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दिल्ली में हंगामा, झारखंड में सन्नाटा? पेपर लीक पर विपक्ष के दोहरे रवैये पर सवाल

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्र-युवा सड़कों पर उतर आए हैं. JMM-कांग्रेस सरकार के तहत हुए घोटालों पर विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं. युवाओं का कहना है कि सिस्टम में भरोसा खत्म हो चुका है और वो न्याय चाहते हैं. वहीं, विपक्षी दल भी राज्य सरकार पर हमलावर हैं, लेकिन दिल्ली में कांग्रेस के नेता इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं.

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रांची में पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन जारी है. (Photo- PTI)
रांची में पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन जारी है. (Photo- PTI)

राजनीति में एक पुरानी कहावत है- 'मीठा-मीठा गप-गप और कड़वा-कड़वा थू-थू.' जब बीजेपी शासित राज्यों में पेपर लीक या भर्ती घोटाला होता है, तो विपक्षी दल आक्रामक होकर प्रदर्शन करते हैं. लेकिन जब यही धांधली विपक्ष शासित राज्यों में होती है, तो उनकी बोलती बंद हो जाती है.

कुछ ऐसा नजारा इन दिनों झारखंड में देखने को मिल रहा है, जहां JMM-कांग्रेस गठबंधन की सरकार के दौरान छात्र-युवा सड़क पर उतरकर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं.

राजधानी रांची में बापू की प्रतिमा के नीचे नीले रंग का तिरपाल लगाकर युवा प्रदर्शन पर बैठे हैं. इन अभ्यर्थियों का आरोप है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSSC) ने नौकरी के नाम पर उन्हें सिर्फ ठगने, रुलाने और भटकाने का काम किया है.

परीक्षा रद्द कराने की मांग

प्रदर्शनकारी युवा दिवाकर कुमार कहते हैं, 'मुख्यमंत्री सर से विनती है कि यहां जंतर-मंतर जैसा माहौल न बनने दें. छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद हो. इस परीक्षा को रद्द करके दोबारा कराया जाए, क्योंकि अब इस सिस्टम पर भरोसा नहीं रहा.'

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की जांच का इतिहास बेहद खराब रहा है. राज्य में पिछले 2 दशकों की 10 भर्तियों की जांच CBI कर रही है. वहीं, 6 दूसरी भर्तियां अलग से जांच के दायरे में हैं. इतना ही नहीं, धांधली की वजह से जुलाई से सितंबर 2026 के बीच प्रस्तावित 9 भर्ती परीक्षाओं को स्थगित करना पड़ा है.

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14वीं कंबाइंड सिविल सर्विसेज परीक्षा पर गंभीर आरोप

विवाद की मुख्य वजह 14वीं कंबाइंड सिविल सर्विसेज परीक्षा के प्रीलिम्स नतीजे हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर CID मामले की जांच कर रही है. इस परीक्षा को लेकर कई तरह के आरोप हैं.

  1. कट-ऑफ मार्क्स में पारदर्शिता नहीं: कैटेगरी के हिसाब से कट-ऑफ अंक क्यों जारी नहीं किए गए?
  2. संवैधानिक सदस्यों के दस्तखत गायब: जारी हुई मेरिट लिस्ट पर कमीशन के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर ही नहीं थे।
  3. OMR शीट में गड़बड़ी: अभ्यर्थियों का आरोप है कि ओएमआर पर हल किए गए सवालों के हिसाब से उनके नंबर कट-ऑफ से बहुत कम बनते हैं, फिर भी उन्हें क्वालिफाइड घोषित कर दिया गया.
  4. ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका: परीक्षा कराने का जिम्मा लखनऊ की 'TDPL' कंपनी को दिया गया, जिसे कथित तौर पर एक महीने पहले ही झारखंड में ब्लैकलिस्ट किया गया था.

इस्तीफा दे चुके JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते का दावा है कि जब कंपनी को ठेका दिया गया था, तब वो ब्लैकलिस्टेड नहीं थी. मामले में CID अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और पूर्व अध्यक्ष के आवास पर भी छापेमारी की गई है.

यह भी पढ़ें: NEET पेपर लीक की फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहले ही दिन सुनवाई टली, अगली तारीख तीन अगस्त

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दोहरे रवैये पर उठ रहे हैं सवाल

एक तरफ जहां दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेता संसद से लेकर सड़क तक पेपर लीक के खिलाफ हुंकार भर रहे हैं, वहीं 1200 किलोमीटर दूर रांची में उनकी ही सरकार की नाक के नीचे युवा न्याय के लिए भटक रहे हैं.

रांची में छोटे-छोटे कमरों में रहकर सालों से तैयारी कर रहे बेरोजगार छात्रों का हौसला अब टूटने लगा है. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित विपक्षी दल बीजेपी अब इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर हमलावर हैं. सवाल यही है कि क्या युवाओं के भविष्य का मुद्दा सिर्फ सियासी नफे-नुकसान तक सीमित रहेगा, या उन्हें पारदर्शी व्यवस्था मिलेगी?

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