नवी मुंबई में लगातार हो रही बारिश के बीच एक बड़ा हादसा सामने आया है. यहां जलभराव वाले हिस्से में करंट उतरने से टू-व्हीलर सवार दो छात्राएं बिजली की चपेट में आ गईं. करंट का तेज झटका लगते ही दोनों छात्राएं सड़क पर गिर पड़ीं. स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है. राहत की बात यह है कि दोनों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है.
जानकारी के मुताबिक, यह हादसा उस समय हुआ जब दोनों छात्राएं बाइक से नेरुल के एलपी ब्रिज के नीचे से गुजर रही थीं. लगातार बारिश के कारण वहां पानी जमा था. आशंका है कि शॉर्ट सर्किट की वजह से पानी में करंट फैल गया, जिसकी चपेट में आने से दोनों युवतियां हादसे का शिकार हो गईं.
घटना की सूचना मिलते ही नवी मुंबई की मेयर सुजाता पाटिल मौके पर पहुंचीं और पूरे घटनास्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए बिजली विभाग और संबंधित अधिकारियों से तत्काल रिपोर्ट मांगी.
मेयर सुजाता पाटिल ने कहा कि बारिश के दौरान खुले बिजली के तार, क्षतिग्रस्त केबल या अन्य विद्युत उपकरण लोगों की जान के लिए खतरा बन सकते हैं. उन्होंने नगर निगम के विद्युत अभियंताओं को निर्देश दिए कि जहां भी खुले तार या बिजली से जुड़ी खामियां हैं, उन्हें तत्काल ठीक किया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभिन्न विभाग अक्सर सड़कों की खुदाई तो कर देते हैं, लेकिन समय पर मरम्मत नहीं करते. इसी लापरवाही के कारण इस तरह की खतरनाक स्थिति पैदा हुई है. मेयर ने बिजली विभाग की जवाबदेही तय करने की भी बात कही.
एक दिन पहले पेड़ गिरने से छात्र की हुई मौत
यह घटना ऐसे समय हुई है जब एक दिन पहले ही मुंबई के चेंबूर इलाके में बारिश के दौरान एक और दर्दनाक हादसा हुआ था. मंगलवार दोपहर रोड नंबर-11 पर यूनिवर्सल स्कूल की एक बस पर पेड़ गिर गया था. हादसे के समय बस में 18 छात्र सवार थे. इस दुर्घटना में एक छात्र की मौत हो गई, जबकि कई अन्य बच्चे घायल हो गए थे. सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है.
वहीं मंगलवार को ही दक्षिण मुंबई के वाल्केश्वर इलाके में एक 'सेस' इमारत की तीसरी मंजिल की बालकनी का एक हिस्सा गिरने से 51 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई. यह घटना मंगलवार रात करीब 11.22 बजे बाबुलनाथ रोड पर स्थित चार मंज़िला 'सूर्य प्रकाश' इमारत में हुई, जब शहर में ज़ोरदार बारिश हो रही थी. नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि यह एक 'सेस' वाली इमारत थी. 'सेस' वाली इमारतें पुरानी निजी इमारतें होती हैं जो रखरखाव के लिए महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) को 'सेस' (एक तरह का टैक्स) देती हैं.
(इनपुट: निलेश पाटिल)