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फास्ट ट्रैक कोर्ट, 90 दिन में ट्रायल और 10 साल जेल... 27 जुलाई को संसद में पेश होगा एंटी-पेपर लीक बिल

पेपर लीक और परीक्षा में धांधली पर सख्ती बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में नया संशोधन विधेयक पेश करेगी. प्रस्तावित कानून के तहत हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे, जहां रोजाना सुनवाई होगी और तीन महीने में ट्रायल पूरा करना होगा.

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एंटी-पेपर लीक बिल 27 जुलाई को लोकसभा में पेश किया जाएगा. (Photo: X/@SansadTV)
एंटी-पेपर लीक बिल 27 जुलाई को लोकसभा में पेश किया जाएगा. (Photo: X/@SansadTV)

केंद्र सरकार ने परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर शिकंजा कसने के लिए कानून में संशोधन करने जा रही है. सरकार सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करेगी. इस विधेयक में हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रस्ताव है. इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करना होगा.

लोकसभा सदस्यों के बीच प्रसारित विधेयक के मसौदे के मुताबिक, पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी. दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल तथा 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकेगा. वहीं, संगठित तरीके से पेपर लीक या परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोहों के लिए सजा और भी कड़ी होगी. ऐसे मामलों में न्यूनतम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

वर्तमान में लागू कानून सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में सामान्य मामलों में 3 से 5 साल की जेल और संगठित अपराध के मामलों में 5 से 10 साल की सजा तथा कम से कम 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है. नया संशोधन कानून इन प्रावधानों को और सख्त बनाएगा. विधेयक को सोमवार को लोकसभा में पेश करने, उस पर चर्चा और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. हालांकि, आमतौर पर किसी विधेयक को एक ही दिन में पेश और पारित करने की प्रक्रिया कम ही देखने को मिलती है.

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छात्र आंदोलन के बाद आया संशोधन

सरकार ने यह संशोधन ऐसे समय लाने का फैसला किया है, जब नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्र आंदोलन तेज हो गया था. इस मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण संसद के पहले सप्ताह की कार्यवाही भी प्रभावित रही थी. हालांकि, नए विधेयक पर विपक्ष का रुख अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि विपक्ष इस पर आम सहमति के आधार पर फैसला करेगा.

फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी डेली सुनवाई

संशोधन विधेयक के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को किसी भी सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में अधिसूचित करने का अधिकार दिया जाएगा. इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करना होगा. इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार किसी भी मामले की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स (Special Task Force) भी गठित कर सकेगी.

परीक्षा प्रक्रिया के लिए नई गाइडलाइंस

विधेयक में परीक्षाओं के लिए नए गाइडलाइंस तय करने का भी प्रस्ताव है. इसमें परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट, उम्मीदवारों की बायोमेट्रिक जांच, सुरक्षा व्यवस्था, सीट आवंटन, प्रश्नपत्र तैयार करने और अपलोड करने की प्रक्रिया, परीक्षा में निगरानी, परीक्षा के बाद की गतिविधियां और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए स्क्राइब उपलब्ध कराने जैसे प्रावधान शामिल हैं. विधेयक में 15 प्रकार की गतिविधियों को स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में रखा गया है. 

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इनमें प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट बनाना, फर्जी एडमिट कार्ड जारी करना और परीक्षा प्रक्रिया में अन्य प्रकार की धोखाधड़ी शामिल हैं. इस संशोधन विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 जुलाई को मंजूरी दी थी, जिसे 27 जुलाई को लोकसभा में पेश किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य परीक्षाओं की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है.

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