महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है. जालना के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने सरकार को 11 सितंबर तक का समय दिया है. उन्होंने गुरुवार रात कहा कि अगर तब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 12 सितंबर को आंदोलन लेकर मुंबई पहुंचेंगे. जरांगे ने साफ कहा कि मांगें पूरी होने तक उनका अनशन खत्म नहीं होगा.
जरांगे पिछले एक सप्ताह से मराठा समुदाय को आरक्षण देने और पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की मांग को लेकर अनशन पर हैं. इस दौरान उनकी तबीयत को लेकर भी चिंता जताई गई. प्रदर्शन स्थल पर मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें ड्रिप यानी IV फ्लूइड लेने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया.
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सरकार ने की अनशन खत्म करने की अपील
गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों और विधायकों का प्रतिनिधिमंडल जरांगे से मिलने पहुंचा. इसमें मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत, MLC प्रसाद लाड और MLA मकरंद पाटिल शामिल थे. विखे पाटिल ने जरांगे की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए उनसे अनशन खत्म करने या कुछ समय के लिए टालने की अपील की.
सरकार ने बताया कि अब तक करीब 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड खोजे गए हैं. कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज करने के लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे. हालांकि, इन आश्वासनों के बावजूद जरांगे ने अनशन खत्म करने से इनकार कर दिया.
पात्र मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र की मांग
बैठक के बाद जरांगे ने मराठा समुदाय के लोगों से 4 सितंबर से कुनबी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड, खून के रिश्ते और वंश से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर आवेदन किया जा सकता है. कुनबी समुदाय OBC यानी अन्य पिछड़ा वर्ग में आता है. जरांगे की मांग है कि पात्र मराठों को कुनबी के तौर पर मान्यता दी जाए, ताकि उन्हें OBC आरक्षण का लाभ मिल सके.
सतारा गजट और केस वापसी भी मांग
जरांगे की मांगों में सतारा गजट के आधार पर आरक्षण, आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस केस वापस लेना और आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिवारों को सरकारी नौकरी और आर्थिक मुआवजा देना भी शामिल है.
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार संविधान और कानून के दायरे में आने वाली मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है. वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सरकार समुदाय को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी दूसरे वर्ग के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए.
अब सभी की नजर 11 सितंबर पर है. जरांगे ने इसे अपना आखिरी भूख हड़ताल बताते हुए कहा है कि मांगें लागू नहीं हुईं तो 12 सितंबर को मुंबई में आंदोलन किया जाएगा.