जिसके बाद इन्हें विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया. ये विधेयक पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के बाद तैयार किया गया था.

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