गुरुग्राम को हमेशा से देश की सबसे चमकदार और आधुनिक सिटी के तौर पर पेश किया जाता रहा है, जिसे लोग मिलेनियम सिटी के नाम से भी जानते हैं. लेकिन इसी शहर के IFFCO चौक पर अचानक एक सड़क धंस गई और वहां करीब 25 फीट गहरा गड्ढा बन गया. यह गड्ढा इतना बड़ा है कि इसे देखकर लोग हैरान रह गए और आने-जाने वालों में डर फैल गया. इस हादसे ने शहर की चमकदार छवि पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है.
मामला यहीं नहीं रुका. कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर सरकार पर तीखा तंज कसा, वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी जलभराव को लेकर पूछे गए सवाल से बचते नजर आए. आइए पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं.
IFFCO चौक कोई साधारण जगह नहीं है. यह गुरुग्राम के सबसे व्यस्त इलाकों में गिना जाता है, जहां से रोजाना हजारों लोग दफ्तर, घर और बाजार जाने के लिए गुजरते हैं. ऐसी जगह पर सड़क का अचानक धंस जाना सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं है, बल्कि यह बड़ी सुरक्षा चिंता भी है. गड्ढा इतना गहरा है कि अगर समय रहते इसका पता न चलता, तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था.
गुरुग्राम को सालों से मिलेनियम सिटी कहा जाता है, यानी एक ऐसा शहर जो आने वाले समय की झलक दिखाता है. ऊंची इमारतें, बड़ी कंपनियों के दफ्तर और महंगे मकान इस शहर की पहचान बन चुके हैं. लेकिन हर मानसून में यही शहर एक अलग तस्वीर पेश करता है.
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सड़कों पर पानी भरना, जाम लगना, नालियों का ओवरफ्लो होना और अब सड़क का धंसना, यह सब बताता है कि जमीनी हकीकत उतनी चमकदार नहीं है जितनी दिखाई जाती है. यही वजह है कि आलोचक अब इसे मजाक में डाउनग्राम तक कहने लगे हैं.
सवाल यह नहीं है कि तेज बारिश से नुकसान क्यों होता है, क्योंकि भारी बारिश किसी भी शहर की सड़कों पर असर डाल सकती है. असली सवाल यह है कि क्या गुरुग्राम जैसी तेजी से बढ़ती सिटी की सड़कें और नालियां उस बारिश को झेलने लायक बनाई गई हैं, जो हर साल यहां आती है.
अगर एक बड़ी और व्यस्त सड़क अचानक धंसकर 25 फीट का गड्ढा बन सकती है, तो प्रशासन को यह जरूर बताना चाहिए कि सड़क के नीचे आखिर क्या हुआ. क्या नालियों में कोई खराबी थी. क्या लगातार बारिश से जमीन कमजोर हो गई. क्या सड़क के नीचे कहीं रिसाव हो रहा था. क्या मॉनसून से पहले सड़क की जांच हुई थी और क्या इससे पहले भी धंसने के कोई संकेत मिले थे.
इस पूरे मामले ने सरकारी खर्च को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. गुरुग्राम में सड़कों, फ्लाईओवर, अंडरपास और नालियों पर सालों से भारी रकम खर्च की जा रही है. यह शहर देश की सबसे अहम आर्थिक जगहों में गिना जाता है. लेकिन सिर्फ पैसा खर्च करना काफी नहीं है, असली परीक्षा यह है कि जरूरत के समय यह इंफ्रास्ट्रक्चर काम आता है या नहीं. लोगों को यह जानने का हक है कि सड़क क्यों धंसी, क्या ऐसा खतरा शहर की दूसरी सड़कों पर भी है, और आगे इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे.
इस हादसे के बाद कांग्रेस पार्टी ने भी सरकार पर सीधा निशाना साधा. पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल से एक पोस्ट की गई, जिसमें लिखा गया कि सड़क के बीच तालाब देख लो दोस्तों. पोस्ट में तंज कसते हुए कहा गया कि मोदी जी ने नई टेक्नोलॉजी से सड़क बनवाई है, जो साल के छह महीने सड़क रहती है और छह महीने तालाब बन जाती है. पोस्ट में मजाकिया अंदाज में यह भी लिखा गया कि लोग वहां मछली पालन कर सकते हैं, डुबकी लगा सकते हैं और मजे कर सकते हैं. पोस्ट में IFFCO चौक, गुरुग्राम का सीधा जिक्र किया गया.
इसी बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी की चुप्पी भी चर्चा का विषय बन गई. पंचकूला में एक कार्यक्रम के दौरान जब आजतक के संवाददाता असीम बस्सी ने उनसे गुरुग्राम में लगातार हो रहे जलभराव को लेकर सवाल पूछा, तो सीएम चुप रहे और आगे बढ़ गए. उनके सुरक्षाकर्मियों ने संवाददाता का माइक भी हटा दिया. दोबारा सवाल पूछने की कोशिश हुई, तब भी सीएम ने कोई जवाब नहीं दिया और चलते रहे, जिसके बाद माइक फिर से हटा दिया गया.
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यह पूरा घटनाक्रम उसी समय सामने आया जब गुरुग्राम में सोमवार-मंगलवार को हुई भारी बारिश के चलते शहर के कई इलाकों में पानी भर गया था. हालात इतने खराब हो गए कि स्कूलों में ऑनलाइन क्लास चलानी पड़ी और कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों से घर से काम करने को कहा. सीएम का सवाल से बचना और लगातार हो रहा जलभराव, दोनों मिलकर सरकार की तैयारियों पर और सवाल खड़े कर रहे हैं.
विपक्ष की इस आलोचना को सिर्फ राजनीति कहकर खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसमें खर्च, योजना और जिम्मेदारी से जुड़े जायज सवाल भी शामिल हैं. आम लोगों की मांग बहुत सीधी है. उन्हें सुरक्षित सड़कें चाहिए, ऐसी नालियां चाहिए जो बारिश का पानी झेल सकें, और ऐसा प्रशासन चाहिए जो हादसा होने से पहले ही ध्यान दे. IFFCO चौक का यह 25 फीट गहरा गड्ढा सिर्फ एक सड़क की खराबी नहीं है, बल्कि यह उस शहर की तस्वीर पर भी बड़ा सवाल है, जो खुद को आधुनिक और वर्ल्ड-क्लास कहता है.