भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से अपनी टीम की घोषणा किए जाने के बाद अब पार्टी की सर्वोच्च निर्णायक संस्था 'संसदीय बोर्ड' के पुनर्गठन की चर्चा है. भाजपा संविधान के तहत संसदीय बोर्ड को प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्रियों के नामों की सिफारिश, नीतिगत निर्णय, राजनीतिक गठबंधन और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सर्वाधिकार प्राप्त है. इसके सभी सदस्य 'केंद्रीय चुनाव समिति' के भी अनिवार्य सदस्य होते हैं, जो चुनाव में उम्मीदवारों का अंतिम चयन करती है.
संसदीय बोर्ड के पदेन अध्यक्ष होते हैं पार्टी अध्यक्ष
पार्टी अध्यक्ष संसदीय बोर्ड के पदेन अध्यक्ष होते हैं, जबकि राष्ट्रीय संगठन महासचिव (वर्तमान में बी. एल. संतोष) इसके सचिव का दायित्व संभालते हैं. संविधान के अनुसार अध्यक्ष सहित इसमें अधिकतम 11 सदस्य हो सकते हैं. वैसे वर्तमान में नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे वरिष्ठ नेताओं समेत 12 सदस्य इसमें शामिल हैं. इस निकाय के गठन में वरिष्ठता के साथ-साथ क्षेत्रीय, जातीय और धार्मिक संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाता है.
विवादित रहा है बोर्ड में मुख्यमंत्रियों का इतिहास
संसदीय बोर्ड में मुख्यमंत्रियों के प्रतिनिधित्व का इतिहास विवादों भरा रहा है. वर्ष 2006 में राजनाथ सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को इससे बाहर कर दिया था, हालांकि 2013 में उन्हें पुनः शामिल किया गया. 2022 में तत्कालीन अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी को बोर्ड से हटा दिया था.
इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि चूंकि संसदीय बोर्ड ही मुख्यमंत्रियों का चयन करता है, इसलिए किसी मुख्यमंत्री का इसमें होना हित-टकराव पैदा करता है.
सीएम योगी और सीएम फडणवीस की दावेदारी चर्चा में
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दावेदारी चर्चा में है. इसके अलावा, पूर्व अध्यक्ष के तौर पर जे. पी. नड्डा और नितिन गडकरी की बोर्ड में मौजूदगी को लेकर भी निर्णय लिया जाना है.
संसदीय बोर्ड के अतिरिक्त केंद्रीय चुनाव समिति, राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद का पुनर्गठन भी प्रक्रियाधीन है. चुनाव समिति में बोर्ड के सदस्यों के अलावा महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस जैसे नेता और महिला मोर्चा की पदेन अध्यक्ष शामिल होती हैं.
वहीं 120 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी पार्टी की मुख्य कार्यकारी इकाई है, जिसमें महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं जनजाति का न्यूनतम प्रतिनिधित्व अनिवार्य होता है. राष्ट्रीय परिषद में राज्य परिषदों के प्रतिनिधि, पूर्व अध्यक्ष और विधायक दलों के नेता शामिल होते हैं.