महाराष्ट्र में सूखे का संकट गहराने और किसानों की परेशानियों को देखते हुए डोंबिवली में इस बार नवरात्रि का रंग कुछ अलग नजर आ रहा है. हर साल बड़े स्तर पर आयोजित होने वाले ‘रासरंग’ गरबा-दांडिया महोत्सव को इस बार रद्द कर दिया गया है. आयोजकों ने मनोरंजन के इस बड़े कार्यक्रम की जगह किसानों की खुशहाली, खेतों में पर्याप्त पानी और महाराष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना को प्राथमिकता दी है. नवरात्रोत्सव की शुरुआत धार्मिक अनुष्ठानों और महायज्ञ के साथ हुई. शाम को शास्त्रीय संगीत और नाट्यसंगीत की सुरमयी महफिल सजी, जिसमें मशहूर गायक राहुल देशपांडे ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.
डोंबिवली पूर्व स्थित डी.एन.सी. स्कूल के मैदान में डॉ. श्रीकांत शिंदे फाउंडेशन और श्री नवदुर्गा युवा मंडल की ओर से नवरात्रोत्सव आयोजित किया गया है. इस आयोजन में कल्याण लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे भी उपस्थित रहे. इस बार के आयोजन का मुख्य संदेश किसानों के प्रति संवेदनशीलता और उनकी खुशहाली की कामना है.
सूखे के बीच किसानों के लिए विशेष महायज्ञ
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति और किसानों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष नवरात्रोत्सव में नवकुंडात्मक सहस्रचंडी महायज्ञ का आयोजन किया गया. आयोजकों की कामना है कि राज्य के किसानों को सूखे के संकट से राहत मिले, खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो और अच्छी बारिश से खेतों में फिर से खुशहाली आए. प्रधानाचार्य वेदमूर्ति श्री रवींद्रजी पाठक के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-पाठ और हवन संपन्न हुआ. सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के हाथों घटस्थापना की गई.
इस दौरान देवी की आराधना कर महाराष्ट्र के सर्वांगीण विकास और किसान भाइयों की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की गई.सइस धार्मिक आयोजन के पीछे किसानों की मुश्किलों को लेकर चिंता और राज्य को सूखे के संकट से राहत मिलने की कामना प्रमुख रही. आयोजन के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि नवरात्रि जैसे बड़े सार्वजनिक उत्सवों में सामाजिक जिम्मेदारी और किसानों की स्थिति को भी प्राथमिकता दी जा सकती है.
नवरात्रि के दौरान डोंबिवली में हर साल ‘रासरंग’ गरबा-दांडिया महोत्सव आयोजित किया जाता था. इस कार्यक्रम में गरबा और दांडिया के जरिए लोग त्योहार का आनंद लेते थे. हालांकि, इस बार महाराष्ट्र के किसानों की समस्याओं और सूखे की पृष्ठभूमि को देखते हुए आयोजकों ने यह महोत्सव रद्द करने का फैसला किया.
सरकार की ओर से महाराष्ट्र के ज्यादातर तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने और किसानों की बदहाली को देखते हुए इस बार आयोजन की प्राथमिकताएं बदली गई हैं. गरबा-दांडिया महोत्सव के बजाय धार्मिक अनुष्ठानों, महायज्ञ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर जोर दिया जा रहा है.
आयोजकों के मुताबिक, इस पहल के जरिए किसानों के प्रति संवेदनशीलता और सामाजिक प्रतिबद्धता का संदेश देने की कोशिश की जा रही है. किसानों को ‘बलीराजा’ यानी अन्नदाता के रूप में देखते हुए उनके जीवन में खुशहाली आने और महाराष्ट्र के समृद्ध बनने की कामना की गई है. इस तरह इस वर्ष नवरात्रोत्सव में उत्सव की परंपरा को बनाए रखते हुए किसानों की परेशानियों को केंद्र में रखा गया है. ‘रासरंग’ दांडिया महोत्सव को रद्द करने का फैसला इसी सोच का हिस्सा है.
राहुल देशपांडे की गायकी से सजी संगीत की शाम
सुबह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत मशहूर गायक राहुल देशपांडे की संगीत प्रस्तुति के साथ हुई. शास्त्रीय संगीत और नाट्यसंगीत के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट गायकी के लिए लोकप्रिय राहुल देशपांडे की प्रस्तुति से डी.एन.सी. स्कूल मैदान का माहौल संगीतमय हो गया.उनकी गायकी सुनने के लिए बड़ी संख्या में संगीतप्रेमी पहुंचे. शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और नाट्यसंगीत की भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को प्रभावित किया. सुरों की मधुरता और उनकी गायकी का लोगों ने भरपूर आनंद लिया.
प्रस्तुति के दौरान तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया गया. इस वर्ष डोंबिवली के नवरात्रोत्सव में एक तरफ किसानों की खुशहाली के लिए महायज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान हुए, तो दूसरी तरफ संगीत के कार्यक्रम के जरिए सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला. ‘रासरंग’ दांडिया महोत्सव को रद्द करने और किसानों के लिए विशेष प्रार्थना करने के फैसले ने इस आयोजन को एक अलग पहचान दी है.