घर बनाने में काफी सावधानी बरती जाती है. क्योंकि, छोटी सी लापरवाही या अनदेखी हमेशा के लिए आपके घर को कमजोर कर सकती है. चाहे वो ईंटों का एक- एक जोड़ हो, या फिर प्लिंथ और लैंटर की डालना हो या छत की ढलाई. छोटी से छोटी चूक घर को कमजोर या उसके डिजाइन को भद्दा बना सकता है.
घर बनाने का मतलब सिर्फ ईंट जोड़ना, पिलर बनाना और छत ढालना नहीं होता है. दीवारों के ऊपर चढ़ाए जाने वाले प्लास्टर की परत की एक समान मोटाई, फ्लोरिंग के वक्त पानी की फ्लो को लेकर इसकी ढलान तय करना या फिर छत की ढलाई की समय इसकी मोटाई और एक समान लेयरिंग रखते हुए, यहां भी पानी न जमे इसके लिए छत की ढलान तय करना. ऐसे कामों में बहुत ही सावधानी बरती जाती है. ऐसे ही एक महत्वपूर्ण काम का एक हिस्सा वायरल वीडियो में दिखाया गया है.
छत की ढलाई यानी स्लैब कास्टिंग से पहले रस्सी या सूत से सेंट्रिंग के ऊपर जाला बनाना, छत की ग्रीड या लाइन मार्किंग का एक हिस्सा है. रस्सी से जाला बनाने का मुख्य कारण एकदम सटीक लेवल, सीध और मोटाई तय करना होता है.
यह मिस्त्रियों को ढलाई के दौरान कंक्रीट की एक समान परत फैलाने में मदद करता है ताकि छत में कहीं ढलान गड़बड़ न हो और वह पूरी तरह समतल रहे. यही वजह है कि ढलाई से पहले मिस्त्री छत की मोटाई और उसके एक बराबर लेवल का अनुमान लगाने के लिए रस्सी से एक जलाबनाकर इसकी लंबाई, चौड़ाई और मोटाई का एक ग्रीड मार्किंग करते हैं.
यह ढलाई का कोई सस्ता जुगाड़ नहीं है, बल्कि छत की एक समान मोटाई तय करने की एक ट्रिक है. जिससे मकान की मजबूती तय होती है. इससे छत की सटीक मोटाई का निर्धारण होता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि छत की मोटाई, जैसे 5 इंच, सभी जगह एक जैसी रहे.
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इससे लेवल की जांच भी हो जाती है. शटरिंग या सेंटरिंग के बाद यह रेखाएं पानी या सूत के लेवल से कंक्रीट के ऊपरी तल को सही सीध में रखती हैं. यह काम स्लैब मार्किंग कहलाता है. यदि छत में मटके, खपरैल या ब्लॉक का इस्तेमाल हो रहा है, तो उनके सही स्थान और गैप को तय करने के लिए भी ऐसे जाले बनाए जाते हैं.
अब समझ में आ गया होगा कि वायरल वीडियो में शटरिंग पर बनाए गए रस्सी या सूत के जाले किस वजह से बनाए जा रहे हैं. यह कोई जुगाड़ नहीं, बल्कि छत की एक समान मोटाई और लेवल की गारंटी है.