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'मैं अमित शाह हूं...', बंगाल में ममता को दिया वो चैलेंज, जो 12 साल बाद हुआ पूरा

अमित शाह के इस वीडियो को बहुत लोग भूल चुके थे लेकिन चार मई को बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद यह वीडियो फिर से चर्चा में है. इसका कारण है कि शाह का वो वादा जो अब सच हो चुका है. 

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अमित शाह का 2014 का वीडियो फिर से वायरल हो रहा. (Photo: PTI)
अमित शाह का 2014 का वीडियो फिर से वायरल हो रहा. (Photo: PTI)

बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को हराकर राज्य में उसके 15 साल के शासन का अंत कर दिया. बीजेपी को यह जीत अचानक नहीं मिली. एक ऐसे राज्य में जहां एक दशक पहले तक बीजेपी की लगभग कोई पकड़ नहीं थी. ऐसे में सोमवार को बीजेपी की प्रचंड जीत दिसंबर 2014 में कोलकाता में बीजेपी नेता अमित शाह के संकल्प की याद दिलाता है.

अमित शाह ने 12 साल पहले कोलकाता के धर्मतला में एक रैली में ममता बनर्जी के उस सवाल का जिक्र किया था, जिसमें ममता ने पूछा था कि अमित शाह कौन हैं? उनका जवाब सरल था लेकिन उन्होंने टीएमसी को चुनौती देते हुए कहा कि मैं अमित शाह हूं. बीजेपी का एक छोटा सा कार्यकर्ता और मैं यहां बंगाल की धरती से तृणमूल कांग्रेस को उखाड़ फेंकने आया हूं. 

अमित शाह के इस वीडियो को बहुत लोग भूल चुके थे लेकिन चार मई को बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद यह वीडियो फिर से चर्चा में है. इसका कारण है कि शाह का वो वादा जो अब सच हो चुका है. 

बीजेपी ने सोमवार को 148 सीटों का बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार कर लिया और सरकार बनाने जा रही है. बीते 15 साल से लगातार सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस अब दूसरे स्थान पर पहुंच गई है. यह पहली बार है जब बीजेपी पश्चिम बंगाल में सरकार बनाएगी.

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2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी 293 में से 207 सीटों पर आगे रही या जीत चुकी है, जबकि ममता बनर्जी की टीएमसी लगभग 80 सीटों पर सिमट गई.

बंगाल में बीजेपी की जीत ने अमित शाह की अहम भूमिका

एक ऐसी पार्टी जिसका लगभग दशकभर से बंगाल में कोई खास कद नहीं था. लेकिन बीजेपी ने अपने धैर्य और मेहनत से जमीनी स्तर पर कामयाबी हासिल की. इस जीत में अमित शाह की केंद्रीय भूमिका रही. यह ध्यान रखने योग्य है कि 2016 में बीजेपी ने बंगाल में तीन सीटें जीती थी. इसके बाद 2021 के चुनाव में बीजेपी ने 77 सीटें जीती. 

लेकिन इस बार प्रचार अभियान के आखिरी चरण में अमित शाह लगभग दो हफ्ते तक राज्य में रहे. उन्होंने इस दौरान 50 से ज्यादा रैलियां और रोडशो किए. उन्होंने राज्य के नेताओं के साथ देर रात तक स्ट्रैटेजी मीटिंग्स की. उनकी टीम ने महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और एंटी इन्कम्बेंसी जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया. सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग को लागू करने और सख्त कानून-व्यवस्था का वादा भी मतदाताओं को प्रभावित करता दिखा. पहले चरण के बाद उनका यह दावा कि बीजेपी 110 से ज्यादा सीटें जीतेगी. एक मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने में मददगार साबित हुआ.

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बंगाल में बीजेपी के एक दशक का सफर

जब 2014 में अमित शाह ने यह संकल्प लिया था, तब पश्चिम बंगाल में बीजेपी का संगठन लगभग न के बराबर था. 1982 में पार्टी का वोट शेयर सिर्फ 0.58 फीसदी था. 1987 में 0.51 फीसदी, 1991 में यह 11.34 फीसदी तक पहुंचा, लेकिन एक भी सीट नहीं मिली. 1996 और 2001 में भी कोई सीट नहीं मिली और 2006 में वोट शेयर गिरकर 1.93 फीसदी रह गया.

2011 में भी 4.06 फीसदी वोट शेयर के बावजूद बीजेपी नगण्य रही. असली बदलाव 2016 के बाद शुरू हुआ, जब वोट सीटों में बदलने लगे. शुरुआत में बंगाल के लोग बीजेपी को उत्तर भारतीय पार्टी मानते थे लेकिन पार्टी ने हार नहीं मानी. कार्यकर्ता गांव-गांव, मोहल्लों में गए और स्थानीय नेताओं को तैयार किया.

पिछले कुछ वर्षों में संदेशखाली हिंसा, आरजी कर अस्पताल मामला और भ्रष्टाचार के आरोपों जैसे मुद्दों ने जनता का मूड बदल दिया. मतदान के दिन 92-93 फीसदी की रिकॉर्ड वोटिंग ने संकेत दे दिया था कि बदलाव आ रहा है. यह खामोश लहर नतीजों के दिन खुलकर सामने आई. ऐसे में अमित शाह का 2014 का वह वीडियो फिर वायरल हुआ और बीजेपी के इस छोटे से कार्यकर्ता ने अपना वादा निभा दिया.

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