वोट चोरी को लेकर देशभर में चल रहे प्रोटेस्ट के बीच निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची से नाम कटवाने या हटवाने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-7 से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों में फॉर्म-7 आवेदन दाखिल करने की सीमाओं की जानकारी इस सर्कुलर में दी गई है. दावे और आपत्तियों की पूरी अवधि के दौरान कोई भी मतदाता निजी तौर पर अधिकतम दस फॉर्म-7 आवेदन कर सकता है.
मतदाता सूची के निरंतर अद्यतनीकरण (Continuous Updation) की अवधि के दौरान कोई भी मतदाता निजी तौर पर प्रति माह फॉर्म-7 के अधिकतम पांच आवेदन भर सकता है. फॉर्म-7 मिलने के बाद सीधे या बीएलओ की अनुशंसा पर ईआरओ यानी निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी सबसे पहले आपत्तिकर्ता यानी ऑब्जेक्टर को नोटिस जारी करेगा. उसकी व्यक्तिगत रूप से सुनवाई करेगा.
फॉर्म-7 के जरिए ऐसे होगा आपत्तियों का निपटारा
प्रत्येक फॉर्म 7 के लिए उस आपत्तिकर्ता व्यक्ति के अलग-अलग बयान दलीलों और साक्ष्य के साथ दर्ज करेगा. आपत्तियों की वैधता के बारे में स्वयं संतुष्ट होगा. जब ईआरओ संतुष्ट हो जाएगा, तो वह आरईआर यानी RER - निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 19 और 20 के अनुसार आवेदन का निपटारा करेगा. जिसमें उस व्यक्ति को भी सुनवाई का अवसर दिया जाएगा जिसके नाम/आवेदन पर आपत्ति जताई गई है.
इधर, कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को वोट चोरी के आरोपों के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है. हालांकि अभिजीत दिपके, रांका और सौरव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. तीनों पर यह कार्रवाई मुंबई से दिल्ली पहुंचे ही हुई. बताया जा रहा है कि तीनों के खिलाफ फ्लाइट के अंदर ही कार्रवाई की गई. इसके बाद पुलिस उन्हें बस में बैठाकर अपने साथ ले गई. फ्लाइट के अंदर हुई इस कार्रवाई और फिर पुलिस के बस से ले जाने की घटना ने ध्यान खींचा है.