गुरुग्राम की हाईराइज सोसायटियों में बिजली बिलों को लेकर मिल रही शिकायतों पर हरियाणा सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बिजली वितरण कंपनियों को ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में बिलिंग की प्रक्रिया पारदर्शी बनाने और निवासियों की समस्याओं का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों को आरडब्ल्यूए के साथ बैठक कर उनकी शिकायतें सुनने और उनका निपटारा करने को कहा है.
दरअसल, सोसायटियों में बिजली की तय दरों से ज्यादा वसूली और भारी-भरकम बिल मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं. इन शिकायतों के बीच हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने भी बिलिंग व्यवस्था की निगरानी तेज कर दी है. आयोग ने गुरुग्राम की कुछ सोसायटियों में बिजली बिलों की जांच के निर्देश दिए हैं.
ATS ट्रायम्फ सोसायटी के बिलों का होगा ऑडिट
गुरुग्राम के सेक्टर 104 स्थित एटीएस ट्रायम्फ सोसायटी में बिजली बिलिंग की जांच का मामला भी सामने आया है. यहां मई 2019 से अब तक के बिजली बिलों का व्यापक ऑडिट कराने का आदेश दिया गया है. इस सोसायटी में 300 से अधिक परिवार रहते हैं.
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि निवासियों से बिजली बिलों के नाम पर नियमानुसार राशि वसूली गई या नहीं. ऑडिट में अगर तय नियमों से अधिक वसूली की पुष्टि होती है, तो संबंधित डेवलपर और अन्य जिम्मेदार पक्षों को अतिरिक्त रकम लौटानी पड़ सकती है. इस जांच में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) की भूमिका भी अहम होगी.
नए बिलिंग सॉफ्टवेयर पर भी उठे सवाल
द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास सेक्टर 99 से 115 तक की सोसायटियों के आरडब्ल्यूए संगठन DXP-GDA ने नए यूनिफाइड बिलिंग सॉफ्टवेयर को लागू करने से पहले उसकी तकनीकी जांच की मांग की है. संगठन का कहना है कि सॉफ्टवेयर में संभावित तकनीकी खामियों और डेटा की कमी से बिलिंग में गड़बड़ी हो सकती है. इससे सोसायटियों और निवासियों पर आर्थिक बोझ पड़ने का खतरा है.
संगठन ने मांग की है कि सॉफ्टवेयर को पूरी तरह लागू करने से पहले तीन महीने तक उसकी जांच और परीक्षण किया जाए. इसके साथ ही छह महीने तक संभावित तकनीकी गड़बड़ियों के कारण होने वाली गलतियों पर दंडात्मक कार्रवाई से राहत देने की मांग भी की गई है.
गलत बिलों की शिकायतों पर जल्द कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बिजली बिलों से जुड़ी शिकायतों के जल्द समाधान के लिए हेल्पलाइन को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए हैं. इसका उद्देश्य यह है कि गलत बिल मिलने पर लोगों को बार-बार बिजली कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हो सके. इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है.