scorecardresearch
 

ECINet पर महाराष्ट्र CEO ने उठाए सवाल... 5 बदलावों के लिए आयोग को लिखी चिट्ठी

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस चोकलिंगम ने 24 सितंबर को ECI के अधिकारियों को ECINet सॉफ्टवेयर से जुड़ी दिक्कतों को लेकर चिट्ठी लिखी. उन्होंने सॉफ्टवेयर में 5 बदलाव करने की मांग की, ताकि ERO को कानून के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करने में परेशानी न हो.

Advertisement
X
ECINet के फंक्शन पर सवाल खड़े हो रहे हैं. (Photo: EC and Maharashtra CEO websites)
ECINet के फंक्शन पर सवाल खड़े हो रहे हैं. (Photo: EC and Maharashtra CEO websites)

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस चोकलिंगम ने ECINet सॉफ्टवेयर को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों को चिट्ठी लिखी है. 24 सितंबर को लिखी इस चिट्ठी में उन्होंने सॉफ्टवेयर में 5 बदलाव करने की मांग की है. उनका कहना है कि ERO यानी इलेक्टोरल रेजिस्ट्रेशन ऑफिसर को कानून के तहत कुछ मामलों में फैसला लेने का अधिकार है, लेकिन ECINet में उन अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए जरूरी विकल्प मौजूद नहीं हैं.

यह चिट्ठी सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, DG IT सीमा खन्ना, पवन दीवान और एके पाठक समेत ECI के अधिकारियों को भेजी गई है. चोकलिंगम ने इसमें ECINet की मौजूदा व्यवस्था से जुड़ी कई दिक्कतों का जिक्र किया है.

यह भी पढ़ें: दिल्ली की झुग्गी में पहुंचे राहुल गांधी, 728 लोगों में से SIR के बाद बचा सिर्फ एक वोटर

सुनवाई से छूट का विकल्प नहीं

चोकलिंगम ने कहा कि ERO के पास यह तय करने का अधिकार है कि किसी व्यक्ति को उसके सामने पेश होने की जरूरत है या नहीं. लेकिन ECINet में किसी व्यक्ति को सुनवाई से छूट देने का विकल्प मौजूद नहीं है. उन्होंने सॉफ्टवेयर में 'Exempted from Hearing' का विकल्प जोड़ने की मांग की है.

13 दस्तावेजों के अलावा भी विकल्प देने की मांग

चिट्ठी में नोटिस के पीछे दिए गए 13 दस्तावेजों का भी जिक्र किया गया है. चोकलिंगम के मुताबिक, ये दस्तावेजों की पूरी और आखिरी सूची नहीं हैं. इसलिए सॉफ्टवेयर में 14वें विकल्प के तौर पर 'Other Equivalent Document' का ऑप्शन होना चाहिए.

Advertisement

उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर, सेक्स वर्कर्स या बेघर लोगों के पास बताए गए 13 दस्तावेजों में से कोई दस्तावेज नहीं हो सकता. ऐसे मामलों में दूसरे बराबर दस्तावेज को स्वीकार करने का विकल्प होना चाहिए.

लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी पर ERO को फैसला लेने का अधिकार

चोकलिंगम ने कहा कि ERO को सभी तरह की 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' का निपटारा करने का अधिकार होना चाहिए. पहले BLO बयान और पंचनामा जैसी जानकारी जुटाते थे और उसके आधार पर ERO नाम से जुड़ी ऐसी गड़बड़ियों पर फैसला ले सकते थे. लेकिन ECINet में ERO को इस तरह फैसला लेने की सुविधा नहीं मिल रही है.

यह भी पढ़ें: बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट में एक और अर्जी, 22 लाख लोगों के नाम कटने पर उठे सवाल

उन्होंने हर डिस्क्रेपेंसी के लिए आखिरी SIR एक्सट्रैक्ट अपलोड करने की व्यवस्था को भी वैकल्पिक करने की मांग की. उनके मुताबिक, इसे सिर्फ उन मामलों में जरूरी किया जाना चाहिए जहां आखिरी SIR रिकॉर्ड में गड़बड़ी हो या सिस्टम की वजह से रिकॉर्ड मैच न हो रहा हो.

FAQ और अपील के विकल्प की भी मांग

चोकलिंगम ने कहा कि EROs के मन में प्रक्रिया को लेकर कई सवाल हैं और सिर्फ मौखिक निर्देश पर्याप्त नहीं हैं. उन्होंने नोटिस, दस्तावेज जमा करने, सुनवाई और मामले के निपटारे की प्रक्रिया को समझाने के लिए FAQ उपलब्ध कराने की मांग की है.

Advertisement

चिट्ठी में यह भी कहा गया है कि ERO के पास कागज पर और फैसले के स्तर पर अधिकार है, लेकिन सॉफ्टवेयर की सीमा के कारण उसे इस्तेमाल करने के लिए जरूरी 'बटन' नहीं है. इसके अलावा फैसला पलटने या अपील की प्रक्रिया के लिए भी ECINet में विकल्प देने की मांग की गई है, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में ERO को सिर्फ जोड़ने या हटाने की सुविधा मिलती है.

आसान भाषा में: ECI से महाराष्ट्र EC ने ये पांच मांगें रखीं

  1. सुनवाई से छूट का विकल्प
  2. 'Other Equivalent Document' का ऑप्शन
  3. लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी का निपटारा
  4. लास्ट SIR एक्सट्रैक्ट अपलोड करना वैकल्पिक हो
  5. FAQ और फैसले/अपील का विकल्प
---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement