पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम से जुड़े जमीन आवंटन मामले में सिंगल जज के आदेश को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी. यूसुफ पठान ने इस आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में याचिका दाखिल की थी. पूर्व क्रिकेटर ने अब हाईकोर्ट में खेद जताते हुए याचिका वापस ले ली है. यूसुफ पठान की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को इस फैसले की जानकारी दी.
यूसुफ पठान की याचिका पर सुनवाई गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की बेंच में होनी थी. कोर्ट में पठान की ओर से पेश वकील ने कहा कि वे अपील वापस लेना चाहते हैं. पठान के वकील ने खेद भी प्रकट किया, जिसके बाद गुजरात हाईकोर्ट ने पूर्व क्रिकेटर की ओर से दाखिल याचिका खारिज कर दी.
अब इस मामले में यूसुफ पठान के पास दो ही विकल्प बचे हैं. पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर को अब या तो संबंधित प्लॉट खाली करना होगा या फिर कोर्ट के बाहर समाधान तलाशना होगा. गौरतलब है कि क्रिकेटर से राजनेता बने सांसद यूसुफ पठान का घर वडोदरा के तांदलजा इलाके में है. यह पूरा विवाद 978 वर्गमीटर के एक प्लॉट से जुड़ा हुआ है.
शु्भम पार्टी प्लॉट के पास स्थित इस प्लॉट का मालिकाना हक पाने के लिए यूसुफ पठान ने 2012 में आवेदन किया था. यूसुफ पठान के आवेदन को वडोदरा नगर निगम ने मंजूरी दे दी थी. साल 2012 में स्टैंडिंग कमेटी ने मार्केट रेट पर जमीन देने का प्रस्ताव रखा था. वडोदरा नगर निगम की आम सभा से मंजूरी के बाद ये प्रस्ताव राज्य सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था.
राज्य सरकार ने साल 2024 में जमीन का आवेदन ठुकरा दिया था. वडोदरा नगर निगम ने सुनवाई के दौरान जमीन पर पठान के दावे के खिलाफ दलील दी थी. वडोदरा नगर निगम की ओर से यह दलील दी गई थी कि भले ही एथलीट अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्लेयर रहा हो, सरकार से संपत्ति लेने का कोई अधिकार नहीं है.
वडोदरा नगर निगम ने कोर्ट में यह भी कहा था कि पठान ने एक रुपया भी नहीं दिया है और जमीन का कब्जा भी खाली नहीं किया है. इससे पहले, गुजरात हाईकोर्ट ने भी जमीन पर यूसुफ पठान के कब्जे को लेकर तल्ख टिप्पणी की थी. गुजरात हाईकोर्ट ने कहा था कि यूसुफ पठान को जमीन देने का प्रस्ताव केवल स्टैंडिंग कमेटी का था.
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स्टैंडिंग कमेटी से प्रस्ताव आम सभा (जनरल बॉडी) में गया और फिर सरकार के पास. यूसुफ पठान को जमीन का आवंटन हुआ ही नहीं था, तो फिर जमीन पर कब्जा कैसे कर लिया? बिना किसी नीलामी के आपको जमीन कैसे दी जा सकती है? हाईकोर्ट ने इस पर भी गौर किया कि बगैर किसी आदेश, आवंटन पत्र के यूसुफ पठान ने वहां बाउंड्री वॉल बना प्लॉट पर कब्जा कर लिया.
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हाईकोर्ट ने बगैर आवंटन पत्र, किसी कानूनी आदेश के प्लॉट पर यूसुफ पठान के कब्जे को अतिक्रमण माना. हालांकि, यूसुफ पठान के वकील ने दलील दी कि वडोदरा नगर निगम एक स्वायत्त संस्था है और इसलिए इसे जमीन आवंटन के लिए सरकार की मंजूरी प्राप्त करने की जरूरत नहीं है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यहां मुद्दा केवल धारा 79 का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक नीलामी की प्रक्रिया से बचने के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था.