दिल्ली की सड़कों पर आपको कुछ जगहों पर स्पीड लिमिट के बोर्ड दिखाई दे सकते हैं, लेकिन हर सड़क पर ऐसा नहीं है. शहर की कई अंदरूनी मुख्य सड़कों और कॉलोनी की गलियों में स्पीड लिमिट के बोर्ड नजर ही नहीं आते. ऐसे में वाहन चालक अक्सर अंदाजे के भरोसे रहते हैं. इसी बीच लाखों लोग यह जानने के लिए Google Maps या Apple Maps का सहारा लेते हैं कि किसी सड़क पर कानूनी तौर पर कितनी रफ्तार से वाहन चलाया जा सकता है.
हालांकि आजतक की ओर से दाखिल की गई एक आरटीआई से अहम जानकारी सामने आई है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अपनी आधिकारिक स्पीड लिमिट का डेटा गूगल मैप्स, एप्पल मैप्स या दूसरे डिजिटल नेविगेशन ऐप्स के साथ साझा नहीं करती. यानी आपके मोबाइल की स्क्रीन पर दिखाई दे रही स्पीड लिमिट का नंबर जरूरी नहीं कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड से लिया गया हो.
RTI में क्या पूछा गया?
आरटीआई में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस से पांच सीधे सवाल पूछे गए थे. इनमें यह जानने की कोशिश की गई थी कि दिल्ली में स्पीड लिमिट कैसे तय की जाती है, इसमें बदलाव कैसे किया जाता है और आम लोगों तक इसकी जानकारी कैसे पहुंचाई जाती है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के जवाब से पुष्टि हुई है कि विभाग सड़कवार स्पीड लिमिट की जानकारी गूगल मैप्स, एप्पल मैप्स और और MapMyIndia जैसे डिजिटल नेविगेशन प्लेटफॉर्म के साथ साझा नहीं करता.
इसका मतलब यह है कि किसी ऐसी सड़क पर जहां स्पीड लिमिट का बोर्ड नहीं लगा है, वहां अगर कोई वाहन चालक अपने मोबाइल पर दिखाई जा रही स्पीड लिमिट को देखकर रफ्तार तय करता है, तो वह ऐसे डेटा पर निर्भर हो रहा है जिसे ट्रैफिक विभाग ने जरूरी नहीं कि सत्यापित या अपडेट किया हो.
ऐसी स्थिति में चालक को उस स्पीड लिमिट के उल्लंघन पर चालान का सामना करना पड़ सकता है, जबकि सड़क पर उसे वास्तविक सीमा बताने वाला कोई बोर्ड दिखाई ही न दिया हो.
दिल्ली में स्पीड लिमिट कैसे तय होती है?
दिल्ली में स्पीड लिमिट तय करने और उसमें बदलाव करने का अधिकार दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के पास है. फिलहाल लागू नियम 8 जून 2021 को जारी की गई अधिसूचना से जुड़े हैं. इसमें दिल्ली की अलग-अलग सड़कों और वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा तय की गई है.
कारों और टैक्सियों को सड़क के हिसाब से 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार की अनुमति है. दोपहिया और छोटे वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि बसों और ट्रकों के लिए पूरे शहर में अधिकतम सीमा 40 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है.
रिहायशी कॉलोनियों और बाजारों के अंदर की सड़कों के लिए अधिकतम गति सीमा 30 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है.
दिल्ली की प्रमुख सड़कों पर कारों की स्पीड लिमिट
दिल्ली की कुछ सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली सड़कों और मार्गों पर कारों के लिए तय गति सीमा इस प्रकार है:
NH-48 (गुड़गांव रोड): परेड रोड/गुड़गांव रोड क्रॉसिंग से दिल्ली-गुड़गांव सीमा तक 70 किलोमीटर प्रति घंटा.
DND फ्लाईवे-मयूर विहार लिंक रोड: 70 किलोमीटर प्रति घंटा.
नोएडा टोल रोड: दिल्ली की तरफ से टोल गेट तक सीधे हिस्से पर 70 किलोमीटर प्रति घंटा, जबकि घुमावदार हिस्सों पर यह सीमा घटकर 50 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाती है.
रिंग रोड: चांदगी राम अखाड़ा से आजादपुर तक, ISBT, राजघाट, ITO, AIIMS और धौला कुआं होते हुए 60 किलोमीटर प्रति घंटा.
सेंट्रल स्पाइन रोड: महिपालपुर चौक से IGI एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 तक 70 किलोमीटर प्रति घंटा.
रिंग रोड और आउटर रिंग रोड के बीच की सभी मुख्य सड़कें और पूरा ट्रांस-यमुना क्षेत्र: 50 किलोमीटर प्रति घंटा.
फ्लाईओवर के लूप: पूरे शहर में 40 किलोमीटर प्रति घंटा.
स्पीड लिमिट तय करने के तरीके से साफ है कि चौड़ी और हाईवे जैसी सड़कों पर अपेक्षाकृत ज्यादा गति सीमा रखी गई है. वहीं, जिन सड़कों पर ज्यादा चौराहे, घुमाव या रिहायशी इलाके हैं, वहां गति सीमा कम कर दी गई है. लेकिन जिन हिस्सों में स्पीड लिमिट के बोर्ड नहीं लगे हैं, वहां वाहन चालकों के पास इस सीमा की पुष्टि करने का कोई सीधा तरीका नहीं होता. ऐसी स्थिति में वे अक्सर नेविगेशन ऐप पर निर्भर रहते हैं. RTI से सामने आया है कि इन ऐप्स को ट्रैफिक पुलिस की ओर से आधिकारिक सड़कवार स्पीड लिमिट का डेटा दिया ही नहीं जाता.
स्पीड लिमिट से कितनी ज्यादा रफ्तार पर चालान नहीं होता?
दिल्ली में वाहन चलाने वाले बहुत से लोगों को शायद यह जानकारी नहीं है कि स्पीड लिमिट का बोर्ड चालान के लिए बिल्कुल सटीक कटऑफ नहीं है. चालान जारी करने से पहले 5 फीसदी तक की एक छूट यानी 'स्पीड कुशन' लागू होती है. इसका मतलब सड़क पर तय गति सीमा से 5 फीसदी तक ज्यादा रफ्तार होने पर चालान जारी नहीं किया जाता.
इसे ऐसे समझिए कि अगर किसी सड़क पर 60 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड लिमिट है, तो आप तकनीकी तौर पर 63 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार पर भी चालान से बचे रह सकते हैं. वहीं 70 किलोमीटर प्रति घंटा की सीमा वाली सड़क, जैसे NH-48 या एयरपोर्ट की सेंट्रल स्पाइन रोड पर यह सीमा 5 फीसदी की छूट के साथ 73.5 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो जाती है.
40 किलोमीटर प्रति घंटा की सीमा वाले ट्रक और बसों को भी 5 फीसदी की अतिरिक्त गुंजाइश मिलती है. यानी 42 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार पर चालान नहीं किया जाता. यहां तक कि 30 किलोमीटर प्रति घंटा की सीमा वाली रिहायशी कॉलोनी के अंदर भी 31.5 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार पर चालान नहीं होगा. लेकिन इस सीमा को पार करते ही स्थिति बदल जाती है. 5 फीसदी की इस छूट से अधिक रफ्तार को उल्लंघन माना जाता है और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 183 के तहत कार्रवाई की जा सकती है.