महाराष्ट्र में आज एक बार फिर अन्नदाता सड़कों पर उतर रहे हैं. ऑल इंडिया किसान सभा के बैनर तले किसान नासिक से मुंबई तक पैदल मार्च निकालेंगे. इस मार्च के लिए किसान नासिक के मुंबई नाका पर जुटने लगे हैं. किसान 27 फ़रवरी को मुंबई पहुंचेंगे. इसके चलते मुंबई में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.
किसानों का कहना है की पिछले लॉन्ग मार्च में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जो आश्वासन दिए थे उसमें से एक भी आश्वासन पूरा नहीं किया. इस बारे में सरकार को किसान सभा के सदस्यों ने आगाह भी किया था, 4 फरवरी और 17 फरवरी को सरकार से बात भी हुई लेकिन हल नहीं निकला.
उसके बाद किसान सभा ने लॉन्ग मार्च का ऐलान कर दिया है. वैसे तो यह लॉन्ग मार्च 21 फरवरी को निकलने वाला था लेकिन पुलिस ने जगह जगह लॉन्ग मार्च के लिए आ रहे किसान और उनकी गाड़ियों को चेकिंग बहाने रोक रखा था. ऐसा दावा किसान सभा की ओर से किया गया. इस वजह से बुधवार देर रात तक किसान नाशिक पहुंच रहे थे. किसान सभा का मानना है कि सरकार ने उन्हें फंसाया है. अब पुलिस भी आए तो हम मार्च निकाल के रहेंगे.
: Members of All India Kisan Sabha have started their march from Nashik to Mumbai over various demands of farmers and tribals of the state.
— ANI (@ANI)
इस बीच महारष्ट्र सरकार के जल संपदा मंत्री गिरीश महाजन और किसान सभा के सदस्यों की मीटिंग हुई. लगभग 2 घंटे चले मीटिंग में से भी कुछ हल नहीं निकला. मंत्री गिरीश महाजन ने कहा की मीटिंग अच्छी रही और हम लिखित में किसान सभा को दे देंगे तो लोगों को लॉन्ग मार्च करने की जरुरत नहीं रहेगी लेकिन हल नहीं निकला.
मालूम हो कि मार्च 2018 में नासिक से मुंबई तक किसानों का विशाल मार्च हुआ था. इसमें किसानों ने फसलों को उचित दाम, कर्जमाफी, फसल बीमा, सूखाग्रस्त किसानों को राहत और आदिवासी लोगों को वनविभाग की जमीन का बंटवारा जैसी मांगो को लेकर 180 किलोमीटर चलकर मुंबई मे विधानसभा का घेराव किया था. उस वक्त मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आश्वासन के बाद किसानों का मार्च वापस लौटा था, लेकिन अब तक सरकार का वादा पूरा ना होने के कारण 11 माह बाद वापस किसान लॉन्ग मार्च निकाल रहे हैं.
50 हजार किसान होंगे शामिल...
किसान सभा का दावा है कि शुरुआत में पचास हजार किसान लॉन्ग मार्च में शामिल होंगे. मुंबई पहुंचने तक यह संख्या लाखों में होगी. इस मार्च के आयोजक तथा किसान सभा के डॉ. अजित नवले कि माने तो किसानों को दिया एक भी आश्वासन सरकार ने पूरा नहीं किया है और ना ही कर्जमाफी हुई. यहां तक कि किसानों को फसल के उचित दाम तक नहीं मिले. आदिवासी किसानों को फॉरेस्ट लैंड मिलने के मामले पर भी कुछ नहीं हुआ. फसल बीमा में भी किसानों को ना बीमा का फायदा मिला ना कोई राहत.
सरकार ने की जुमले बाजी...
किसान नेता डॉ अजित नवले ने आगे बताया कि महाराष्ट्र के देवस्थान कि जमीन भी सरकार ने किसानों के नाम नहीं की. सरकार केवल जुमले बाजी करती रही. हमने कई अधिकारियों से मीटिंग की. आखिरी मीटिंग 3 दिन पहले मुख्यमंत्री के साथ हुई, लेकिन कुछ ठोस हल नहीं निकला. मुख्यमंत्री आश्वासन से ज्यादा कुछ नहीं दे पा रहे थे, इसलिये हमने लॉन्ग मार्च निकालने का फैसला किया.
क्या है किसानों की मांगे...
- किसानों को कर्जमाफी मिले.
- किसानों को फसल का उचित दाम मिले.
- फसल बीमा के तहत बीमा फायदा मिले.
- वनविभाग की जमीन आदिवासियों को मिले.
- पॉली हाऊस किसानों को राहत दी जाए.
- देवस्थान ट्रस्ट की जमीन किसानों को मिले.
- महाराष्ट्र में पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों का पानी महाराष्ट्र के किसानों को मिले.
- जानवरों को लिए चारा छावनी (Animal shelter) बने या निजी संस्थानों को इसे शुरू करने के लिए अनुदान मिले.
- साथ ही सूखाग्रस्त इलाके के किसानों को कर्ज और बिजली में राहत दी जाए.